इट��वा कथावाचक अपमान काण्ड में यादव सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिव कुमार यादव को हाउस अरेस्ट करने पर चेतावनी दिया है कि झूठा आरोप व जहरीले बयान देने वाली "रेनू तिवारी" की गिरफ्तारी नहीं हुई तो होगा इटावा कूच!
इटावा जिले में पिछड़े वर्ग के कथावाचक मुकुटमणि यादव और उनके सहयोगी के साथ की गई जातिगत अभद्रता और अमानवीय व्यवहार के विरोध में आवाज़ उठाने पर यादव सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिव कुमार यादव को लखनऊ पुलिस ने हाउस अरेस्ट कर लिया है The Freedom Voice के पत्रकार @Babluyamethi से बातचीत में शिव कुमार यादव ने साफ़ कहा कि:-
"अगर रेनू तिवारी जिसने कथावाचक के साथ अपमानजनक व्यवहार क��या, जातिवादी और हिंसक बयान दिए को तत्काल गिरफ्तार नहीं किया गया, तो यादव सेना पूरे बहुजन समाज के साथ मिलकर पुनः इटावा कूच करेगी!"
यह अब केवल एक घटना का नहीं, बल्कि बहुजन समाज के स्वाभिमान, गरिमा और संविधानिक अधिकारों का है जब अपराध करने वाली महिला खुलेआम ज़हर उगल रही हो और आज़ाद घूम रही हो, और जब शांतिपूर्ण विरोध व विधिक मदद करने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं को नज़रबंद किया जा रहा है तो यह साफ़ दिखता है कि कानून का इस्तेमाल "जाति देखकर" किया जा रहा है।
#Etawah @etawahpolice @Uppolice
मैं स्पष्ट रूप से BJP की बेशर्मी की निंदा करता हूं।
मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान, मोहन यादव ने जिन OBC छात्रों के साथ धोखा किया है, उसका भुगतान उन्हें आने वाले समय में करना पड़ेगा।
BJP सरकार ने जिस तरह से OBC छात्रों के साथ व��श्वासघात किया है, उन्हें जल्द से जल्द नियुक्तियां दे, क्योंकि उनके साथ अन्याय सरकार ने किया है।
व्यापम घोटाला सबको याद है। हालत ये है कि प्रदेश की कोई भी भर्ती बिना धांधली के ख़त्म नहीं होती। धांधली, BJP के चरित्र का हिस्सा बन गया है।
हमारी मांग:
• तत्काल 27% आरक्षण लागू हो
• जिन छात्रों को 6 साल से प्रताड़ित किया गया, उन्हें नियुक्तियां दी जाएं
• छात्रों को सर्विस के साथ पिछले 6 साल ��ा वेतन दिया जाए
• शिवराज सिंह चौहान और मोहन यादव सार्वजनिक तौर पर कान पकड़कर प्रदेश के लोगों से माफी मांगें
: @INCMP अध्यक्ष @jitupatwari जी
हरियाणा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी में चल रहे छात्र आंदोलन पर नेशनल मीडिया आँख मूँदकर बैठा हुआ है.
पर पिछले 15 दिनों से छात्र ज़बरदस्त संघर्ष कर रहे.
