प्रधान, सरकारी नाकामी और CBSE स्कूलों की नई SMC
धर्मेंद्र प्रधान @dpradhanbjp जाते-जाते एक और कांड कर के जा रहा है। वैसे प्राइवेट स्कूल, जिसमें सरकार एक पैसा नहीं देती, उनमें SMC (स्कूल मैनेजमेंट कमिटी) में 75% अभिवावकों का होना अनिवार्य कर दिया गया है। यानी, स्कूल के मालिक अब यह तय नहीं करेंगे कि स्कूल कैसे चले।
ऊपर से आपको लगेगा कि यह तो अच्छी बात है, स्कूल मनमानी फीस लेते हैं, अब नकेल बँधेगी। हालाँकि ऐसा कुछ नहीं है। फीस नियंत्रित करना है तो ब्रैकेट बना दो, फ्रेमवर्क बना दो कि कितनी फैसिलिटी पर कितनी फीस मान्य है।
एसी और स्वीमिंग वाले स्कूल की फीस आपके बगल के आठ कमरों वाले स्कूल के फीस के बराबर नहीं होगी। हाँ, यूनिफॉर्म और किताब के नाम पर बाध्यता बंद होनी चाहिए। और ये कार्य वहाँ करो जहाँ सरकार पैसे देती है।
खैर, अब ये जो SMC है, उसमें 75% अभिभावक होंगे, तो स्कूल का पैसा कहाँ खर्च होगा, वही तय करेंगे। कौन से शिक्षक पढ़ाएँगे, वही तय करेंगे। किस शिक्षक की कितनी सैलरी होगी, वही तय करेंगे।
इस कमिटी में वस्तुतः स्कूल के मालिक के अलावा सब हैं। 8% स्थानीय प्रशासन के लोग, 8% शिक्षक, 8% में आंगनवाड़ी, आशा बहू एवम् अन्य स्थानीय लोग होंगे। सरकारी बना नहीं सकते, वहाँ से पैसा आता नहीं, तो प्राइवेट का दोहन करो।
और तो और, ये कमिटी ही यह तय करेगी कि स्कूल अपनी बाउंड्री बनाने से ले कर लैब बनवाने, स्मार्ट क्लास का काम या अन्य बड़े कार्य किस ठेकेदार को दे। यानी, अब अभिभावक यह बताएँगे कि स्कूल जिस ठेकेदार से कम में काम करा रहा है उसकी जगह वो अभिभावकों के बीच के किसी व्यक्ति को ठेका दें, वह भी PWD रेट पर!
सरकार इस पर यही कहेगी कि ‘ये स्कूल और स्कूल के ट्रस्टी की मनमानी रोकने के लिए है’। फिर तो सरकार को हर दुकान, हर कम्पनी में ‘उपभोक्ता की कमिटी’ बना देनी चाहिए कि पारले का बिस्कुट कितने में बिकेगा, मारुति की कार कितने में आनी चाहिए। प्राइवेट का मतलब फिर क्या होता है?
सरकार नकारी है, घटिया शिक्षा देती है इसलिए उसका लोड प्राइवेट स्कूल उठाते हैं। वो मनमानी न करें, इसलिए आप एक रेगुलेशन ले कर आते हैं। प्राइवेट स्कूल को @cbseindia29 तब रिकग्नाइज करती है जब उसके पास कुछ मूलभूत सुविधाएँ हों: लैब है, स्मार्ट क्लास है, सीसीटीवी है, ग्राउंड है, शिक्षकों की डिग्री क्या है, कितने बच्चों पर कितने शिक्षक हैं आदि।
क्या यह फ्रेमवर्क काफी नहीं है? या अब माता-पिता ही तय करेंगे कि उनके बच्चे को जिस शिक्षक ने डाँटा, अब उसे निकाला जाए? क्या माता-पिता बताएँगे कि स्मार्टबोर्ड का टेंडर फलाने की जगह ढिमका को दिया जाए क्योंकि वो इनके मित्र हैं? जब सरकार वित्तीय सहायता नहीं देती, तो वह उसके आर्थिक विषयों में इतना हस्तक्षेप क्यों करना चाहती?
