#रामचरितमानसअनुसारमोक्षकैसेहो
हिन्दु समाज "रामचरित मानस" को महाकाव्य मानता है लेकिन इसमें छुपे रहस्यों को कोई नहीं समझ पाया। इसके प्रमुख पात्रों को संत रामपाल जी महाराज जी ने प्रकट किए है जिसका ज्ञान हमें अब तक न था।
जरूर देखें Factful Debates Youtube Channel और जाने असली सार।
#शास्त्रविरुद्ध_शास्त्रानुकूल
शास्त्र विरुद्ध vs शास्त्र अनुकूल साधना
अनेक देवी-देवताओ की पूजा करना शास्त्र विरुद्ध साधना है।
शास्त्रों के अनुसार, एक सर्वशक्तिमान पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब जी की भक्ति पूर्ण संत द्वारा नाम उपदेश लेकर करना शास्त्र अनुकूल साधना है। वर्तमान में
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शास्त्र विरुद्ध vs शास्त्र अनुकूल साधना
मनमानी पूजा करना, हठ योग, मैडिटेशन, शास्त्र विरुद्ध कर्मकांड, श्राद्ध आदि शास्त्रों के विरुद्ध साधनाएं हैं।
संत रामपाल जी महाराज ने ऋग्वेद मण्डल 1 अध्याय 1 सूक्त 11 मन्त्र 3, गीता अ. 17 श्लोक 23, सामवेद मंत्र
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पवित्र गीता के अध्याय 7 श्लोक 18 में गीता ज्ञान दाता (काल) ने अपनी भक्ति को अश्रेष्ठ बताया है। जबकि ज्यादातर श्रद्धालु देवी-देवताओं की भक्ति में ही लगे हुए हैं।
पवित्र सद्ग्रंथों में वर्णित पूर्ण परमात्मा को पाने की शास्त्र अनुकूल साधना जानने के लिए
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पवित्र गीता जी के अध्याय 9 श्लोक 25 में लिखा है कि भूत पूजने वाले भूत बनेंगे, पितरों को पूजने वाले पितरों को प्राप्त होंगे। इससे सिद्ध है कि भूत पूजा, पितर पूजा, श्राद्ध, पिंडदान यह सभी शास्त्रविरुद्ध मनमाना आचरण है।
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सतलोक में पुनर्जन्म नहीं
सनातन परम धाम को अमर लोक सतलोक कहा जाता है। उस सत्यलोक में जाने के पश्चात् साधक का जन्म-मृत्यु का चक्र सदा के लिए समाप्त हो जाता है।
बंदीछोड़ सतगुरु रामपाल जी महाराज
#श्राद्धकी_शास्त्रानुकूल_विधि
मेरे अज़ीज़ हिंदुओं
स्वयं पढ़ो अपने ग्रंथ
गीता अध्याय 9 श्लोक 25 में कहा है कि जो पित्तरों की पूजा करते हैं, वे पित्तर योनि प्राप्त करेंगे, मोक्ष नहीं होगा।जो भूत पूजते हैं, वे भूत बनेंगे। श्राद्ध करना पित्तर पूजा तथा भूत पूजा है।
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मृत्यु के बाद हिन्दू साहेबान द्वारा कराए जाने वाले कर्मकांडो जेसे श्राद्घ आदि पर प्रकाश डालते हुए कहते है -
आग्नि लगा दिया जब लंबा, फूंक दिया उस ठाही। पुराण उठा फिर पंडित आए, पीछे गरुड़ पढ़ाई।।
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मनुष्य जीवन में हम कितने अच्छे अर्थात् 56 प्रकार के भोजन खाते हैं। भक्ति न करने से या शास्त्रविरूद्ध साधना करने से गधा बनेगा, फिर ये छप्पन प्रकार के भोजन कहाँ प्राप्त होंगे, कहीं कुरड़ियों(रूड़ी) पर पेट भरने के लिए घास खाने जाएगा।
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#श्राद्धकी_शास्त्रानुकूल_विधि
श्रीमद्भगवत गीता के अध्याय 9 श्लोक 25 में गीता ज्ञान दाता ने कहा है कि जो पितर पूजा (श्राद्ध आदि) करते हैं, वे मोक्ष प्राप्त नही कर पाते, बल्कि वे पितर की योनि को प्राप्त होते हैं।
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#श्राद्धकी_शास्त्रानुकूल_विधि
पूर्ण गुरू से दीक्षा लेकर मोक्ष प्राप्त करता। जिस कारण से वह न प्रेत बनता, न पितर बनता, न पशु-पक्षी आदि-आदि के शरीरों में कष्ट उठाता। मृत्यु के पश्चात गरूड़ पुराण के पाठ का मृत व्यक्ति को कोई लाभ नहीं मिलता।
🙏जानने के लिए पढ़ें पुस्तक "ज्ञान - गंगा
#श्राद्धकी_शास्त्रानुकूल_विधि
🔥जीवित बाप के लठ्ठम लठ्ठा, मूवे गंग पहुचैया।
जब आवे आसोज का महीना, कौवा बाप बनईयां।
जीवित माता पिता का बच्चे सम्मान नही करते और मरने के बाद अस्थियों को गंगा में विसर्जन करने के लिए जाते है और श्राद्ध निकालते हैं। ये सब शास्त्र विरुद्ध है।
परमात्मा
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गीता जी अध्याय 3 श्लोक 6 व गीता अध्याय 17 श्लोक 5, 6 में मेडिटेशन, हठयोग (तपस्या) के लिए मना किया गया है।
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