मेरे पिता जी का देहांत 2015 में हुआ था लेकिन वरासत कराने में मुझे 6 साल लग गये थे ,
क्योंकि जो भी लेखपाल साहब आते थे वो सब ईमानदार ही आते थे , अंत में रिश्वत देने के बाद ही वरासत हो पाया था।
अयोध्या के सोहावल तहसील के लेखपाल उत्कर्ष दीप को एंटी करप्शन ने पैमाइश के नाम पर 10 हजार रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा ,
जिसके बाद लेखपाल संघ धरना प्रदर्शन कर रहा हैं कि उसे रिहा किया जाए और पूर्व में जो भी ऐसे मामले हैं उसे खत्म किया जाए,
कुल मिलाकर इनकी मांग है कि रिश्वत को वैध घोषित कर दिया जाए,
आज के समय में कोई माई का लाल पैमाईश और वरासत बिना पैसे के करा कर देख ले,
गांव के लोगों में तो ये बात बैठ गई हैं कि जमीन की नापी के लिए 10 हजार लगते ही है , लोग इसे नॉर्मल मान चुके हैं।
वरासत के लिए रिश्वत आपकी जमीन कितनी है उसके हिसाब से तय होती हैं , जो 5 हजार से शुरू होकर लाखों तक भी जा सकती हैं।
सरकार को सभी प्रदर्शन करने वालों को बाहर फेंक देना चाहिए, देश में अभी बेरोजगार युवा है।
ये लोग संघ की आड़ में गलत लोगों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं ताकि अगला नंबर इनका न हो।
आदरणीय @AmitShah जी। मेरठ SSP अविनाश पांडेय जो कि गालीबाज के साथ साथ हथछुट अधिकारी है। इनके अंदर अभी जिला संभालने की काबिलियत नहीं आ पाई है। अतः आपसे निवेदन है कि इन्हें सस्पेंड करते हुए इनको पुनः मसूरी ट्रेनिंग सेंटर भेजा जाए जिससे कि ये एक परिपक्व अधिकारी के रूप में वापसी कर सके।
@myogioffice@myogiadityanath बस्ती जिले की हर्रैया तेहसिल men कुछ फर्जी लेखपाल कनुंनगो घूम रहे हैं इनको भी पकड़ो जो भू माफिया दया शंकर यादव की मदद करने वाले लोग हैं
झूठी शिकायत, झूठी FIR, झूठी जांच, झूठी गवाही, झूठी वसीयत, झूठी विरासत और तारीख पर तारीख से परेशान होकर प्रतिवर्ष 02 लाख निर्दोष आत्महत्या कर रहे हैं
लेकिन पुलिस चार्टर, ज्यूडिशियल चार्टर, एडमिनिस्ट्रेटिव चार्टर और सिटीजन चार्टर लागू करने पर चर्चा भी नहीं हो रही है @narendramodi
जब कभी भी पुलिसिया हरकत के खिलाफ कोई पोस्ट करता हूं तो पोस्ट में आए लगभग 99% कमेंट पुलिस के खिलाफ होते हैं।
जब अन्य किसी की भी पोस्ट देखता हूं तो भी उस पोस्ट में आए 99% कमेंट पुलिस के खिलाफ होते हैं।
यानी देश की 99% जनता पुलिस कार्यवाही से खुश नहीं है।
फिर भी पुलिस वालों को शर्म नहीं आती है, सरकारों को शर्म नहीं आती है।
ऐसा क्यों?
क्यों सरकारें पुलिस रिफॉर्म नहीं करती हैं, क्या सब अंधे हैं? गूंगे हैं? बहरे हैं?
@UPGovt@myogiadityanath मेरी जमीन पर भू माफिया दया शंकर यादव राजेश यादव बृजेश यादव राम भवन यादव ने कब्जा किया उन बस्ती पुलिस कोई कार्यवाही क्यों नहीं करती क्योंकि मैने थाने तहसील पर पैसे खर्च नही किये
मेरठ के गंगानगर थाने में दरोगा जी ने नाम हटवाने के सिर्फ 20000 रुपए मांगे थे लेकिन इस आदमी को ईमानदारी का चुन्ना काटा और उसने दरोगा को पकड़वा दिया,
अब 20 साल मुकदमा चलेगा और उसमे 2 लाख खर्चा होगा तब इसको शांति रहेगी।
मूर्ख कहीं का!