Ravi Tripathi a Singer ,Music Director ,Live show performer .Indian Idol-2 Megafinalist.Represented India at closing ceremony of Asian Games 2010 held in China
वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप सिंह कहते हैं कि गैर-जाटव दलितों को अब किसी पार्टी की ज़रूरत नहीं है, वे ऑटो-पायलट मोड पर हैं। बस उनका SC/ST कानून नहीं बदलना चाहिए। उनको अपना हथियार मिल गया है ,ऐसा हथियार, जिससे वे हर पार्टी को ठीक कर सकते हैं।
मोदी सरकार ने दलितों के एक वर्ग को रोजगार का नया अवसर दे दिया है। कुछ करने की ज़रूरत नहीं है, सुबह उठो, थाने जाओ और जिस पर मन हो, उस पर FIR करा दो।
16 लाख कुल आपको मिलना है। तुरंत आपको 8 लाख तुरंत मिल जाएगा, फिर केस की सुनवाई पर और 25 प्रतिशत, और बाकी 25 प्रतिशत फैसला आने पर।
और सबसे बड़ी बात, अगर आपका आरोप झूठा साबित हुआ तो आपको मिले हुए पैसे लौटाने भी नहीं हैं। तो इसलिए वे परवाह ही नहीं करते कि झूठा आरोप लगा रहे हैं या सही आरोप लगा रहे हैं।
पैसा तो मिलेगा ही, बस वो आखिरी वाला 25 प्रतिशत नहीं मिलेगा। बस इतना ही नुकसान है। मतलब, मुनाफे में घाटा है।
सवाल यह है कि अब देखना है BJP इसे कहाँ तक लेकर जाती है।
प्रदर्शन की तो अनुमति देंगे ही नहीं, चार लोग कमरे में बैठ कर बात भी करें, उसके लिए भी अनुमति चाहिए। अब सवर्ण लोग अपने बेडरूम में बच्चे पैदा करने की योजना बनाने से पूर्व भी अनुमति लेंगे सरकार से। तैयार रहो मित्रों!
आप बीजेपी के कट्टर समर्थक हुआ करते थे, किसी से भी भिड़ जाया करते थे, फिर बीजेपी को नीला रंग चढ़ा और आपका मोहभंग हो गया, IT Cell वाले इन्हे रोज़ धमकाते थे कि अगर सरकार चली गयी तो ये होगा वो होगा, आखिरकार इन्होने अपना जवाब दे दिया, अब वो सब दांव पेंच पुराने हो गए, अब लोग खुल कर जवाब देने लगे हैं, बीजेपी का जितना नुकसान पेड वर्कर्स ने किया है उतना किसी ने नहीं किया ...
केवल बीजेपी समर्थक अपनी प्रतिक्रिया देने का कष्ट करें
अच्छा लग रहा है ये देखकर कि सवर्ण समाज भी अब अपने अधिकारों को लेकर एकजुट हो रहा है और गलत का विरोध कर रहा है।
अब आगे से कोई भी पार्टी ऐसा भेदभाव वाला कानून लाने से पहले 1000 बार सोचेगी।
लगातार आप सब के विचारों के सुनने के उपरांत, हमने एक सरलीकृत माँग पत्र बनाया है। एक बार आम सहमति बन जाए, फिर डिजिटल से धरातल की योजना बनाई जाएगी। तब तक, नीति निर्धारकों के लिए यह पत्र हम सार्वजनिक कर रहे हैं ताकि उन्हें AI से हिन्दी लिखवा कर, उसमें प्राइवेट में आरक्षण जैसी बकलोली न करनी पड़े।
@JPNadda जी, कॉपी ही करना है, तो ठीक से करो। वैसे, आपको दोबारा झुका देख कर दुख हुआ।
@ajeetbharti@RHAreforms@SawarnArmychief@nshuklain@rashtravaaniIND@ARanganathan72@AtriNeeraj
𝗥𝗲𝘀𝗲𝗿𝘃𝗮𝘁𝗶𝗼𝗻 — आरक्षण
जिस देश में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री, बड़े अधिकारी और प्रभावशाली नेता आज भी स्वयं को दलित, पिछड़ा या शोषित बताकर आरक्षण का लाभ लेते रहें, और उनके परिवार भी पीढ़ियों तक इस व्यवस्था का लाभ उठाते रहें—तो सवाल उठता है…
असली ज़रूरतमंदों का क्या होगा?
असली वंचितों का क्या होगा?
असली गरीबों का क्या होगा?
प्रतिभाओं के साथ यह अन्याय कब बंद होगा?
माइनस चालीस वाले डॉक्टर, शून्य अंक वाले शिक्षक और माइनस बीस अंक लेकर इंजीनियर बनाने वाली व्यवस्था से क्या हम सचमुच विश्वगुरु बन पाएँगे?
