भारतीयों का रामायण त्रेतायुग का इतिहास है जब सूर्यवंश के राजा प्रभु श्री रामचंद्र जी ने भारतवर्ष में अधर्म का नाश कर धर्म की स्थापना की।
महाभारत कलयुग के पहले चरण द्वापर युग का इतिहास है जब प्रभु श्री कृष्ण ने न्याय अन्याय और राजनीतिक संघर्ष के बीच क्षात्रधर्म का मार्गदर्शन किया
The Vedas are the ancient revealed knowledge of the universe, guiding humans in spiritual, ethical, and ritual life, forming the foundation of Sanatani Hindu civilization☄️
Concept of Deity doesn’t always mean literally extraterrestrial; it can simply mean something completely unfamiliar or outside your normal worldview.
For early humans outside India, also the flying machines (aircrafts) were beyond imagination.
#HareKrishna
भगवान शिव और इस पृथ्वी के पहले राजा दक्ष के वंश मालव क्षत्रिय नागवंशी आज राजपुत समाज में चौहान, परमार, प्रतिहार, सोलंकी, तंवर, कटोच हैं, आपका मूल राजा दक्ष हैं और माता सती की संतान चारण समाज आपका भांजा स्वरूप है।
आप सबकी मूल कुलदेवी हमारी मां हिंगलाज हैं।
#शुभ_महाशिवशक्तिरात्र
लगभग 6 करोड़ से भी अधिक विस्थापित राजपूत कई वर्षों से संगठित होकर अपने प्राचीन गौरव को प्राप्त करने का प्रयास आज भी कर रहे हैं, जिन्हें अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा ने सम्मानपूर्वक क्षत्रिय राजपूत समाज में विलय करने एवं रोटी बेटी संबंध स्थापित करने की स्वीकृति प्रदान की थी।
सभी क्षत्रिय बंधुओं से अनुरोध है कि इस निर्णय का अपने-अपने क्षेत्र में प्रचार-प्रसार करें, ताकि क्षत्रिय समाज का कल्याण हो सके।
अखिल भारतीय राजपूत हितकारिणी महासभा का विलय अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा में कर लिया गया था जो क्षत्रिय एकता और सामाजिक एकीकरण के प्रयास का प्रमाण है।
इसकी बड़ी घोषणा 13 नवंबर 1988 को हुई, और 23 नवंबर 1988 को पांचौंसिद्ध प्रतापगढ़ में विराट क्षत्रिय सम्मेलन में सभी क्षत्रिय बंधुओं से मेल-भाव, खान-पान और सामाजिक संबंध शुरू करने की अपील की गई थी।
विस्थापित राजपूतों को मुख्य क्षत्रिय/राजपूत समाज में शामिल करने और उनके प्राचीन गौरव को बहाल करने से संबंधित यह घोषणा-पत्र जो जौनपुर (उत्तर प्रदेश) में सिंहारामक जौनपुर के छठे महा-अधिवेशन में पारित हुआ था जिसका संकल्प आज भी बृहद रूप से प्रचार प्रसार की कमी के कारणवश अधूरा सा है।
भारतीय वैदिक इतिहास के अनुसार, राजा अनु चंद्रवंश के महान सम्राट ययाति के पुत्र थे जिनके वंशज सुमेरियों, अक्कादियों, अश्शूरियों और बेबीलोनियों के देवताओं अनुनाकी के रूप में प्रसिद्ध हैं।
राजा नहुष के वंश में जन्मे अयाति के पुत्र अनु (#Anunaki)का जन्म मेसोपोटामिया की पौराणिक कथाओं के अनुसार, क्षितिज की शक्तियों के प्रतीक अंशार और किशर से हुआ था।
सुमेरियन परंपरा के अनुसार, अनु ब्रह्मांडीय देवताओं की पहली पीढ़ी में से एक थे।
वे 'देवताओं के पिता' माने जाते हैं।
अनु के वंशज समय के साथ और उत्तर की ओर बढ़ते चले गए।
इन्हीं के नाम पर 'अनार्य' या कुछ विदेशी कबीलों (जैसे म्लेच्छ/चरवाहे) की उत्पत्ति की प्राचीन कहानियां जुड़ी हैं, जिन्होंने आगे चलकर मध्य एशिया और उसके आसपास आधुनिक इजिप्ट/ मिस्र आदि स्थानों से नई संस्कृतियों की नींव रखी थी।
An application of the Science of #Aeronautics was already developed in the Vedic Era; it wasn't just an imaginary folk lore but the real gift to the Human race.
Indian deities were capable enough to enjoy the multiplanetry air travel from the earth to the heaven (The Himalayas)
In South Indian Temple Architecture, it is an essential feature, with some temples (like Chola era temples) having massive, multi storied, pyramidal vimanas.
It is commonly believed in India that the #Vimana is considered the #prototype of the Prasada (#Temple).
The traditional narrative at #Rajagrih clearly states that Uparichara Vasu & later supreme king Jarasandha used a vimana granted by Indra, which defined an applied Science of Aeronautics aswell the famous Indian deities and epithet of their #Wisdom.