तुमने गाँव के स्कूलों में पंचायत समिति का बवासीर डाल रखा है जो ग्रामीण राजनीति के कारण वहाँ भी नकारापन फैलाती दिखती है। सरकारी शिक्षक जनगणना से ले कर चुनाव ड्यूटी और सामूहिक विवाह तक में ड्यूटी दे रहे होते हैं। दाल-चावल का हिसाब रखना होता है, वह अलग।
RTE के माध्यम से, अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए आपने प्राइवेट में भी गरीब बच्चों के लिए व्यवस्था की। सरकारी में क्यों नहीं डालते? क्योंकि आप जानते हो वहाँ रद्दी शिक्षा मिलती है। प्राइवेट आपका लोड कम करता है, और आप वहाँ 75% माता-पिता के हाथों में नियंत्रण देना चाहते हैं।
अब ये जो गुलाबी बात कही जा रही है, उसका फॉलआउट ये नहीं जानते। स्कूल बंद होने लगे, तो क्या सरकार स्कूल खोलेगी? जिस माता-पिता को विद्यालय मनमानी वाला लगता है, उनके पास विकल्प है कि वो दूसरे विद्यालय में चले जाएँ। आपको एसी चाहिए बच्चों के लिए तो आपको पैसे भी देने पड़ेंगे।
पुनः कहूँगा कि यूनिफॉर्म-पुस्तक का केवल डिजाइन, नाम और सिलेबस स्कूल को देना चाहिए। बच्चों को स्वतंत्रता हो कि वो कहाँ से लें। फीस का ब्रेकेट तय करे सरकार स्कूल की सुविधाओं के आधार पर। इससे इतर यदि निजी स्वामित्व के विद्यालयों में माता-पिता को 75% नियंत्रण दिया गया तो समाजवाद तो आ जाएगा, पर समाजवादी पैरेंट्स के बच्चों को पढ़ाने के लिए विद्यालय नहीं बचेंगे।
मुस्लिम अपना मकसद कभी भूलता नही है।
एक साल पहले मैंने एक मामला उठाया था जंहा 14 साल की एक लड़की निशि को एक लड़का जिसका नाम खासी खान था जो 25 वर्ष का था ट्रैप कर लिया था।
मैं स्वंम गाज़ियाबाद गया वँहा पर उसके खिलाफ FIR करवाई और वापस आया।
उस समय इस लड़के ने "भैय्या माफ कर दो अल्लाह की कसम दोबारा गलती नही होगी"।
किसी हिन्दू लड़की की तरफ नही देखूंगा आदि बातें कही।
मैं हिन्दू हूँ भरोसा कर लिया लेकिन कल मेरी बहन @Imdead108_ybc ने मुझे फिर बताया कि ये उस लड़की को फिर से ट्रैप किया हुआ है।
आज मैंने इससे फिर बात किया है।
यकीन करो दोस्तो इस बार शिकायत का मौका नही दूंगा।।
एक पंडित जी हैं, लोकल मार्केट में पान की गुमटी लगाते हैं। इधर काफी दिन से उनकी गुमटी बंद ही दिखाई देती थी तो कल वो मार्केट में दिख गए । मै ने पूछ लिया कि अब दुकान पर दिखाई नहीं देते।
उन्होंने जवाब दिया कि उनके छोटे भाई का लड़का प्राइमरी में टीचर हो गया है । वो अब इस बात से नाराज होता है कि हम पान की दुकान पर बैठते हैं। क्या करें , बंद करना पड़ा ।
हमने पूछा कि अपनी तनख्वाह से कुछ आपको भी देते हैं क्या वो मास्टर साहब ।
वो बोले हमको काहे देगा। अपने माई बाप को देगा कि हमको देगा ।
यह एक विकट सामाजिक समस्या है। ग्रामीण क्षेत्र में लोग स्टेटस के लिए ही जिंदगी भर परेशान रहते हैं। हर चीज में सेलेक्टिव रहते हैं। उनके घर में भले ही खाने को न हो, लेकिन जगहंसाई के कारण ठेला नहीं लगाएंगे । मजदूरी नहीं करेंगे । पत्थर नहीं तोड़ेंगे , भले ही एक जून का उपवास करना पड़ जाए ।
