Hindu Nationalist_Always India 1st_Member of BJP_Sports Lover_My Ideal PM @narendramodi Ji_Humbled to be followed by @PiyushGoyalOffc
जय हिंद वंदे मातरम्🇮🇳
खान सर अगर अपना रुमाल झाड़ दें तो चार-पांच डॉक्टर, इंजीनियर और दरोगा इनके रुमाल से निकल पड़ेंगे।
ओझा सर अगर अपना गमछा निचोड़ दें तो गमछे से झड़ते पानी के साथ कई IAS-PCS बहते हुए दिखाई देंगे।
दोनों ही छात्रों का बड़ा भला चाहते हैं। एक ने अपने निकाह में बिना भेदभाव छात्रों को मीट-मुर्गा खिलाया था, और दूसरे का दावा है कि देशी ठर्रा (दारू) पिलाकर और कट्टा (देशी तमंचा) पकड़ा कर राजा बना देता है।
ऐसे महान शिक्षकों को देखते हुए एक को UGC का चेयरमैन और दूसरे को NTA का डायरेक्टर बना देना चाहिए।
Rahul Gandhi’s secret visit to Oman. He visited Caffe Farah in Muscat.
Just before Election results the Leader of Opposition visited secretly.
He called the Great Nicobar project a scam, now what was he doing in this café with China connections?
What was the secret meeting about?
He should answer to the nation. Which media has guts to run stories on his visit and question him and his party spokespersons? None.
मथुरा में बांके बिहारी मंदिर की 12 एकड़ जमीन पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने रातों-रात अवैध रूप से कब्रिस्तान के लिए मुस्लिम ट्रस्ट को दे दी थी।
माननीय न्यायालय ने कहा कि यह मामला दुनिया में अपनी तरह का अनूठा मामला है, जहां एक हिंदू मंदिर की भूमि को बिना किसी वैध कारण के अचानक दूसरे समूह को हस्तांतरित कर दिया गया था।
कल्पना कीजिए कि अगर ऐसा नेता दोबारा सत्ता में आ जाए तो क्या होगा और कितने अन्यायपूर्ण कार्य होंगे?
अब जाकर न्याय की जीत हुई है और इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया।
कोर्ट द्वारा बांके बिहारी मंदिर के भूमि को सही तरीके से वापस लौटा दिया गया है..!!
>नाम इल्हाम उर्र रहमान शम्सी
>काम पीलीभीत शिक्षा विभाग (DIOS)में चपरासी
>आरोप 5.28 करोड़ के गबन का
>सिस्टम के लूपहोल्स का फायदा उठाया
>फर्जी बेनिफिशियरीज बना बना के पैसे ट्रांसफर किए
>अपनी तीन पत्नियों में से एक को फर्जी शिक्षक बना दिया
>जब चपरासी पांच दस करोड़ का गेम कर दे रहे
>तो एक बार IAS IPS का सोचो
>बाकी शम्सी भाई पर पूरा भरोसा है जल्द वापस आकर कुछ नया और बड़ा करेंगे
बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के सरैया रेवा डी आंगनबाड़ी केंद्र में 17 बच्चे मौजूद है और 30 की हाजिरी लगी हैं।
सवाल पूछने पर ऐसा क्यों तो जवाब ऐसे ही करते है , ऊपर से आदेश है।
प्रिंसिपल साहब और प्रधान जी का भी तो कमीशन देना पड़ता है
अभिनव पांडेय कह रहा है कि गलत-सही चेक करना मीडिया का काम नहीं है।
बताओ, यह बेहूदा आदमी किस योग्यता के साथ चित्रा त्रिपाठी पर आरोप लगा रहा था कि हम जो लिखकर देते हैं, वही वह पढ़ती है। बीसी में इसे पढ़ा-लिखा पत्रकार समझता था। यह तो रोड पर माइक थामे चिल्लाने वाले छोला-छाप पत्रकार से भी बुरा निकला। कैसे इसे लैलेंटॉप में नौकरी मिल गई?
#UPSC2026 #akankshasingh
आपने मीडिया हाउस खोल रखा है और 10 गधहे पत्रकार पाल रखे हैं।
ना आपको रिसर्च की तमीज है , ना पत्रकारिता की समझ। बस न्यूज एजेंसी की TRP डाउन होते देख धीरे से कोई फेक न्यूज छोड़ देते हो और सोशल मीडिया से हजारों फॉलोवर बटोर लेते हो।
झूठ को सच और सच को झूठ बनाकर ऐसे परोसते हो जैसे देश की सबसे बड़ी खोज कर ली हो।
दस्तावेज देखने की फुर्सत नहीं, फैक्ट चेक का नाम नहीं बस हेडलाइन चिल्लाओ , वायरल बनाओ और वाहवाही लूटो।
फिर शाम होते ही स्टूडियो में चार मूर्खों को कुर्सी पर बैठाकर मुर्गा लड़ाने का तमाशा शुरू।
कोई तथ्य नहीं , कोई जानकारी नहीं बस चिल्लाओ , काटो , भिड़ाओ और TRP निचोड़ो।
पूरे दिन की 5 मिलियन रीच देखकर रात को दारू खुलती है ,
और आप लोग मुर्गे की टांग नोचते हुए एक-दूसरे को बधाई देते हो “आज तो सिस्टम हिला दिया!”