आंदोलन की कुछ झलकियां
अनिरुद्धाचार्य अपनी जाति छिपाकर कथा क्यों करते है
जया किशोरी अपनी जाति छिपाकर कथा क्यों करती है
कुमार विश्वास अपनी जाति छिपाकर कथा क्यों करता है
देवी चित्रलेखा अपनी जाति छिपाकर कथा क्यों करती है
देवकीनंदन ठाकुर अपनी जाति छिपाकर कथा क्यों करते है
जो मुकुट मणि पर जाति छिपाने का आरोप लगा रहे है वो मनुवादी बताए ये लोग अपनी जाति क्यों छिपाते है
खबर मिल रह��� है कि इटावा के अंदर उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक के दवाब में पुलिस प्रशासन स्कूलों में पहुंच कर यादव समाज के निर्दोष छात्रों को गिरफ़्तार कर रही है जब एक दलित समाज के अध्यापक ने पुलिस से बात करने का प्रयास किया तो दरोगा मां बहन की गलियां देते हुए अध्यापक को पीटने लगा प्रदेश में पुलिस का आतंक... निर्दोष यादव युवाओं को गिरफ्तार कर समाज को भयभीत कर चुप कराने का प्रयास किया जा रहा है। अन्याय की हद प��र मत करो साहब कहीं ऐसा न हो कि हमारे यादव समाज के सब्र का बांध टूट जाए।
@brajeshpathakup @Uppolice @etawahpolice @dgpup @myogiadityanath @yadavakhilesh
@dheerajpat9396@rajkumarbhatisp संघियों का हमेशा से यही तरीका रहा है कि पूरा सच ना दिखाओ,नहीं तो यही नंगे हो जायेगे।
जाति बताना और जाति का नाम लेकर अपम���न करना अलग अलग बाते होती है। अगर संघियों को ये पता होता कि व्योमिका सिंह,राजपूत नहीं चमार जाति से है तो ये मनुवादी उन्हें भी ट्रॉल करते,बस यही बोला रामगोपाल ने।
@KraantiKumar पूरा मामला ये है कि मध्यप्रदेश के हाइकोर्ट के मुख्य न्यायधीश के आदेश पर ये मूर्ति लगाई जानी थी।लेकिन कुछ संघी मानसिकता वाले मनुवादी वकीलों को ये बात हजम नही हुई और खुलेआम बवाल किया।
अगर ये मनुवादी वकील संघी नही होते तो अब तक यहा की सरकार या bar association कार्यवाही कर चुकी होती।
ग्वालियर, मध्यप्रदेश में जब ���ए हाईकोर्ट परिसर में संविधान निर्माता, सामाजिक न्याय के पुरोधा, और करोड़ों दलित-पिछड़ों के मसीहा डॉ. भीमराव आंबेडकर की मूर्ति लगाने की बात उठी, तो कुछ सामंतवादी और मनुवादी वकीलों को मिर्ची क्यों लग गई?
संविधान से नफरत करने वाले ये लोग कौन है? जब कोर्ट संविधान से चलता है, तो वहां संविधान निर्माता की मूर्ति लगाने पर ऐतराज़ किसे है? दरअसल, ये सिर्फ एक मूर्ति का विरोध नहीं है बल्कि ये विरोध उस विचार का जो सदियों की गुलामी, छुआछूत, और जातिवादी ढांचे को जड़ से खत्म करता है जो लोग आज बाबासाहेब की मूर्ति का विरोध कर रहे हैं, वे असल में उसी मनुवादी व्यवस्था के पोषक हैं जो सदियों से बहुजन समाज को न्याय से वंचित करती आई है!
अगर मूर्ति नहीं लगी, तो ये सिर्फ विरोध नहीं होगा जन आंदोलन होगा सड़क से संसद तक आवाज़ उठेगी न्यायालय में अगर न्याय के प्रतीक की जगह नहीं होगी, तो फिर इस व्यवस्था से भरोसा उठ जाएगा!
@DrMohanYadav51 @DGP_MP @aiobcsa @ObcMahasabha_
@KraantiKumar ये मत भूलो मोदी ने फिर से उपदेश दिया है ना कि प्रेस कॉन्फ्रेंस की है। Terror और talk साथ में नहीं हो सकती तो सीजफायर क्या हवा में कर आए? बिना talk के तो हुआ नहीं होगा।
@mandeeppunia1 देश को पहला ऐसा निकम्मा और डरपोक प्रधानमंत्री मिला है जिसके अंदर हिम्मत नहीं प्रेस कॉन्फ्रेंस करने की। बस राजाओं और नवाबों की तरह फरमान जारी कर देता है,जिसे संबोधन का नाम दे दिया जाता है।
सैलूट है ऐसे लोगों को जो इस तरह की सिचुएशन में कॉमन सेंस गिरवी नहीं रखते
सरदार अमरीक सिंह जो गोलीबारी में मारे गए, उनके परिवार वाले इस मुश्किल घड़ी में भी सहानुभूति बटोरने की बजाय प्रोपेगेंडा को बस्ट कर रहे हैं ताकि उनके नाम पर कोई दंगा फसाद न कर पाए
सुना है कि मिस्टर बक्सी ने सिक्योरिटी एजेंसी खोल रखी है। 12 ��ंटे की गार्ड ड्यूटी के लिए 10 से 15 हज़ार रुपये में लोगों की भर्ती करते हैं। मोटा पैसा बनाते हैं और देशभक्ति पर उपदेश भी देते रहते हैं
यह मेजर अजमेर सिंह गोयत (रिटायर्ड) की पत्नी सुदेश गोयत हैं. बड़ी जरूरी बात बोल रही हैं.