यशपाल जी ने "परदा" में इसी ग्रामीण परिवेश में रहने वाले अंदर से खोखले समाज की सच्चाई सामने रखी है।
समाजवादी पार्टी (सपा) के एक प्रमुख राष्ट्रीय प्रवक्ता द्वारा अभी हाल ही में ब्राह्मण समाज को लेकर की गयी अभद्र, अशोभनीय एवं आपत्तिजनक टिप्पणी व बयानबाज़ी आदि को लेकर हर तरफ उपजा भारी आक्रोश व उसकी तीव्र निन्दा स्वाभाविक ही है तथा इस विवाद के फलस्वरूप पुलिस द्वारा मुक़दमा दर्ज किये जाने के बाद भी यह मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है। किन्तु संकीर्ण जातिवादी राजनीति करने वाली सपा के नेतृत्व की इस मामले को लेकर ख़ामोशी से भी मामला और अधिक गंभीर होकर काफी तूल पकड़ता जा रहा है। स्थिति भी तनावपूर्ण होती जा रही है।
वैसे भी सपा प्रवक्ता के ग़ैर-ज़िम्मेदाराना बयान से ब्राह्मण समाज के आदर-सम्मान व स्वाभिमान को जो ठेस पहुँची है तो उसको गंभीरता से लेते हुये सपा मुखिया को इसका तत्काल संज्ञान लेकर ब्राह्मण समाज से छमा याचना व पश्चाताप कर लेना चाहिये तो यह संभवतः उचित होगा।
इसके अलावा, इस ताज़ा प्रकरण से लोगों की नज़र में यह भी साबित है कि सपा का ख़ासकर दलितों, अति-पिछड़ों व मुस्लिम समाज आदि की तरह ब्राह्मण समाज-विरोधी भी इनका जातिवादी चाल व चरित्र बदला नहीं है बल्कि और ज़्यादा गहरा ही हुआ है तथा इसके साथ ही, ब्राह्मण समाज के प्रति वर्तमान सरकार के रवैयों को लेकर भी जो ज़बरदस्त नाराज़गी इस समाज में देखने को मिल रही है वह भी किसी से छिपा हुआ नहीं है,
जबकि यह सर्वविदित है कि बी.एस.पी. द्वारा सर्वसमाज की तरह ब्राह्मण समाज को भी पार्टी व सरकार में भी भरपूर आदर-सम्मान देने के साथ-साथ हर स्तर पर उन्हें उचित भागीदारी भी दी गयी है अर्थात् बी.एस.पी. में यूज़ एण्ड थ्रो नहीं है बल्कि सर्वसमाज का हित हमेशा सुरक्षित रहा है।
लोग विनोद कापड़ी को @HQ_IDS_India द्वारा 'फिल्ममेकर' के रूप में सेवाएँ देने और उसके घोषित रूप से भारतीय सेना को उसी ऑपरेशन सिंदूर के समय उपहासपूर्ण शब्दों का प्रयोग करने के बाद भी, संभवतः, पैसे देने पर आश्चर्यचकित हैं।
क्यों? मंडल सरकारी पैसे नहीं ले रहा? कापड़ी ने भी तो वही किया जो मंडल कर रहा है: वामपंथी एजेंडा चलाना और अवसर मिलने पर सरकार से जुड़ जाना! दोनों में क्या अंतर है?
नादेव लैपिड, योग सीखने वाली ईशा, देवदत्त पटनाइक, काम्या जानी समेत कितने उदाहरण हैं जिसमें यही हुआ है। यहाँ नया क्या हुआ है जो इतने उदास हो? वामपंथी की सास मरने पर PM की चिट्ठी जाती है ताकि उनकी ब्रांडिंग हो सके कि कितने समावेशी हैं मोदी जी कि वैचारिक शत्रुओं को भी चिट्ठी भेजते हैं।
इस से तो भाजपा और मोदी जी की अच्छी ब्रांडिंग हो रही है न कि वामपंथियों को भी काम देती है क्योंकि उनको काम आता है, भेदभाव नहीं है। यह बात तो अब साबित हो गई है, IT सेलिए ही कह रहे हैं, कि इनको पैसा दिया जा रहा है!