भावनाओ में बहकर कुछ महिला पत्रकारों की मईया - बहन कर दी उधर जनता गालियां दे रही होती है , लेकिन आप बेशर्मों की तरह मुर्गा चबाते हुए खी-खी करके हंस रहे होते हो।
और फिर बड़े गर्व से कहते हो
“यही है पत्रकारिता साहब!”
हाँ , अगर झूठ बेचकर TRP कमाना, स्टूडियो में मुर्गा लड़ाना और जनता को बेवकूफ बनाना ही पत्रकारिता है ,
तो मान लेते हैं आप लोग इस धंधे के सबसे बड़े उस्ताद हो।
आपने UPSC की कोचिंग खोल ली।
खुद जिंदगी में कभी UPSC की तैयारी भी नहीं की। लेकिन पम्पलेट में छपवा दिया “4 बार प्री क्वालीफाइड।” बच्चे देखकर भौचक रह गए और एडमिशन शुरू।
फिर थोड़ा दिमाग लगाया। 4–5 रेलवे ग्रुप D और SSC वाले टीचरों को पकड़कर UPSC एक्सपर्ट बना दिया। क्लास में वही नोट्स, वही पुराना माल। बाहर बोर्ड लगा दिया “टॉपर्स की फैक्ट्री।”
अब असली खेल शुरू हुआ। जिन बच्चों का कहीं से सिलेक्शन हो गया उन्हें थोड़ा पैसा दिया। कैमरे पर इंटरव्यू कराया “हाँ , मैं इसी कोचिंग में पढ़ा था।” फिर पूरे शहर में पोस्टर बैनर लगा दिए।
ऊपर से थोड़ा पैसा मीडिया के मुंह पर मार दिया। अगले दिन खबर चलने लगी “इस कोचिंग से निकले इतने IAS , IPS ”
बस फिर क्या था। बच्चे सपने लेकर आते रहे। फीस लाखों में जाती रही। और आपका कोचिंग धंधा करोड़ों में चमकने लगा।
इसे कहते हैं राजा वाली क्वालिटी।
खुद परीक्षा नहीं दी। लेकिन दूसरों की मेहनत पर साम्राज्य खड़ा कर लिया।
ऐसा कर सको तो समझो
तुम सच में इस धंधे के राजा हो।
नोट - इसका ओझा सर से कोई लेना देना नहीं है।
>पहले फेक न्यूज फैलाऊंगा
>बेमतलब के सवाल पूछूंगा
>कभी इमोशनल कभी मलंगबाजी ताकि रील बढ़िया कटे
>कस के रीच बटोरुंगा
>जब कोई फैक्ट चेक करेगा
>तो ट्वीट और विडियोज डिलीट कर दूंगा
>उसके बाद बिना माफी मांगे दोष किसी और पर मढ़ दूंगा
>बाहें समेट के कह दूंगा वेरिफाई करना मीडिया की जिम्मेदारी नहीं
>उसके बाद भी बात नहीं बनी तो
>नए नए एंगल घुसेड़ के और रीच बटोरुंगा
>लेकिन फर्जी खबर चलाने पर माफी नहीं मांगूंगा
I warned it earlier...
The reality of Insurance Companies in India.
This is one of the biggest fraud industries...
Having insurance will not guarantee your safety.
शिकायत दर्ज मत करों,खामोशी से सफर करों..
लखनऊ आ रहें एयर इंडिया फ्लाइट IX 2048 बेंगलुरु के क्रू मैंबर्स पैसेंजर अंकित सहाय से भिड़ें.लखनऊ लैंड के दौरान CISF के जवानों को फ्लाइट मैबर्स से मिली शिकायतों के बाद CISF ने यात्री और उसकी पत्नी व 3 साल के बच्चे को फ्लाईट से उतार थाने में बैठा दिया।यात्री का आरोप उसने बिजनेस क्लास की टिकट लिया और सफर इकॉनामी क्लास में करवाया गया।यही नहीं नॉनवेज खाने का ऑडर दिया वहां वेज खाना परोस दिया, बहस हुई तो एक ग्लास पानी तक नहीं मिला।इन्हीं बातों का विरोध और फीडबैक फार्म पर आपत्ति भरने का प्रयास करने पर बदतमीजी.एयरलाइंस कर्मियों की वजह से 5 घंटे बर्बाद.मतलब आप पैसेंजर्स के तौर पर अपनी शिकायत दर्ज नहीं कर सकते हो?
एक व्यक्ति का आरोप है कि Care Health Insurance ने यह कहकर क्लेम रिजेक्ट कर दिया कि आप 6–7 बार क्लेम ले चुके हैं , इसलिए अब आपका क्लेम नहीं मिलेगा।
सवाल ये है कि 👇
क्या हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी लिमिट के हिसाब से चलती है या कंपनी के मूड के हिसाब से?
