वरिष्ठ पत्रकार गरिमा सिंह जी ने News 24 से इस्तीफा देने के करीब 27 दिन बाद सोशल मीडिया पर पहली बार खुलकर अपनी बात रखी।
उन्होंने कहा कि देश में ऐसा समय दूर नहीं जब सत्ता से सवाल पूछने पर उपद्रवी लोग मीडिया संस्थानों और स्टूडियो तक पहुंच जाएंगे।
उन्होंने कहा कि पिछले तीन वर्षों तक उन्होंने पूरी ईमानदारी से सत्ता से सवाल पूछे, लेकिन एक समय ऐसा आया जब उन्हें महसूस हुआ कि अब पहले जैसी स्वतंत्रता से सवाल करना संभव नहीं रह गया। इसी वजह से उन्होंने इस्तीफा देने का फैसला किया।
गरिमा सिंह ने कहा कि पत्रकारिता का मूल उद्देश्य सत्ता से सवाल पूछना और जनता की आवाज़ को सामने लाना है। उनका मानना है कि अगर पत्रकार स्वतंत्र होकर सवाल नहीं पूछ पाएंगे, तो इसका असर लोकतंत्र पर भी पड़ेगा।
: @gforgari
विशेष चेतावनी: बहरूपिये भाजपाई बहेलियों से दूर रहें !
सत्ताधारियों के साथ सिर्फ़ अंधेरे में रहने वाले भूमिगत, अनरजिस्टर्ड संगी-साथी ही नहीं हैं, बल्कि इस बहु-भुजाओं वाले _‘ऑक्टोपस गिरोह’_ के और भी कई हाथ हैं, जो चमचमाती लाइट में बैठकर और अपने ‘कुविचार-वंशियों’को आसपास बैठाकर ‘खुली साज़िश’ करते हैं, लोगों को किसी और बहाने से बुलाकर फँसाते हैं और दिनदहाड़े घेरकर शिकार करने की कोशिश करते हैं। ये ‘बहरूपिये बहेलिये’ हैं, जिनका भंडाफोड़ अब सरेआम हो गया है।
मूल रूप से ये वो ‘सुरंगजीवी गिरोह’ है जो अकेले को देखकर भीड़ बनाकर घेरकर शिकार करता है, लेकिन भीड़ को देखकर अलग-अलग होकर अंडरग्राउंड हो जाता है।
अपने आस-पास के घरों में गहराई से तलाशें! ये बिना KYC वाले लोग कहीं आपके आस-पड़ोस के किसी घर में प्रवास-वास न कर रहे हों। इनकी पहचान ये है कि ये थोड़े संदिग्ध टाइप का व्यवहार करते हैं। मन के मैले ये लोग साफ़-सुथरे, साधारण कपड़ों में रहते हैं। निकलते अकेले हैं लेकिन किसी ख़ुफ़िया जगह पर एक-दूसरे से अंजान बनकर अख़बार के पीछे मुँह छिपाकर फुसफुसाते हैं। बच्चों को अपना शिकार बनाते हैं, बड़ों पर झूठे इल्ज़ाम लगाते हैं, चरित्रहीनों को माला पहनाते हैं, अपने पुरुषवादी तंग नज़रिये के कारण नारी का अपमान करते-करवाते हैं, बहन-बेटियों और दुखी माँ तक को सरेआम धमकाते हैं, नारी की आज़ादी पर नैतिकता के नाम पर पाबंदियाँ लगाते हैं। धन-लोलुपता, बदज़ुबानी, दग़ाबाज़ी, धोखे और षड्यंत्र के साथ-साथ बेशर्मी और बेरहमी इन स्वार्थियों की सबसे बड़ी पहचान है, जिसके लिए ये इंसान क्या, भगवान तक को ठग लेते हैं।
अपने तन-मन का रखें विशेष ध्यान : ख़तरे से रहें सावधान!
#CC_to_CC
#जो_भाजपा_का_साथी_वो_रामघाती_महापापी
इतिहास में भाजपा 15 साल की बच्चीयों से सार्वजनिक माफ़ी मंगवाने वाली पार्टी के रूप में जानी जाएगी।
सही कहाँ प्रधानमंत्री जी ने की बच्चों से जोश जोश में ग़लतियाँ हो जाती है और जो ग़लत है वो ग़लत है उसका कोई भी समर्थन नहीं कर सकता। लेकिन पूरे देश के सामने नाबालिग बच्चियों से एक बड़े आतंकवादी की तर्ज़ पर माफ़ी मँगवा कर, रील डालने वाले उम्रदराज़ भाजपा समर्थक जब ख़ुद बच्चीयों को गाली दे तो क्या?
• जिसने गालियों की फैक्ट्री - IT सेल बनाई
• जो गालीबाजों को फॉलो करता है
अब वही बता रहा है कि सभ्य समाज में गालियों की जगह नहीं होती.
मने 100 चूहे खाकर बिल्ली हज को चली है.