@Airtel_Presence Dear Airtel, migrated from prepaid to postpaid on 08 June 2026. I am on ₹199 Infinity Postpaid plan which includes Fast Lane with 5G slicing. Using Xiaomi 14 with SA Mode and VoNR enabled. Phone is connecting only to NR_NSA and Fast Lane is not getting activated
Dear
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मैंने हाल ही में अपना नंबर Prepaid से Postpaid में migrate कराया है, लेकिन Airtel Priority/Platinum benefits अभी तक activate नहीं हुए हैं। Customer care से संपर्क करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ।
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टीम इंडिया की समस्या : गौतम गंभीर
अभिषेक शर्मा ने आज उस पिच पर 37 गेंद पर 68 रन बनाए जहां पूरी टीम 20 ओवर भी नहीं खेल सकी. ऐसा लगा अभिषेक किसी और पिच पर बैटिंग कर रहा है. जब बाकी बल्लेबाज स्ट्रगल कर रहे थे तब अभिषेक आसानी के साथ गेंद बाउंड्री पार करा रहे थे. अभिषेक 18.3 ओवर में आउट हुए यानि उस समय तक पारी में 111 गेंद फेंकी जा चुकी थी लेकिन अभिषेक को सिर्फ 37 गेंद मिली. जो बल्लेबाज सबसे अच्छा खेल रहा हो और उस पिच पर आसानी से खेल रहा हो जहां बाकी लोग जूझ रहे थे तो उसे तो ज्यादा स्ट्राइक देनी चाहिए थी, अगर बराबर ही मिली होती तो भी 55 या 56 गेंद मिलती. अभिषेक ने 183.78 के स्ट्राइक रेट से रन बनाया, इसका मतलब अगर उन्हें 55 गेंद मिली होती तो वो शतक के करीब पहुंच जाते. ज्यादा भी बना सकते थे क्योंकि लगातार स्ट्राइक न मिलने से अभिषेक का मोमेंटम टूटा तब ये स्ट्राइक रेट है.
सवाल ये है कि 111 में से सिर्फ 37 गेंद क्यों मिली अभिषेक को? जबाव है हर्षित राना. बल्कि और सही जबाव है गौतम गंभीर.
हर्षित ने 33 गेंद पर 35 रन बनाए, अपनी तरफ से जो हो सका किया और ऐसी पिच पर उनका प्रयास सराहनीय भी है. लेकिन ध्यान से देखें तो उनके 35 में तीन चौके और 1 छक्का है. यानि 18 तो 4 गेंद पर हैं, बाकी के 17 रन बनाने में उन्होंने 29 गेंद खपा दी. वो इतने कुशल बल्लेबाज नहीं हैं कि स्ट्राइक रोटेट कर सकें. वो हिट करते हैं या मिस करते हैं, सिंगल लेकर स्ट्राइक देना बल्लेबाज और प्रॉपर आलराउंडर जानते हैं, लोवर ऑर्डर के बैटर नहीं. इसी वजह से अभिषेक को स्ट्राइक उस समय नहीं मिली जब वो अपने फ्लो में थे. कोई कह सकता है पारी 20 ओवर तो चली नहीं और अभिषेक नॉट आउट आए नहीं तो गेंद कम पड़ने की बात क्यों की जाए ? इसी जगह क्रिकेट देखने की गहरी दृष्टि की जरूरत पड़ती है, फ्लो में बैटिंग करते बल्लेबाज और नॉन स्ट्राइकिंग एंड पर खड़े कुढ़ते बल्लेबाज की मनोदशा में फर्क आ जाता है. 19 वें ओवर में दूसरी तरह बैटिंग करनी पड़ती है उसमें आउट होने का संभावना ज्यादा रहती है, बीच पारी में अभिषेक कैलकुलेटड रिस्क लेते हैं, स्लाग नहीं करते, अभिषेक गैप्स में खेलते हैं और हर तरफ शाट लगाते हैं, उन्हें नॉन स्ट्राइकिंग एंड पर खड़ा करके लोवर ऑर्डर के बल्लेबाज से बैटिंग करवाना कौन सी समझदारी है ?
तुगलक के क्रिकेट वर्जन गंभीर के “हर्षित प्रयोग” का दूसरा शिकार हुए शिवम दुबे, जो गेंदें हर्षित ने खेली वो शिवम खेलते तो स्ट्राइक भी रोटेट करते और सेट होने के बाद हिटिंग भी करते, लेकिन वो आए 16वें ओवर में, जाहिर है उनकी मनोदशा भी बदल चुकी थी और वो आउट हो गए. क्रिकेट एक माइंड गेम है और एक ही खिलाड़ी अलग अलग मनोदशा में अलग अलग परफार्म करता है. सोचिए आप आलराउंडर हों और आपसे पहले एक ऐसे बल्लेबाज को भेज दिया जाए जिससे हजार गुना बेहतर बैटिंग आप करते हों तो आपका मोटिवेशन क्या रहेगा? शिवम के केस को आज इसी नजिरए से देखना होगा.
अब सवाल ये है कि ऐसा तो है नहीं कि गंभीर ये सब जानते नहीं, इटरनेशनल क्रिकेटर रहे हैं सब समझते हैं. उन्होंने हर्षित को शिवम से पहले भेजकर एक स्टेटमेंट दिया कि वो अर्शदीप की जगह हर्षित को इसलिए खेलाते हैं क्योंकि वो बैटिंग कर लेता है. अपने ईगो के आगे गंभीर को कुछ नहीं दिखता. उसी ईगो के लिए भेजे गए थे हर्षित, शिवम से पहले ,टीम हित में नहीं.
गौतम गंभीर चिड़चिड़े प्रतिक्रियावादी की तरह व्यवहार करते हैं जबकि टीम इंडिया के कोच को गरिमापूर्ण और निष्पक्ष होना चाहिए.
मुझे हर्षित से कोई दिक्कत नहीं, सच कहूं तो किसी खिलाड़ी के मैं खिलाफ नहीं रहता क्योंकि बड़ी तपस्या के बाद कोई वहां तक पहुंचता है और हर्षित ने भी बहुत मेहनत की है वहां तक पहुंचने के लिए. लेकिन टीम में चयन और बैटिंग ऑर्डर का फैसला निष्पक्ष होकर किया जाना चाहिए किसी की जिद के हिसाब से नहीं.
एक तरफ आप मजबूत बैटिंग लाइन अप पर इतराते हैं और दूसरी ओर आपको रन चाहिए लोवर ऑर्डर में आने वाले बॉलर से, बेहतर बोलर अर्शदीप को बाहर करके. ये कौन सा एग्रेशन है? टीम इंडिया बहुत मजबूत है, टीम की कमजोर कड़ी गौतम गंभीर हैं क्योंकि उनकी सोच और व्यवहार में दिक्कत है. आने वाले समय में क्रिकेट के तुगलक के और प्रयोग देखने के लिए तैयार रहिए.
#TeamIndia
#GautamGambhir
#INDvsAUS
अभ्यर्थी के भेष में पकड़े गए झामुमो के कार्यकर्ता।
एक नाकामी छिपाने के लिए और कितनी फजीहत करवाएंगे हेमंत सोरेन।
जिन्होंने JSSC-CGL की परीक्षा भी नहीं दी, वे परीक्षा की झूठी सफलता का आभार व्यक्त कर रहे हैं।