क्या ज्यादा बीमार पड़ जाना अब पॉलिसी की शर्तों के खिलाफ है?
क्या प्रीमियम समय पर भरना ग्राहक की जिम्मेदारी है और क्लेम देना कंपनी की मर्जी?
अगर पॉलिसी डॉक्युमेंट में 6–7 क्लेम के बाद रिजेक्शन लिखा नहीं है, तो यह नया नियम कब और किसने बनाया?
क्या इंश्योरेंस अब सुरक्षा नहीं, सिर्फ कागजी भरोसा बनकर रह गया है?
जब जरूरत पड़े तो रिजेक्ट और जब प्रीमियम लेना हो तो तुरंत एक्सेप्ट ,
क्या यही नया बिजनेस मॉडल है?
हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों की मनमानी बहुत बढ़ गई है
लोग यह सोचकर हजारों लाखों रुपए प्रीमियम भुगतान करते हैं की जरूरत पर इंश्योरेंस कंपनियां मदद करेंगी
लेकिन इंश्योरेंस कंपनीयां इतनी लुटेरी हो गई है कोई ना कोई बहाना बनाकर लोगों का क्लेम रिजेक्ट कर रही हैं
🚨 एक बेटा अपनी मां के इलाज के लिए हर साल ₹50,000 प्रीमियम भरता रहा भरोसा था कि जरूरत पर साथ मिलेगा।
मां बीमार हुई तो वह स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस के लखनऊ ऑफिस पहुंचा।
घंटों इंतजार कराया गया।
फिर क्लेम से इनकार।
ऊपर से एजेंट का जवाब “हमसे पूछकर पॉलिसी थोड़ी ली थी।”
सवाल सीधा है कि 👇
प्रीमियम समय पर चाहिए , लेकिन क्लेम के समय बहाने क्यों?
क्या बीमा कंपनियां सिर्फ पैसा इकट्ठा करने के लिए हैं?
क्या पॉलिसी धारक का हक मांगना अपराध है?
अगर नियमों के नाम पर क्लेम रोके जाएंगे,
तो यह सुरक्षा नहीं, सीधी लूट है।
हर ग्राहक को लिखित कारण, पारदर्शिता और जवाबदेही मिलनी चाहिए।
वरना “हेल्थ इंश्योरेंस” भरोसा नहीं , सिर्फ कागज़ी वादा बनकर रह जाएगा।
> भारत में अमीर बाप के बिगड़ी औलादों के लिए एक नया न्याय सिस्टम का ट्रेंड शुरू हो चुका है ,
> पहले ये नशेबाज बिगड़ी औलादें किसी को कार से कुचलकर उसकी हत्या कर देते है ,
> जब सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हो जाता है तो गिरफ्तारी का ढोंग किया जाता है ,
> बाद में ये बोल दिया जाता है कि कार रईस बाप की बिगड़ी हुई औलाद नहीं बल्कि ड्राइवर चला रहा था ,
> फिर किसी को 25 हजार का जुर्माना लगाकर तो किसी से सिर्फ निबंध लिखवाकर उसको बेल दे दी जाती है जिससे वो किसी और को कुचल सके।
ये हैं राघव चड्ढा इस को कभी भी वोट मत देना!
क्योंकि इसकी ऐसी काले कारनामे बताने जा रहा हूं जो
आपको हैरान कर देगी
तो सुनो इनकी सच्चाई
ये ऐसा सांसद है जो नेता होकर आम आदमी की बात करता है।
बताओ, एयरपोर्ट पर पानी ₹100 का मिलता था
₹10 का करवा दिया।
₹250 की चाय ₹10 की करवा दी।
₹350 का समोसा ₹20 का करवा दिया।
कॉफ़ी ₹20 की करवा दी।
‘उड़ान यात्री कैफे’ खुलवा दिए।
संसद में मुद्दा उठाकर इसने 10 मिनट में डिलीवरी वाला झमेला बंद कराकर
लाखों नौजवानों की जान बचा ली।
कैसा सांसद है?
खाने में मिलावट की बात संसद में करता है,
जब सब आराम से ज़हर खा रहे थे।
दूध में यूरिया, सब्ज़ियों में ऑक्सीटोसिन,
पनीर में कास्टिक सोडा, मसालों में ईंट का पाउडर,
शहद में पीला रंग, मुर्गी में स्टेरॉयड,
आइसक्रीम में डिटर्जेंट पाउडर
इन सबकी बात संसद में करता है।
ये आदमी खाने में ज़हर बंद करवा देगा,
हार्ट अटैक से लोगों का मरना बंद हो जाएगा।
इस आदमी को कभी मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री मत बना देना,
ये लोगों को ठीक से म र ने भी नहीं देगा!
इस राघव चड्ढा मे ज़ीरो सि वी क सेंस है।
ये नेता होकर आम आदमी की बात करता है।
फ़र्ज़ी मुद्दों पर लड़कर संसद में टाइमपास नहीं करता।
ऐसे सनकी लोगों की संसद में…