पुष्प की अभिलाषा…
मुझे तोड़ लेना बनमाली
उस पथ पर देना तुम फेंक!
मातृ-भूमि पर शीश- चढ़ाने
जिस पथ पर जावें वीर अनेक!
~माखनलाल चतुर्वेदी
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@Real_Rohit98
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संत रामपाल जी महाराज ने गांव कोहला (सोनीपत) में दूसरी बार पहुंचाया तोहफा, पहले पाइप-मोटर से बाढ़ का स्थायी समाधान, अब 5 किसानों को 28 बैग यूरिया व 8 बैग डीएपी सहित कीटनाशक दवाइयां निशुल्क वितरित।
कोलकाता-विराटनगर रेलमार्गबाट कार्गो सेवा सुरु
कोलकाता-विराटनगर रेलमार्गबाट कार्गो सेवा सुरु भएको छ। यस सेवाले भारत-नेपालबीच माल ढुवानी छिटो, सहज र सस्तो हुने अपेक्षा गरिएको छ। व्यापार विस्तारसँगै आयात-निर्यातमा समेत सकारात्मक प्रभाव पर्ने विश्वास गरिएको छ। #news#sanewsnepal
मानव जीवन का परम लक्ष्य | SA News Chhattisgarh
19-07-2026: क्या वास्तव में 84 लाख प्रकार की योनियों से निजात मिलना संभव है या नहीं?
आईये हमारे धार्मिक ग्रंथो वेद, गीता आदि के अनुसार जानकारी प्राप्त करते हैं। सनातन धर्म के अनेक धार्मिक ग्रंथों में वर्णन मिलता है कि जीव अपने कर्मों के अनुसार जन्म-मरण के चक्र में भटकता रहता है। यह संसार कर्मभूमि है, जहाँ किए गए शुभ और अशुभ कर्मों का फल जीव को विभिन्न योनियों में जन्म लेकर भोगना पड़ता है। इसी कारण शास्त्रों में 84 लाख योनियों का उल्लेख मिलता है। श्रीमद्भगवद्गीता (8:16) में भगवान कहते हैं-
"आब्रह्मभुवनाल्लोकाः पुनरावर्तिनोऽर्जुन।"
अर्थात ब्रह्मलोक तक के सभी लोकों में जाने वाले जीव भी पुनः जन्म-मृत्यु के चक्र में लौट आते हैं।
श्रीमद्भगवद्गीता (4:9) में कहा गया है-
"जन्म कर्म च मे दिव्यमेवं यो वेत्ति तत्त्वतः।
त्यक्त्वा देहं पुनर्जन्म नैति मामेति सोऽर्जुन॥"
अर्थात् जो परमात्मा के वास्तविक स्वरूप और दिव्य कर्मों को तत्त्व से जान लेता है, वह शरीर त्यागने के बाद पुनर्जन्म को प्राप्त नहीं होता।
श्रीमद्भागवत महापुराण में भी जीव के कर्मानुसार विभिन्न योनियों में जन्म लेने का वर्णन मिलता है। मानव जन्म को इसलिए श्रेष्ठ कहा गया है क्योंकि इसी जीवन में आत्मकल्याण और मोक्ष प्राप्त करने का अवसर मिलता है।
कबीर साहेब भी अपनी वाणी में कहते हैं-
"मानुष जन्म दुर्लभ है, मिले न बारंबार।
तरुवर से पत्ता टूटे, बहुरि न लागे डार॥"
इस वाणी का भाव है कि मनुष्य जीवन अत्यंत दुर्लभ है। यदि इसे परमात्मा की भक्ति और आत्मज्ञान में नहीं लगाया, तो जीव पुनः जन्म-मरण के चक्र में भटक सकता है।
शास्त्रों के अनुसार केवल बाहरी आडंबर, कर्मकांड या लोकपरंपराएँ पर्याप्त नहीं हैं। श्रीमद्भगवद्गीता (4:34) में तत्वदर्शी ज्ञानी गुरु के पास जाकर सत्य ज्ञान प्राप्त करने का निर्देश दिया गया है। जब साधक शास्त्रसम्मत भक्ति, सदाचार और ईश्वर के सत्य ज्ञान के मार्ग पर चलता है, तब मोक्ष का अधिकारी बन सकता है।
अतः धार्मिक ग्रंथों का संदेश है कि मानव जीवन का परम लक्ष्य परमात्मा की प्राप्ति और मोक्ष प्राप्ति है। सत्य ज्ञान, सद्कर्म, निष्काम भक्ति और तत्वदर्शी संत के मार्गदर्शन से ही जीव 84 लाख योनियों के जन्म-मरण के चक्र से मुक्त होकर परम शांति पा सकता है।
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जयपुर में ओवरस्पीडिंग के खिलाफ ट्रैफिक पुलिस का अभियान लगातार जारी है। पिछले 15 दिनों में 22,400 वाहनों के चालान किए गए, जबकि बीते 6 माह में 19,943 ड्राइविंग लाइसेंस सस्पेंड किए गए। पुलिस ने सड़क सुरक्षा नियमों का पालन करने की अपील की है।
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गुरूर (बालोद) में टूटी छत के नीचे बेसहारा जीवन काट रही प्रमिला बाई व उनकी मानसिक रूप से कमजोर बेटी को संत रामपाल जी महाराज की 'अन्नपूर्णा मुहिम' ने 2 दिन में पक्का मकान बनाकर दिया। यह अकल्पनीय परोपकार सुरक्षित व स्वर्णिम समाज की सच्ची नींव है।
क्या हमारी गाड़ियों में जबरदस्ती E20 पेट्रोल डालना सही है?
नहीं ना तो अब आवाज़ उठाने का वक्त आ गया है! अपनी गाड़ियों को बचाइए और E20 के साथ नॉर्मल पेट्रोल के ऑप्शन के लिए पिटिशन साइन कीजिए। 👇
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यजुर्वेद अ. 40 मंत्र 8 में प्रमाण है
कबीर मनीषी यानी कबीर परमात्मा का अर्थात शरीर नाड़ी तंत्र के जोड़ जुगाड़ से बना हुआ नहीं है। इनका शरीर माता-पिता के संयोग से बना पंचतत्व का नहीं परमात्मा का नूर तत्व का बना हुआ प्रकाश युक्त तेजोमय शरीर है।
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देशभर भारी वर्षा, बाढी-पहिरोको जोखिम उच्च | SA News Nepal
देशभर मनसुनी गतिविधि सक्रिय बनेसँगै कोशी, बागमती, गण्डकी र लुम्बिनी प्रदेशमा भारी वर्षा भएको छ। सिन्धुपाल्चोकको बाह्रबिसेमा १०२ मिमि वर्षा मापन गरिएको छ। बाढी-पहिरोको जोखिम बढेकाले सतर्क रहन आग्रह गरिएको छ। #news #sanewsnepal