अब सुप्रीम कोर्ट में मकान मालिक - किरायेदार विवाद या ट्रैफिक चालान जैसे केस ही जाने चाहिये.
संवैधानिक अधिकारों जैसे पेचीदा मामलों में इनका वक़्त ज़ाया न करें.
काम बहुत है इनके पास, बैडमिंटन की प्रैक्टिस भी ज़रूरी है, टूर्नामेंट तो अगले साल भी होगा यूरोप में कहीं.
मैं पहले दिन से कह रही हूं कि चुनाव आयोग Compromised है।
ये बात आज फिर से साबित हो गई। यह मामला मध्य प्रदेश सरकार से जुड़ा नहीं था, फिर भी सुनवाई में प्रदेश सरकार की ओर से वकील खड़े दिखे।
हम राज्यों के खिलाफ लड़ाई नहीं लड़ रहे हैं, बल्कि चुनाव आयोग और रिटर्निंग ऑफिसर के Compromised होने की बात कर रहे हैं। अब वो जनता के सामने expose हो चुके हैं।
: मीनाक्षी नटराजन जी
मीनाक्षी नटराजन पर अब कोई आरोप ही नहीं है।
तमिलनाडु के जिस कोर्ट के सामने वह याचिका लाई गई थी जिसके आधार पर उनका नामांकन रद्द किया गया कोर्ट ने वह याचिका ही वापस कर दी है।
सुनवाई योग्य न मानते हुए फरियादी को वापस लौटाई।
अब क्या है?
अब एक शिकायत है और जिसका ना पहले था ना अब है मीनाक्षी से कोई संबंध।
ना कोई कानूनी स्टैंड।
इस तरह की जैसे कोई कहे कि फलाना आपके ट्वीट पर आकर यह कमेंट कर गया है इसलिए आप दोषी!
सुप्रीम कोर्ट ने तो सुनवाई की ही नहीं कोई भी कोर्ट करेगा तो उसे मनाना पड़ेगा की मीनाक्षी को चुनाव अधिकारी ने बिना गुनाह के सजा दे दी।
हां यह कह सकता है सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले
की तरह की चलो कोई बात नहीं इस बार भुगत लो अगली बार देखेंगे।
यही कहा था ना बंगाल के चुनाव में लाखों वोटरों को इस बार नहीं दे पाए तो कोई बात नहीं अगली बार दे लेना।
राहुल ने कहा है इस सीट चोरी।
मगर यह सीट का डाका है। खुलेआम डाला गया है और चुनाव अधिकारी से लेकर चुनाव आयोग सुप्रीम कोर्ट राष्ट्रपति कहीं सुनवाई नहीं।
अब राहुल का जन प्रतिरोध ही काम करेगा। यह डाका बहुत महंगा पड़ेगा। डाके से लोग डर तो जाते हैं मगर नफरत भी बहुत करते हैं।
मीनाक्षी नटराजन जी के नामांकन मामले में जो रिटर्निंग ऑफिसर है, उसकी पृष्ठभूमि संघ की है। इससे पहले जब एक विधायक ने सदस्यता ली थी, तब भी उनकी भूमिका संदिग्ध थी।
• कल जब BJP के तीन राज्यसभा सांसद चुने गए तो रिटर्निंग ऑफिसर सुबह 8:30 बजे ही ऑफिस पहुंच गए थे
• लेकिन जब हम उम्मीदवारी निरस्त करने के विरोध में भोपाल चुनाव आयोग ऑफिस के सामने बैठे रहे, वहीं सोए तो कोई संज्ञान नहीं लिया गया और हमसे कहा गया कि रिटर्निंग ऑफिसर सुबह 11 बजे मिलेंगे
यानी जिस तरह से रिटर्निंग ऑफिसर ने रवैया अपनाया, वह लोकतंत्र पर काला धब्बा है
• इसी मामले पर केसी वेणुगोपाल जी के नेतृत्व में हमारा प्रतिनिधमंडल आवेदन लेकर दिल्ली स्थित केंद्रीय चुनाव आयोग के ऑफिस भी गया था। मगर हमारे उस आवेदन पर न संज्ञान लिया गया और न हमें वापस कोई निर्देश दिया गया
ये पूरा रवैया दिखाता है कि नरेंद्र मोदी ने लोकतंत्र को मार दिया है।
: प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष श्री @jitupatwari जी.
