तबरेज अंसारी तो याद ही होगा
जिसको हिंदू भीड़ ने चोरी के इल्जाम में मार दिया था
आज रायबरेली में वही पुरानी नीति दोहराते हुए एक दलित समाज के युवक की हत्या कर दी गई
पैटर्न बन गया है चोरी का इल्जाम लगा कर हत्या कर दो
चलिए जानते हैं "मोलाना हुसैन अहमद मदनी" कौन थे ?
नाम: मौलाना हुसैन अहमद मदनी
पिता का नाम: हबीबुर्रहमान
गृह जनपद: उन्नाव उत्तर प्रदेश
काम: स्वतंत्रता सेनानी 👇
Assalamu_Alaikum
अल्लाह तआ़ला का इरशाद है:
गरज़ कि बहुत ऊंची शान है अल्लाह की जो सही माने में बादशाह है
उसके सिवा कोई मअ़बूद नहीं
वह इज़्ज़त वाले अर्श का मालिक है
अल मोमिनून: 116
अपने महाज पर डटे रहिए
यानी अपने दीन मज़हब-ए-इस्लाम पर जमे रहिए,
हालात कितने भी संगीन क्यों न हों
अल्लाह की रस्सी यानी इस्लाम को मजबूती से थामे रहिए
दीन के कामों को न छोड़ना
यहां तक कि मौत आ जाए
जो भी मिलता है उसी को देखने लगता हूँ मैं
क्या करूं गांव से जो आया हूँ मैं
मैं तेरे साहिल पे आया था कि देखूं तेरा ज़र्फ़
ऐ समंदर तुझसे किसने कह दिया कि प्यासा हूँ मैं
शायर बनने के लिए मंच चाहिए था , जहां मंच मिला दो मिसरे कह दिया
पैसा लिया घर चला गया
गलती उसे मसीहा समझने वालों की है
बीजेपी को सत्ता से बाहर करना इतना आसान नहीं है , मित्र
यहां दो नारियल और चुटकी भर सिंदूर व चंद गेंदे के फूल
अच्छे अच्छों को रास्ता बदलने पर मजबूर कर सकते हैं
हम भारतियों का IQ लेवल क्या इतना कमजोर है ?
एक अनपढ़.... लेकिन "बा-पर्दा" और "बा-हया"....औरत
ऐसी औरतों से कहीं बेहतर है
जिसके पास "डिग्रियां महंगा लिबास और अमीरी" तो है......
लेकिन "इस्लाम" का शआ़र "पर्दा" और "हया" नहीं_ _ _
अगर इस्लाम धर्म के कारण आतंकवाद होता
या मुसलमान आतंकवादी होते ,तो आतंकवाद का सब से बड़ा मरकज़ मुसलमानों की सब से बड़ी आबादी वाला देश इंडोनेशिया होता
लेकिन इस्लाम या मुसलमानों का आतंकवाद से कोई लेना देना नहीं है
पश्चिम एशिया में आतंकवाद बस तेल का खेल है
भारत में वोट का खेल है
मदरसों पर ऐसे लोग उंगली न उठाएं
जिनका देश की आजादी में कोई योगदान नहीं है
जिन्होंने देश की आजादी के लिए एक संगठन नहीं बनाया
मुसलमानों ने देश की आजादी के लिए मदरसे बनाये
संगठन बनाए , मदरसों के लाखों मुसलमान, व आलिम-ए-दीन शहीद हुए हैं
मदरसों से तकलीफ अंग्रेजों के गुलामों को होती है
रजत मल्होत्रा जी बेशक अल्लाह ने "क़ुरआन" को पूरी दुनिया के इंसानों के लिए हिदायत की किताब बना भेजा है
इसीलिए "क़ुरआन-ए-करीम" में अल्लाह अपने सभी बंदों को मुखातिब करता है