भारत की सेना जितने प्रोफेशनल अंदाज़ में काम कर रही है और नौकरशाह जितना संयमित बोल रहे हैं टीवी स्टूडियो और सोशल मीडिया इसके उलट अलग ही लेवल का पागलपन फैला रहे.
भाई ये कोई भारत-पाक बॉर्डर नहीं है, ये ग्वालियर का नया हाईकोर्ट है।
सरकार यहां बाबासाहेब आंबेडकर की मूर्ति लगाना चाहती है, लेकिन कुछ वकील ज़िद पर अड़े हैं कि मूर्ति नहीं लगने देंगे।
हद तो तब हो गई जब महिला पुलिसकर्मियों से बदतमी��ी करने लगे और जबरदस्ती तिरंगा लगाकर माहौल भटकाने की कोशिश कर रहे हैं।
@AnjulBamhrolia ये संघी अपनी जातिवादी मानसिकता को छुपाने के लिए तिरंगा के पीछे छुपते है लेकिन 2002 से पहले तक इन्होंने तिरंगा नहीं फहराया।
और दूसरी तरफ हिंदू और सनातनी एकता की बात करने वाले संघ और बीजेपी वाले बताए कि इतनी नफरत क्यों है बाबा साहब के खिलाफ? और इन जातंकवादियों पर कब कार्यवाही होगी?
2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के मंच पर अखिलेश यादव के हाथ में "फरसा" थमाने वाले अब 2027 विधानसभा चुनाव से पहले फिर सक्रिय हैं यह कोई प्रतीक मा���्र नहीं है, बल्कि एक खतरनाक वैचारिक संकेत है कि समाजवादी धारा को सामाजिक न्याय से मोड़कर मनुवादी प्रतीकों में ढाला जा रहा है!
जिस फरसे को ब्राम्हण परशुराम की पहचान बताया जाता है, वह कोई साधारण चरित्र नहीं बल्कि हिंसा, पितृसत्ता और ब्राह्मणवादी आतंक का प्रतीक है महात्मा ज्योतिबा फूले ने खुद लिखा कि पारशुराम वह पात्र है जिस���े केवल शक के आधार पर अपनी ही माँ की हत्या की क्या ऐसे हिंसक, क्रूर, स्त्री विरोधी व्यक्ति को सामाजिक न्याय व समतामूलक समाज की बात करने वाले अखिलेश यादव के मंच पर प्रतीक बनाकर पेश करना फूले-अंबेडकर-पेरियार की विचारधारा का अपमान नहीं?
डॉ. भीमराव अंबेडकर ने ब्राह्मणवाद को सामाजिक अन्याय व शोषण की जड़ कहा, और पेरियार ने प्रतीकों की राजनीति को ब्राह्मणवादी माया जाल बताया ऐसे में PDA (पिछड़ा-दलित-आ��िवासी-अल्पसंख्यक) की लड़ाई क्या उन प्रतीकों के सहारे लड़ी जाएगी, जिन्होंने सदियों तक इन्हीं वर्गों को अपमानित और उत्पीड़ित किया है?
समाजवादी पार्टी अगर सच में फूले, अंबेडकर, पेरियार के सामाजिक न्याय, समतामूलक विचारधारा को मानती है तो उसे खुलकर सामाजिक न्याय के द्रविड़ मॉडल को अपनाना होगा क्योंकि यह सिर्फ समाजवादियों का राजनीतिक रणनीति नहीं बल्कि सामाजिक न्याय का वैचारिक गिरावट है!
PDA और सामाजिक न्याय की लड़ाई मनुवादी, सामंतवादी मानसिकता क�� साथ नहीं लड़ी जा सकती बल्कि उसके खिलाफ फूले-अम्बेडकर-पेरियार की विचारधारा से ही लड़ा जा सकता है!
