9 नवंबर, यौम-ए-विलादत…
एक सदी के मशहूर फ्लॉसफ़र, मोर्ररिख, मुसन्निफ़, अदीब, ख़तीब, मुबल्लिग़, मुफक्कीर, मुक़र्रिर, मुअज़्ज़, इंक़लाबी और दूरंदेशी शायर अल्लामा मोहम्मद इक़बाल को खिराजे अक़ीदत…
की मुहम्मद ﷺ से वफ़ा तूने तो हम तेरे हैं
ये जहां चीज़ है क्या लौह-ओ-क़लम तेरे हैं।
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मेरी एक हफ़्ते की मेहनत है अगर आप एक रिट्वीट करेंगे तो मुझे खुशी होगी 🙏
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