गोदाम में पड़ा गेहूं सड़ नहीं रहा था,
वह Skill India के तहत Aquaponics सीखकर Wheatgrass उगा रहा था। यही है मध्यप्रदेश की नई कालजयी योजना।
पूरी वीडियो देखें एपिसोड 33 में!
If reservation is a beacon of hope, why exclude higher judiciary from it? Only 3% of High court and Supreme court judges are Dalits, only 12% are women. When it comes to your own jobs, you want merit not quotas.
We are tired of your hypocrisy milords. Practice what you preach.
नेहा बोरा, वामपंथन चली फुटेज खाने के लिए झारखंड। उसे स्टेज तक पहुँचने में काफी परिश्रम करना पड़ा। लेकिन परिश्रम से कहाँ डरते हैं वामपंथी! धूप हो, बारिश हो, सर्दी हो, ढपली लेकर हर जगह पहुँच जाती हैं। They do the hard work. ये वामपंथी लौंडे आरामखोर हैं, लड़कियों को आगे करके काम करवाते हैं। ये गलत है।
झारखंड में इन्होंने मुँह पे इंक ले लिया, जबकि इतिहास दूसरों के मुँह पे इंक डालने का रहा है। मैं इसकी कड़ी निंदा करता हूँ, आप लोग मेरा नेचर जानते हैं।
नेहा जी को भगाया, लात तो नहीं मारा, बट दुख हुआ मेरे को। ऐसे जलील करके नहीं उतारना चाहिए था। आप जानते हैं मैं फेमिनिस्ट हूँ, बहुत बड़ा वाला।
AISA की दिल्ली से आई नेहा को छात्रों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा। छात्रों ने साफ कर दिया कि किसी राजनीतिक संगठन का उनके आंदोलन से लेना-देना नहीं है।
बेचारी वामपंथन वहाँ क्या करेगी? जो करने में उसकी स्पेशलिटी है, आपने वही मना कर दी।
झारखंड के छात्रों से मैं बोलूँगा, यार आपको अच्छी नहीं लगती वामपंथन क्या? थोड़ा बोलने देते, कुछ नारे निकाल लेती। पढ़ने-लिखने में अच्छे नहीं होते, कुछ नहीं मिलता तो डफली उठाकर नाचने लगते हैं। डफली में चार सिक्का डाल देते, क्या जाता?
छात्र साफ कह रहे हैं, हम दस तारीख को विधानसभा घेराव कर रहे हैं। किसी राजनीतिक दल या AISA से हमारा कोई लेना-देना नहीं है। हमारा आंदोलन हमारा है।
लेकिन हमारी नेत्री यूनिवर्सल हैं। जेएनयू के अपने ग्रुप में नेत्री बनीं या नहीं, पूरे ब्रह्मांड में जहाँ आंदोलन होगा, वहाँ पहुँचकर भाषण जरूर देंगी।
नेहा का भाषण सुना? चौदहवीं जेपीएससी और जेएसएससी सीजीएल में अनियमितता, घोटाला और भ्रष्टाचार हुए हैं। परीक्षा रद्द हो, री-एग्जाम हो, ये छात्रों की मांग है। बोलती हैं कि मैं छात्रों की मांग का समर्थन करती हूँ, भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी सरकार की है।
अरे, ये वामपंथन हाथ और गर्दन इतना चलाती है कि कोई नवजात शिशु उतना तो पैर भी नहीं चलाता? माइक लगा है। उसका काम ही आपकी आवाज loud and clear पहुँचाना है। गला फाड़कर चिल्लाने की क्या जरूरत है?
और भाषण में एक भी ऐसी बात नहीं जो वहाँ मौजूद छात्रों को पहले से पता न हो। छात्रों के बीच जाकर छात्रों को ही बता रही हैं कि छात्रों की मांग क्या है। कितने विलक्षण बुद्धि के हैं ये लोग।
सरकार सकारात्मक रुख ले, छात्रों की बात सुने, और जंतर मंतर पर सीधे बोल रही थी कि धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो, नरेंद्र मोदी इस्तीफा दो। यहाँ बोल रही है कि सरकार सकारात्मक रुख ले, छात्रों की बात सुने!
वो कहती हैं कि झारखंड का आंदोलन पूरे देश के छात्रों के लिए प्रेरणास्रोत है और मैं यहाँ इसलिए आई हूँ क्योंकि ये मूवमेंट…
नहीं, तू आई है केवल फुटेज खाने के लिए।
असल मुद्दा झारखंड के छात्रों का है। लेकिन हर आंदोलन में पहुँचकर अपना राजनीतिक भाषण घुसाना, नई जनरेशन के वामपंथियों की यही सबसे बड़ी समस्या है।
जंतर मंतर पर शबाना आजमी नेहा बोरा को चूमने आईं थीं। बस इतने में ही शबाना जी की ममता का स्टॉक खत्म हो गया। ये बच्चियों जो रांची में भूख हड़ताल पर बैठी हैं इनके लिए शबाना आजमी के स्टॉक में कुछ नहीं है।
पर पूरे झारखंना का प्यार इन्हें मिल रहा है।
इसके बाप ने बताया है कि इंक फेंकने वाला किस पार्टी का था! पुलिस से भी पहले इसकी जांच हो गई, कोर्ट से पहले फैसला आ गया।व्यू वही हरामखोर है जो गेहूं को धन बोलता है।
गोदी मीडिया तो आपने सुना होगा। आजकल #पालतू_मीडिया के बड़े चर्चे चल रहे हैं।
जानना चाहते हैं कि ये #PaaltuMedia क्या है ?
तहलका के बलात्कारी तरुण तेजपाल के खिलाफ जिनसे शब्द नहीं कहा जा रहा, एक शब्द नहीं लिखा जा रहा, वो भारत के सच्चे पालतू मीडिया हैं। वैसे भी भारत का दूसरा सबसे वरिष्ठ पालतू पत्रकार है तरुण तेजपाल। #DoTook