@yadavakhilesh @samajwadiparty #SocialJustice #सामाजिक_न्याय #परसुराम
आप लोगों को याद है या नही, एक दौर में आज तक न्यूज़ चैनल पर पुण्य प्रसून वाजपेई ने 86 में से 56 यादव SDM की झूठी खबर फैलाकर,
अखिलेश यादव सरकार के खिलाफ पिछड़ी जातियों को भड़काने का काम किया था. समाजवादी पार्टी ने तब पूण्य प्रसून वाजपेई के इस झूठ दूध का दूध पानी पानी नही कर पाई.
अब चित्रा त्रिपाठी ने बिना किसी प्रमाण के कह रही हैं कि UP में पिछड़ों का सारा हक यादव और कुर्मी खा रहे है.
पुण्य प्रसून वाजपेयी और चित्रा त्रिपाठी दोनों एक जाति से हैं. इस जाति के पत्रकार नही चाहते हैं OBC जातियों में एकता बने. ये लोग बिना जाति जनगणना के झूठा प्रचार करेंगे OBC आरक्षण में ये जाति हक अकेले हक खा रही है, SC में ये जाति हक़ खा रही,
ताकि OBC SC ST जातियां का आपसी भाईचारा खराब हो और ब्राह्मण और BJP का वर्चस्व बरकरार रहे.
सोशल मीडिया पर लोग DoPT के अधिकारियों को सवालों के घेरे में खड़ा कर रहे हैं , 6 अधिकारियों के केस में लापरवाही क्यों बरती जा रही है ?
1) 6 IAS अधिकारियों के ऊपर जो जांच बिठाई गई थी उसमें अभी तक कोई फैसला क्यों नहीं आया है? उसको प्रतिदिन क्यों टाला जा रहा है ?
2) UPSC नोटिफिकेशन में डिसेबिलिटी जांच के लिए मेडिकल ऑथोरिटी AIIMS दिल्ली है , लेकिन इन ��िविल सेवकों के विकलांगता की जाँच दोबारा लेडी हार्डिंग अस्पताल में क्यों करवाई जा रही है ? एम्स दिल्ली के ही प्रोफेसर्स को दोबारा मेडिकल की जिम्मेदारी क्यों नहीं दी गई ?जब पावर एम्स को है तो क्या लेडी हार्डिंग द्वारा बनाई गई रिपोर्ट कोर्ट में स्टैंड कर पाएगी ? क्या गारंटी है कि वहां के डॉक्टर्स से सेटिंग नहीं हो सकती ? कुछ सीनियर अधिकारियों का कहना है कि लेडी हार्डिंग अस्पताल का ईमानदारी से दूर दूर तक कोई ��ास्ता नहीं है।
3) DoPT के अंडर सेक्रेटरी लेवल पर एक अधिकारी है जिनका नाम अंशुमान मिश्रा जी है , जो 3 साल से भी ज्यादा समय से उसी कुर्सी से चिपके हुए हैं और बहुत ही ज्यादा इन्फ्लूएंशियल हैं , बीते 3.5 सालों में ही UPSC में धांधली ज्यादा देखने को मिली है, जब सामान्य पोस्ट में इतने दिनों में ट्रांसफर हो जाते हैं फिर इतनी सेंसेटिव पोस्ट पर 3 वर्षों (CVC Circular 22/10/22) से भी ज्यादा समय से होने के बाद भी इनका ट्रांसफर क्य���ं नहीं हो रहा है ?
4) पूजा खेड़कर ने दो बार अपनी डिसेबिलिटी बदली उसके बाद भी DoPT उसको पकड़ नहीं पाया ? कोई तो होगा जिसने उसकी मदद की ? जिस तरह से तमाम सबूत होने के बाद भी पूजा खेड़कर को बचाया जा रहा है , क्या इन अधिकारियों को भी क्लीन चिट मिल जाएगी??
5) इन अधिकारियों के साथ साथ एम्स के उन डॉक्टर्स के पैनल के ऊपर भी FIR हो जिसने इन कैंडिडेट्स की मेडिकल रिपोर्ट्स बनाई ,
6) सोशल मीडिया के दबाव की वजह से DoPT के अधिकारियों में कोई रिप्लाई ड्राफ्ट करने की हिम्मत नहीं कर पा रहा है ।
#UPSCscam