📍 दिल्ली
Newsclick पर झूठ बोलने वाले इस शख्स में इतनी भी हिम्मत नहीं की ट्रम्प की आलोचना तो दूर अमरीका का नाम भी ले सके . विदेशी साजिश पर इनकी प्रेस वार्ता याद है? यहां दिख रहा है- मगर ये कायर खामोश हैं . Shame on you Anurag
ये कहा गया कि मैंने राज्यसभा नामांकन के फॉर्म 26 में जानकारी छिपाई।
फॉर्म 26 में इन बातों का ब्यौरा मांगा जाता है👇
⦁ राजनीतिक दल की जानकारी
⦁ मतदाता सूची में उम्मीदवार का क्रमांक
⦁ उम्मीदवार का फोन नंबर, ई-मेल आदि जानकारियां
⦁ PAN और इनकम टैक्स रिटर्न की जानकारी
⦁ संपत्ति और अन्य चीजों का विवरण
लेकिन वो बिंदु जिन पर ये सारी बातें शुरू हुईं, वो हैं 👇
⦿ उम्मीदवार के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों का विवरण
⦿ उन मामलों का विवरण जिसमें उसे किसी दंडनीय अपराध के लिए दोषी ठहराया गया हो
मैंने फॉर्म 26 में यही जानकारी दी कि मुझ पर ऐसा कुछ भी लागू नहीं है... क्योंकि मुझ पर एक लीगल नोटिस है, जिसका अदालत ने संज्ञान तक नहीं लिया है।
ऐसी जानकारी देने के लिए फॉर्म 26 में कोई कॉलम नहीं था, जिसमें कहा गया हो कि आपको प्राइवेट कंप्लेंट की भी जानकारी देनी होगी।
अगर ऐसा कोई कॉलम होता, तो हम ये सूचना जरूर देते।
ये बिल्कुल साफ है- न फॉर्म में कोई कमी थी और न ही मांगी गई कोई जानकारी छिपाई गई। जो भी जानकारी मांगी गई, वो फॉर्म 26 के तहत दी गई।
: मीनाक्षी नटराजन जी
📍 दिल्ली
The Indian National Congress expresses profound grief at the loss of three Indian sailors off the coast of Oman as a consequence of the ongoing U.S. military operations in the region. Our statement :
Important: So @ECISVEEP stays ‘silent’, doesn’t respond to Cong demand to reconsider Meenakshi Natarajan nomination for Rajya Sabha from MP when all the available evidence suggests that prima facie this was hardly a case which required a nomination rejection. At the very least, one would have expected clarity from a top constitutional body. Meanwhile, all 3 BJP candidates declared unopposed. Matter will now be heard in SC only tomorrow and expect ‘tareek pe tareek’ and a prolonged hearing. Yet another nail in the coffin of an institution one looked upto as a neutral umpire. 🙏
सवाल पूछा तो पूरा चैनल बंद कर दिया!
अभिसार शर्मा सरकार से तीखे सवाल पूछते थे, इसलिए न्यूज़क्लिक पर ED, IT और दिल्ली पुलिस ने छापेमारी कर दी।
चैनल मालिक प्रबीर पुरकायस्थ 5 महीने के लिए जेल गए, अभिसार को पूछताछ में घसीटा गया।
बैंक खाते बंद हुए चैनल बंद हुए 100 लोग अचानक बेरोजगार हो गए।
अब अदालत का फैसला आया कि सारी कार्रवाइयाँ गलत और अवैध थीं।
जिन 100 परिवारों की रोजी-रोटी छीन ली गई, उनका नुकसान कौन भरेगा...
