☆☆Banking and Credit Card Enthusiast 💳 ☆☆
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अब पता चला बिहार क्यों इतना पिछड़ा रह गया, सोचिए डॉलफिन जैसे दुर्लभ जीव प्राणी को चंद पैसे के लिए मार दिया क्यूँकि डॉलफिन से तेल निकालेगा… और बेशर्मी से कबूल भी कर रहा है ..! सहरसा पुलिस और वहाँ के अधिकारी इस व्यक्ति को पकड़ के जल्द जेल भेजे ..@SaharsaDm@SaharsaPolice#Dolphin #ganga #Bihar #sahrsa
ये रहा आईने अकबरी👇
मुग़ल काल में जिन जातियों को ज़मींदारी मिली उनमें हैं
-अहीर
-जाट
-गुर्जर
-कुर्मी
और आज ये सब जमींदार "पिछड़े" बनकर आरक्षण ले रहे हैं!
है ना कमाल?? ______ @neha_laldas
"British Rule in India would have been Impossible If the Untouchables had not helped the British to Conquer India" - Dr Ambedkar.
Which dominate caste you are talking about?
> NDA's Ramdas Athawale
> NDA's Chirag Paswan
> SP's Akhilesh Yadav
> Bhim Army's Ravan
> BSP's Mayawati
All of them are speaking against protesters in one voice. This clearly shows that the GCs has no political party in this country. The time has come for GCs to unite and form its own political party!
जहाँ चीफ़ सेक्रेटरी का बच्चा पढ़ता है
वहाँ SC/ST का भी बच्चा पढ़े
हॉस्टल, भोजन, ट्यूशन और पढ़ाई के लिए हर वो सुविधा जो चीफ़ सेक्रेटरी के बच्चे को मिले वही सुविधा SC/ST के बच्चे को भी मिलनी चाहिए
लेकिन यह कहना की वो SC/ST है इसलिए -40 अंक लाने वाला भी सर्जन डॉक्टर बन सकता है और 730 अंक लाने वाले से बेहतर है, यह ग़लत है, यह अन्याय है,
और यह अन्याय केवल एक जाति के साथ नहीं अपितु समाज के प्रत्येक व्यक्ति के साथ है।
और देखा जाए तो ऐसा करके हम स्वयं अपने देश को “मानसिक रूप से कुपोषित” कर रहे है
तथा “कुपोषित भारत” कभी “विकसित भारत” नहीं बना सकता।”
मेरिट को आधार बनाओ तथा कंपीट कराओ बच्चो को,
जाति का मेरिट से कुछ लेना-देना नहीं है।
GC वाले Debate के लिए पूरी तरह तैयार हैं.
बस ध्यान रहे, Debate में भी आरक्षण लागू करने की माँग मत कर देना.
वरना बाद में कहोगे:
"5000 साल तक Debate करने नहीं दिया, इसलिए अब आरक्षण के हिसाब से हमें 10 मिनट मिलेंगे और General Category को 2 मिनट."
"There was absolutely no need for UGC 2026 regulations. UGC 2012 regulations already existed which had enough provisions to safeguard SC/ST students.
Data shows 378 complaints amongst 4 crore students. That's rare, not rampant.
Rohith Vemula & Payal Tadvi cases, which were the basis of the PIL on the basis of which these guidelines were made, were proved to be non caste-discrimation cases."
Also stay means stay. Not withdrawal.
These regulations were already gazetted and in force. If we had not agitated, it wouldn't have been challenged and would have continued.
FYI, UGC 2023 regulations also exist. Almost similar & no one knows about it.
Offering MLA seat or offering money is not called "talks".
We all can see people are rattled by the movement.
Anyways, it's a long fight.
And all these efforts of "talks" show that we have succeeded in our 1st step - Creating Awareness
मीणा जी,
यही तो हम कब से कह रहे हैं कि तुमको आरक्षण की ज़रूरत नहीं!
धन्यवाद हमारी बात सच साबित करने के लिए!
वैसे भी अपनी आबादी से 10 गुना प्रतिनिधित्व लेकर बैठे हो, जल्दी ही जनरल से आओगे ही!
