It's been heartening to see our investigation into the inner workings of the Election Commission travel so far this week. Thank you for reading, sharing, arguing with it.
Now the harder ask.
Work like this takes months, and it doesn't happen on its own. If you believe there should be someone reading the notes nobody else reads, asking the questions nobody answers, and reporting what they find, fairly and accurately, however uncomfortable, then this is the moment to say so.
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साम-दाम-दंड-भेद में इस बार हमारी मेहमान हैं @RitikaChopra__ .
रीतिका ने चुनाव आयोग पर एक खोजी रिपोर्ट लिखी है.
इस रिपोर्ट को लिखने के दौरान क्या रहे रीतिका के अनुभव, जानने के लिए इंडियन एक्सप्रेस हिंदी का यूट्यूब चैनल देखिए शनिवार सुबह 9 बजे
मैं तीन साल से वोट चोरी का पर्दाफ़ाश करता आ रहा हूँ। अब चुनाव आयुक्त खुद इसे स्वीकार कर सच्चाई उजागर कर रहे हैं।
ज्ञानेश कुमार ने देशद्रोह किया है। वो अभी इस्तीफ़ा दें और approver बन जाएं।
वोट चोरी की साज़िश में नरेंद्र मोदी और अमित शाह की पूरी जांच होगी।
Vote chori is a crime against the Indian people and a direct attack on our constitution.
The BJP, RSS and EC who organised it have committed an act of treason.
Justice will be served.
'बिहार- बंगाल का चुनाव फर्जी
था, फिर से चुनाव होना चाहिए'
RJD नेता Tejashwi Yadav ने ECI पर हमला बोला. Bihar और Bengal में हुए चुनाव को फर्जी बताते हुए उन्होंने दोबारा चुनाव कराने की मांग की. Indian Express की रिपोर्ट सामने आने के बाद विपक्ष के कई नेता ECI और CEC Gyanesh Kumar पर हमला बोल रहे हैं.
सुनिए तेजस्वी ने क्या कह -
So why should you care about this unprecedented rupture in the Election Commission?
BECAUSE being eligible to be enrolled as a voter is no longer enough. In one state, 97 people proved they belonged, the officer agreed, and the software, controlled from Delhi, never let him record it. They're still off the roll.
BECAUSE the reason you trust the voter list is that nobody controls it: thousands of officers do, one constituency each. Centralise the software, and that stops being true.
And BECAUSE the check built to catch this, three Commissioners deciding together, was tried.
But TWO of the THREE say they were kept in the dark on key processes rolled out to revise the rolls.
(9/10)
https://t.co/8g8HYlUcr4
न्यूज 24 से दबाव में इस्तीफा देने वाली ईमानदार पत्रकार गरिमा सिंह ने वोट चोरी और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर ज़बरदस्त रिपोर्टिंग करते हुए आइना दिखाया ,
गरिमा सिंह तुम भारत क़ी गरिमा हो , सलाम है आप को ऐसी पत्रकारिता के लिये ,
The Election Commission of India is under fire like never before.
The SIR has struck 13 crore names off draft rolls, putting the EC at the centre of intense public debate over its role in deciding who gets to vote — and who doesn’t.
HOWEVER, what nobody knew: through that same period, some of the sharpest questions were being asked from inside.
Out today, after months of work. Our #ExpressInvestigation 🧵
(1/10)
शानदार रिपोर्ट है आपकी। भारत का लोकतंत्र सुरक्षित नहीं है इसका एक और प्रमाण। चुनाव आयोग के भीतर क्या हो रहा है इसकी जाँच होनी चाहिए। सारे चुनावी नतीजों की समीक्षा होनी चाहिए। चुनाव जनता के वोट का नतीजा है या जी-प्रिंटर से निकला नतीजा, इसकी जाँच होनी चाहिए।
रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की कलम में ओज भी था, विद्रोह भी और संवेदनाओं की कोमलता भी, उनकी जयंती पर सादर नमन।
प्रसार भारती अभिलेखागार पर सुनिए उनकी अमर कविताओं की गूंज:
https://t.co/Tf5b2hW8MX
#Poet#RamdhariSinghDinkar
‘नारी वंदन’ और ‘स्वतंत्र पत्रकारिता’ दोनों को चुनौती देता उप्र भाजपा का शासन-प्रशासन एक ईमानदार महिला पत्रकार की जान के पीछे सिर्फ़ इसलिए पड़ गया है क्योंकि उसने मुख्यमंत्री जी से ‘सवाल’ करना चाहा था।
भाजपा पत्रकारों को मूक श्रोता बनाना चाहती है।
तानाशाही और दानाशाही को चुनौती देनेवाली साहसिक पत्रकारिता की आवाज़ अब और नहीं दबाई जा सकती है।
पत्रकारों का अगर कोई संगठन सक्रिय हो तो वो संज्ञान ले और महिला आयोग भी।
घोर निंदनीय!
बात तो ऐसे कर रहा जैसे प्रधानमंत्री ने व्हाट्स एप किया हो। अब मोदी जी पर निर्भर करता है कि वे स्वतंत्र का कितना साथ देते हैं। इसी से पता चल जाएगा कि तीन बार के प्रधानमंत्री के पास कैसे लोग हैं। प्रधानमंत्री की ये हालत हो गई है कि वो ऐसे लोगों के साथ खड़े रहें तो उससे अच्छा है ये कुर्सी छोड़ देनी चाहिए। जिस कुर्सी पर बैठ कर आप वैज्ञानिक से लेकर समाजसेवी, उद्योगपति से लेकर अपनी पार्टी के कार्यकर्ता की सोहबत पा सकते हैं अगर स्वतंत्र की सोहबत उनके लिए, गृहमंत्री के लिए, चिराग़ पासवान के लिए ज़रूरी बन जाए तो सबको अपना पद छोड़ देना चाहिए। संसद मार्ग थाने का नाम स्वतंत्र भारद्वाज थाना होना चाहिए। दिल्ली पुलिस का नाम स्वतंत्र भारद्वाज पुलिस होना चाहिए।
पॉडकास्ट सुनने के बाद सबको अपनी सुरक्षा की चिंता करनी चाहिए। इस तरह के लोग जो प्रधानमंत्री तक से संपर्क का दावा कर रहे हैं, हिंसा की बात कबूल कर रहे हैं, किसी के लिए भी ख़तरा बन सकते हैं। सबसे पहले तो प्रधानमंत्री को ही आगे आकर पूछना चाहिए कि अभी तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई है।
New Delhi: जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान वायरल हुई 15 वर्षीय लड़की ने दावा किया कि उसे धमकाया गया और PM मोदी से माफी मांगने के लिए मजबूर किया गया. अब उसने दोबारा मोदी को सीधे निशाने पर लेते हुए पीछे नहीं हटने की बात कही है.