मुझे आश्चर्य IDS के हैंडल में उसे 'फिल्ममेकर' लिखने पर नहीं हुआ, मुझे आश्चर्य तब हुआ जब @BJP4India के हैंडल से उसे 'फिल्ममेकर' लिखा गया। फिर थोड़ी देर बाद मंडल की याद आई, तो वह आश्चर्य भी 'MJNKKHTSSKHKH' के स्वर्णिम वाक्य के याद आने से समाप्त हो गया।
इस से अधिक आश्चर्य मुझे तब हुआ कि IT सेलिए इस पर उदास और आहत दिखे। अरे ब्रो, वो वाला लॉजिक नहीं दोगे, "हम चाहते हैं कि उधर के लोग जो अच्छा लिखते और बोलते हैं, उनको ओब्लाइज कर के इधर लाएँ, वो हमारे एसेट बनेंगे।"
छत्रपति शिवाजी महाराज के वीर पुत्र, धर्म और स्वाभिमान के प्रतीक महाराष्ट्र केसरी छत्रपति संभाजी महाराज जी की जयंती पर उन्हें शत-शत नमन।
उनका शौर्य, त्याग और राष्ट्रभक्ति सदैव हम सभी को प्रेरित करती रहेगी।
जब मैंने कहा था कि धर्मेंद्र प्रधान को अपमानित करके (कहा तो मैंने कुछ और ही था) कैबिनेट से निकाला जाना चाहिए, तो कई लोगों को (UGC के कारण मेरे सरकार विरोध में होने से) समस्या हो गई थी।
इस नकारे मंत्री के कार्यकाल में NEET 2026 रद्द हो गई। इनसे पेपर लीक रुक नहीं रहा, DU में सवर्ण सहायक प्रोफेसरों को चिह्नित करके निकाला जा रहा है, VC वामपंथी लेख लिख रहे हैं, नई शिक्षा नीति लागू हो रही है पर पन्नों में ब्राह्मण ब्रिटिश को न्योता दे कर बुलाता दिखाया जा रहा है, NCERT में आज भी डिस्टॉर्टेड इतिहास पढ़ाया जा ही रहा है, फिर यह व्यक्ति क्या एक प्लेस होल्डर मात्र है?
हर 58 मिनट में एक छात्र आत्महत्या करता है। उसका कारण स्ट्रेस है, चिंता है, असफलता है, तंत्र द्वारा उसकी परीक्षा लेना है। निर्धन छात्र पैसे ले कर नए नगर में परीक्षा देने जाता है, प्लेटफार्म पर अख़बार बिछा कर सोता है, सड़क किनारे जल पीकर परीक्षा देता है कि एक दिन परिणाम आने पर उसकी चिन्ताएँ समाप्त हो जाएँगी, पर तंत्र उसे तड़पाता रहता है।
धर्मेंद्र प्रधान एक निकृष्ट और नकारा नेता है, उस से भी गया०बीता मंत्री। ऐसे लोगों को कोई घर का गराज संभालने ने दे, ये देश की शिक्षा घंटा सँभालेगा? @narendramodi जी, यदि UGC के 118 दिन बाद आपकी सरकार ने सवर्णों को औक़ात दिखा दी हो, और आपका ईगो शांत हो गया हो कि क्या उखाड़ लिया, गुजरात निगम और असम-बंगाल चुनाव जीत गए, तो प्लीज़ इस निकम्मे धर्मेंद्र प्रधान को विदा कीजिए।
यदि, चुनाव के आँकड़े ही आपके लिए एक मात्र मोटिवेशन हैं और देश की शिक्षा गर्त में जाते अच्छी लगती है, तो फिर कोई बात नहीं, UP चुनाव के लिए रैलियाँ कीजिए।
भारतीय जनता पार्टी के लोकप्रिय नेता श्री @himantabiswa जी को असम के मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण करने पर हृदय से बधाई एवं अनंत शुभकामनाएं।
मुझे पूर्ण विश्वास है कि आदरणीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी के मार्गदर्शन एवं मुख्यमंत्री श्री हिमंता बिस्व सरमा जी के सशक्त नेतृत्व में असम प्रगति, सांस्कृतिक समृद्धि, सुशासन एवं जनकल्याण के नए प्रतिमान स्थापित करेगा।