सरकार मुआवजा देगी?
After Vote Chori and Sarkar Chori - the BJP-EC jugalbandi has finished the contest before it has even begun with Seat Chori.
Look at what happened in the recent Rajya Sabha elections.
Congress candidate Meenakshi Natarajan ji submitted every document. No pending cases. The EC cancelled her nomination on a frivolous BJP objection.
Parimal Nathwani ji, the BJP-backed independent, got his own name wrong on the form and skipped multiple mandatory disclosures. The EC gave him an extension to fix everything.
Same Election Commission. Two candidates. One was disqualified without even a hearing. The other was rewarded despite not following the rules.
When the Congress sought a meeting, the EC first tried to evade us. When we finally met, they did not say one word.
Expect to see much more of this - because for the BJP, it is far easier to fix the election than to win it.
अपराध किया है। इस असंवैधानिक निर्वाचन को अदालत में चुनौती देकर निरस्त करवा के ही न्याय न्याय की प्राप्ति होगी । चुनाव आयोग की चुप्पी उनको इस अपराध का सहपाठी बनाती है। यह सीट चोरी का जीता जागता उदाहरण है। जनता इस अपराध का जवाब उचित समय में देगी। यह ७,५ cr लोगो की प्रतिज्ञा है। २/२
ऐसा दौर आ गया है कि लोग शक कर रहे हैं कि यह लेख नीतीश कुमार ने ही लिखा है? मैं इस विवाद में जाना ही नहीं चाहता कि खुद लिख रहे हैं या कोई और लिख रहा है, मैं तो चाहता हूँ कि नीतीश कुमार लिखते रहे, उनके नाम से कुछ न कुछ छपता रहे। एक्सप्रेस की टीम को बधाई।एक्सप्रेस ने छापा है तो यकीन करूंगा कि यह लेख नीतीश कुमार ने लिखा है। मेरे इस विश्वास को खुद एक्सप्रेस भी नहीं हिला सकता है। नीतीश कुमार दो साल से मीडिया के सामने नहीं आए हैं। प्रेस से बात नहीं कर रहे हैं। अच्छा लगा कि एक्सप्रेस के लिए लिख रहे हैं। उनका चिंतन पक्ष और लेखक कर्म सक्रिय बना रहे।
मीनाक्षी नटराजन के नामांकन रद्द होने के मामले में कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट जायेगी.
ज्ञानेश कुमार ने कुछ नहीं किया और कल जारी कैंडीडेट्स की अंतिम सूची में नटराजन का नाम नहीं है.
कानून की नज़र से मामला बहुत साफ़ है.
1. क्रिमिनल केस राज्य बनाम अभियुक्त होता है. स्टेट ऑफ तेलंगाना बनाम मीनाक्षी नटराजन जैसा कोई मुकदमा अस्तित्व में नहीं है.
2. एक प्राइवेट शिकायत के समन में मीनाक्षी नटराजन Respondent No. 4 हैं जिसका हिंदी अनुवाद "प्रतिवादी नं. 4" होता है लेकिन बीजेपी के आपत्ति पत्र में इन्हे "Accused No. 4 या अभियुक्त नं. 4" बताया गया जो शरारतपूर्ण है.
3. RP Act की धारा 33 A कहती है एफ़िडेविट में उन मामलों का उल्लेख करना है जिनमे कम से कम दो साल की सज़ा का प्रविधान हो और चार्जेज़ फ्रेम हो चुके हैं (यानि मजिस्ट्रेट\जज ने संज्ञान लेकर ट्रायल चलाने का फैसला लिया हो).
इतने सीधे मामले में फैसला 10 मिनट में हो सकता है, इसमे सुनवाई के नाम पर कोर्ट में हफ्तों की सेमीनार की गुंजाइश नहीं है - जैसा कि कोर्ट अक्सर करता है.
देखते हैं बैडमिंटन प्लेयर्स क्या करते हैं.
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