Advance में Welcome🙏😂
RHA को ले कर सरकार से कुछ बात और माँगें
सरकार अपने स्तर से हर आंदोलन को फूट, समझौता, बल-प्रयोग, समझदारी, मिसइन्फॉर्मेशन कैम्पेन या कायरता दिखा कर कर समाप्त करना चाहती है। और वही उनका कार्य भी है। RHA का नाम ले कर कुछ लोगों ने आंदोलन के लिए जनता को बुलाया और लगभग 7000 की भीड़ जंतर मंतर पर भीतर दिखी, उतने को ही बाहर होल्ड किया गया या लौटा दिया गया।
मैंने केवल दिल्ली पुलिस की बकलोली की अवज्ञा के लिए इसमें भाग लेने की बात की और फिर बहुत लोग मेरे आने पर भी आए। फिर दुबे को पाठक जी ने नेता मान कर एक ऐसे पत्र पर चर्चा के लिए आश्वासन दिया जिसमें आरक्षण शब्द ही नहीं है।
खैर, मैं ये सब तकनीक देखता और जानता आया हूँ। मुझे इस विषय पर सरकार को भीड़ दिखाने की आवश्यकता न पहले थी, न आज है, पर जब चाहूँ वह भी कर सकता हूँ। अगली बार बिना अनुमति के भी ऐसा किया जा सकता है यदि प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट चाहिए, तो वह भी दिखा देंगे। पर मेरा लक्ष्य वह है ही नहीं।
सरकार को ‘आरक्षण हटाओ आंदोलन’ से इसलिए नहीं डरना चाहिए क्योंकि एक भीड़ पूरे कनॉट प्लेस को घर कर पत्थरबाजी करते हुए संसद घेर लेगी। सरकार को इसलिए डरना चाहिए कि ऐसी कोई भीड़ ही नहीं है, न ही हम संसद को घेरने की योजना बना रहे हैं।
आंदोलन की तपन केवल जलती हुई कार की आग और अराजक भीड़ की ही नहीं होती। एक तपन ऐसी भी होती है जब जनमानस को वैचारिक रूप से इतना सक्षम बना दिया जाता है कि वह स्वयं ही अपने लिए वह निर्णय कर ले, जो वो कल तक किसी दूसरे बहकावे में आ कर कर रहा था।
हमारी माँगें:
१. आरक्षण पर श्वेत-पत्र: क्या लाभ हुआ, किन जातियों को अनुपात से अधिक लाभ लगातार मिला, कौन सी जातियाँ पूर्णतः छूट गईं। आरक्षण किस तरह से देश या समाज के उत्थान में सहायक है, उसके लिए आँकड़े क्या कहते हैं आदि आदि! इस से जुड़ी हर वह रिपोर्ट और सर्वेक्षण जो सार्वजनिक नहीं हुई।
२. EWS को हर वह आर्थिक सहायता दी जाए जो SC को मिलती है। निःशुल्क कोचिंग, निःशुल्क फॉर्म, शून्य हॉस्टल और कोर्स फीस। फिर भी लोन यदि लेना पड़े तो उसमें भी सुविधा।
३. तीनों ही आरक्षित वर्ग में ‘कोटा विदिन कोटा’ लागू हो ताकि वास्तविक दलित-पीड़ित-वंचित जातियों तक लाभ पहुँचे। अभी SC और OBC में हजार-हजार जातियाँ ऐसी हैं जिन्हें नगण्य आरक्षण मिला है। और 4-5 जातियाँ ऐसी हैं जो 70-80% आरक्षण खा रही हैं। इसका आधार पारिवारिक आय हो, न कि वैयक्तिक और दुरुपयोग की संभावना न रहे।
४. मेरिट का सम्मान हो। आरक्षित वर्ग का कटऑफ किसी भी हालत में सामान्य वर्ग के कटऑफ के (से नहीं) 10% के रेंज से बाहर न जाए। और यह भी आज की परीक्षा के अधिकतम आयु सीमा वाले बच्चों की आयु के बाद समाप्त किया जाए। न्यूनतम क्वालिफाइंग मार्क्स तो तय होना ही चाहिए।
५. सरकार यह सर्वेक्षण करे कि क्या गरीबी, भेदभाव या पिछड़ेपन से किसी की बौद्धिक क्षमता घट या बढ़ सकती है? इम्पीरिकल एविडेंस सार्वजनिक करें और उसी आधार पर आरक्षण की नीतियाँ बनें।
६. एक व्यक्ति को एक बार आरक्षण मिले। एक परिवार को एक बार आरक्षण मिले।
७. दशकीय समीक्षा हो। समाप्ति के लिए एक ‘सनसेट क्लॉज’ या रोडमैप कि कब तक रहेगा।
८. कॉलेज/यूनिवर्सिटी पुस्तकालयों में पुस्तकों के अलॉटमेंट का आरक्षण तत्काल निरस्त हो। इसका कोई लॉजिक नहीं है। यह आरक्षण से लड़ कर वहाँ पहुँचे बच्चों को सताने की व्यवस्था मात्र है। या आप पुस्तकों की मात्रा दोगुनी कीजिए और वहाँ ‘आरक्षित सेक्शन’ लिख दीजिए।
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अन्य माँगें:
९. यूजीसी नियमावली निरस्त हो या समीक्षा कर के हर जाति समूह को इसमें सम्मिलित किया जाए।
१०. SC/ST Act की तर्ज पर ‘सवर्ण उत्पीड़न (रोकथाम) कानून पास’ हो। दोनों ही कानून में केस झूठा पाए जाने पर, उस केस में होने वाला दंड आरोप लगाने वाले को झेलना पड़े। आर्थिक जुर्माना भी वसूला जाए।
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सरकार और सुधिजन देख लें। बाकी, चाहे आप दुबे, शेखावत या अन्य को मैनेज कर लें, आंदोलन चलता रहेगा।
कैमूर सदर अस्पताल के डॉक्टर सीतेश यादव जी अपने प्राइवेट क्लीनिक पे बैठ के अपनी मेहनत से कमाई कर रहे हैं
लेकिन इन भाईसाहब के मरोड़ होने लगी और डॉक साब के क्लीनिक पहुँच के हंगामा करने लगे।
Walk more. Sit less.
7,000 steps daily is associated with:
✅ 47% lower risk of all-cause mortality
✅ 25% lower risk of cardiovascular disease
✅ 47% lower risk of cardiovascular mortality
✅ 37% lower risk of cancer mortality
✅ 14% lower risk of type 2 diabetes
✅ 38% lower risk of dementia
✅ 22% lower risk of depressive symptoms
✅ 28% lower risk of falls
UGC Rollback को लेकर आज दिल्ली में सवर्ण आक्रोश महापंचायत होने वाली थी।
करणी सेना के प्रमुख राज शेखावत और नोयडा सांसद डॉ. महेश शर्मा और पुलिस प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में UGC Roll Back को लेकर चर्चा हुई।
Top 10 most attractive acts men are doing according to women in increasing order.
10. Photography
9. Swimming
8. Gardening
7. Writing
6. Painting
5. Woodworking
4. Cooking
3. Instrument
2. Learning Foreign Language
1. Reading.
Source: Date Psychology survey.