आपके सफल कार्यकाल की मंगलकामनाएं एवं पुनः असीम शुभकामनाएं।
#HimantaBiswaSarma #Assam #BJPAssamHattrick #OathCeremony
सेवा, समर्पण और संवेदना की सच्ची मिसाल सभी नर्सों को अंतर्राष्ट्रीय नर्स दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।
आपका अथक परिश्रम, मानवता के प्रति समर्पण और मरीजों की सेवा भावना समाज के लिए प्रेरणास्रोत है।
स्वास्थ्य सेवा में आपका योगदान अमूल्य है।
#InternationalNursesDay#NursesDay #SaluteToNurses
कार्यकर्ता मरते हैं तो उनको चुनावों में भुनाया जा सकता है। तब हिन्दुत्व की याद आती है। तब पूरे समाज को एक होने का ज्ञान दिया जाता है।
जीतते ही ‘बदला नहीं बदलाव’ के मौगेपन से आरंभ होती नीति, जातिवादी नीचपने तक उतर आती है।
परिणाम: कार्यकर्ताओं की हत्या और हिन्दुत्व के नाम पर एक होते समाज में अंबेडकर की एंट्री।
मंडल की नीली टट्टी से लिपाई करती भाजपा
पहले मंडल ने हगा कि सवर्ण और मुसलमान भाजपा को वोट नहीं करते। ट्विटर से डिलीट मारा, फेसबुक पर रहने दिया। फिर भाजपा के आधिकारिक हैंडलों से बाढ़ आई यह बताने के लिए भाजपा को दलितों ने, आदिवासियों ने बंगाल जीत कर दे दिया।
फिर हमें मालवीय, त्रिवेदी, पात्रा समेत कई सवर्ण हैंडलों से बताया गया कि 75% रहा है दलित आरक्षित सीटों का स्ट्राइक रेट। यह नहीं बताया कि इनका कुल स्ट्राइक रेट भी 70% है। यह भी नहीं बताया की SC सीट में केवल SC नहीं होते, सवर्ण भी होते हैं।
भाजपा का पूरा बल इस बात पर रहा कि बंगाल चुनाव के बाद ये लोग स्वयं को दलित पार्टी घोषित कर, ‘ब्राह्मण-बनिया’ वाला दाग मिटा लें। ये लोग स्वयं ही इसको दाग मानते हैं, मैं नहीं मान रहा। इस चक्कर में जो हरा-नारंगी चार्ट दिखाया इन लोगों ने कि क्या कहा जाए!
बंगाल चुनाव रैलियों में इनके किसी नेता ने अंबेडकर का अ नहीं बोला, क्योंकि वहाँ ये बकलोली नहीं चलती। अब जीतने के बाद इनको मतुआ, नमोशूद्रो समेत दलित आदि याद आने लगे। वह भी तब जब बंगाल ‘जय श्री राम’ के झंडे तले हिन्दू बना नाच रहा है।
मैंने जब त्रिवेदी जी को कोट किया तो मुझे ज्ञान देने लगे कि वो तो… ये तो… अजी घंटा मेरा! कॉपी-पेस्ट पोस्ट हो रहे हैं, हर नेता एक ही बात लिख रहा है। हमें यह बताने के प्रयास हो रहे हैं कि सवर्ण अप्रासंगिक हैं क्योंकि ये इकट्ठे नहीं हैं।
@BJP4India और @narendramodi को लगता है कि एक ‘वंदे मातरम्’ मारेंगे, लोग नाचने लगेंगे। कर दिया न समकक्ष जन-गण-मन के? कितने लोगों ने चर्चा की? ओवैसी के अलावा कहीं चर्चा भी सुनी कि ऐसा कुछ हुआ? क्योंकि अब सवर्णों को इसमें कोई रूचि नहीं है कि ‘मोदी जी ने मुसलमानों की कह के ले ली’।
अब आपका त्रिपुंड, चाहे आप कितने ही भाव से लगाओ, बहुत लोगों को नौटंकी लगने लगी है, सब चुनावी मैनेजमेंट का सोचा-समझा मैनिक्योर्ड प्लान लगता है। मुझे लगता है या नहीं, वो मैं नहीं बता रहा। आप रैलियों में हिन्दुओं का आह्वान करते हो, जीतते ही दलीत-पीड़ीत-शोषीत-वंचीत का गुणगान।