क्या ऐसे ही अच्छे दिन आएँगे?
🔥 बड़ा सवाल!!!
🙏 यह गीत किसी व्यक्ति या समाज के विरुद्ध नहीं, बल्कि व्यवस्था पर एक सवाल है—सोचिए, चर्चा कीजिए।
🎙️ स्वर • संगीत — रवि त्रिपाठी
✍️ गीत — सुरेश मिश्र
#आरक्षण #Reservation #सामाजिकन्याय #भारत #अच्छेदिन
@ajeetbharti@RHAreforms@SawarnArmychief@nshuklain@rashtravaaniIND@ARanganathan72@AtriNeeraj
𝗥𝗲𝘀𝗲𝗿𝘃𝗮𝘁𝗶𝗼𝗻 — आरक्षण
जिस देश में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री, बड़े अधिकारी और प्रभावशाली नेता आज भी स्वयं को दलित, पिछड़ा या शोषित बताकर आरक्षण का लाभ लेते रहें, और उनके परिवार भी पीढ़ियों तक इस व्यवस्था का लाभ उठाते रहें—तो सवाल उठता है…
असली ज़रूरतमंदों का क्या होगा?
असली वंचितों का क्या होगा?
असली गरीबों का क्या होगा?
प्रतिभाओं के साथ यह अन्याय कब बंद होगा?
माइनस चालीस वाले डॉक्टर, शून्य अंक वाले शिक्षक और माइनस बीस अंक लेकर इंजीनियर बनाने वाली व्यवस्था से क्या हम सचमुच विश्वगुरु बन पाएँगे?
क्या ऐसे ही अच्छे दिन आएँगे?
🔥 बड़ा सवाल!!!
🙏 यह गीत किसी व्यक्ति या समाज के विरुद्ध नहीं, बल्कि व्यवस्था पर एक सवाल है—सोचिए, चर्चा कीजिए।
🎙️ स्वर • संगीत — रवि त्रिपाठी
✍️ गीत — सुरेश मिश्र
#आरक्षण #Reservation #सामाजिकन्याय #भारत #अच्छेदिन
𝗥𝗲𝘀𝗲𝗿𝘃𝗮𝘁𝗶𝗼𝗻 — आरक्षण
जिस देश में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री, बड़े अधिकारी और प्रभावशाली नेता आज भी स्वयं को दलित, पिछड़ा या शोषित बताकर आरक्षण का लाभ लेते रहें, और उनके परिवार भी पीढ़ियों तक इस व्यवस्था का लाभ उठाते रहें—तो सवाल उठता है…
असली ज़रूरतमंदों का क्या होगा?
असली वंचितों का क्या होगा?
असली गरीबों का क्या होगा?
प्रतिभाओं के साथ यह अन्याय कब बंद होगा?
माइनस चालीस वाले डॉक्टर, शून्य अंक वाले शिक्षक और माइनस बीस अंक लेकर इंजीनियर बनाने वाली व्यवस्था से क्या हम सचमुच विश्वगुरु बन पाएँगे?
क्या ऐसे ही अच्छे दिन आएँगे?
🔥 बड़ा सवाल!!!
🙏 यह गीत किसी व्यक्ति या समाज के विरुद्ध नहीं, बल्कि व्यवस्था पर एक सवाल है—सोचिए, चर्चा कीजिए।
🎙️ स्वर • संगीत — रवि त्रिपाठी
✍️ गीत — सुरेश मिश्र
#आरक्षण #Reservation #सामाजिकन्याय #भारत #अच्छेदिन
A heartfelt live performance of “Naina Thag Lenge” by Ravi Tripathi. If this song touches your heart, don’t forget to Like, Share & Subscribe for more soulful music.
🎤 Singer: Ravi Tripathi
🎵 Live Performance
❤️ Thank you for your love and support.
A girl traveling with a valid 1AC ticket was allegedly forced to give up her own reserved seat
because a ticketless VIP claiming to be a "Judge" wanted it.
A guy had booked a Lower Berth for his sister because she suffers from drop foot,
a medical condition that makes climbing to an upper berth extremely difficult.
However, shortly after the train departed, a ticketless woman,
who allegedly claimed to be a Judge, entered the cabin accompanied by the Police and the TTE.
When the family explained the passenger's medical condition and refused to give up their reserved seat,
the woman allegedly threatened to have them removed from the train.
Even more shockingly,
the TTE and the Police allegedly sided with her,
forcing the medically vulnerable passenger to move to the Upper Berth despite her condition.
A complaint was also filed through RailMadad,
but according to the family, no timely assistance was provided.
the biggest question is this
Has VIP culture become more important
than the rights of passengers with valid reserved tickets and genuine medical needs ?
Do you think
a reserved ticket and a passenger's medical needs should ever be ignored because of someone's influence or position ?
What would you have done
if you were in that family's place ?