इसलिए, आज जब रात के 11 बजे आपको पोस्ट करना पड़ता है कि ‘सभी वर्गों का साथ मिला’ तो वह टट्टी पर मिट्टी डाल कर, पैर चिपकाए, दाँत निपोड़े खड़े होना है कि हाँ भैया, थोड़ी-सी हो गई।
लीपते रहो, मंडल को पालते रहो। वह देगा नई मस्त योजनाएँ। अभी ब्राह्मण को केवल जिहादी बताया है, मजा नहीं आ रहा। अभी बोलो लेख लिखे कि बंगाल में अंबेडकर की आवश्यकता है, बंगालियों को पता ही नहीं है कि बाबा साहेब ने उनके लिए संविधान लिखा, उन्हीं के कारण विवेकानंद पढ़ाई कर पाए, नेताजी विदेश जा पाए आदि।
केवल राजपूतों की पार्टी बनाने से काम नहीं चलेगा, सवर्णों का एक बड़ा संगठन बनाना पड़ेगा। BJP को लगता है कि सवर्णों के पास विकल्प ही क्या है।
ओमप्रकाश राजभर या ऐसे ही अन्य नेताओं के साथ गठजोड़ बनाना पड़ेगा, जो दलित राजनीति के विरोध में हों। पिछड़ी जातियों के कई अन्य संगठनों को भी साथ लिया जा सकता है।
पूरे हिंदुस्तान में कोई जाति इतनी प्रभावशाली नहीं है कि वह अकेले दम पर एक विधायक भी जिता सके। सबने कहीं न कहीं कोई न कोई समझौता किया हुआ है।
अब लड़ाई उनके बीच है जो राम और कृष्ण को मानते हैं और जो उन्हें नहीं मानते।
@b_bhushansharan
SC ST एक्ट में पहले जांच फिर कार्यवाही :सुप्रीम कोर्ट
नहीं पहले गिरफ्तारी फिर
जांचः- @narendramodi
नीट(MBBS) में आरक्षण नहीं :-
पूर्व सरकारें
नहीं नीट(MBBS) में आरक्षण ः- @narendramodi
नीट (PG) में scSt कट ऑफ
235:- पूर्व सरकारें
नहीं नीट(PG) में ScSt कट
ऑफ़ -40 :- @narendramodi
भक्तो को यही नतीजा मिला
भाजपा को वोट देने के बाद
लगता नहीं है कि एक बार में आशीर्वाद दे रहे होंगे। पिछले दो महीने में ये बहत्तर बार आशीर्वाद लेने चला गए हैं। नहीं देना चाह रहे हैं बाबा आशीर्वाद, छोड़ दो कुलद्रोही दूबे!
और @narendramodi जी, सामान्य व्यक्ति बाबाधाम में गर्भगृह के बाहर पाइप में जल अर्पण करने में भी कठिनाई का अनुभव करते हैं, ये आपके सांसद छींक आने पर भी प्रोटोकॉल के साथ कैसे घूम आते हैं?
हे मूर्ख निशिकांत दूबे! जब तकनीक का ज्ञान न हो तो वमन मत किया करो। ‘कम्यूनिटी नोट’ @X स्वयं नहीं लगाता, जैसे कि हैंडल से पोस्ट X स्वयं नहीं करता। कम्यूनिटी नोट यूजर जेनेरेटेड होते हैं, प्लेटफॉर्म जेनेरेटेड नहीं।
@narendramodi जी, क्यों बार-बार इन मूर्खों के चक्कर में सरकार और देश की भद्द पिटवाने पर तुले हुए हो? आधारभूत सूचना और समझ तो होनी चाहिए आपकी संसदीय समितियों में कि चीजें कैसे कार्य करती हैं!
और यह तो स्पष्ट रूप से दिख रहा है कि आपके नेताओं के हर दिन के दोगलेपन को कम्यूनिटी नोट से एक्सपोज किया जा रहा है, आपका उस पर नियंत्रण नहीं है, आप इरिटेट हो रहे हैं, तो ऐसे मूर्खतापूर्ण निर्णय कर रहे हैं।
ढंग के लोगों को सांसद बनाइए। चाटने वालों के चक्कर में रहेंगे अंतरराष्ट्रीय अपमान झेलना पड़ेगा।