प्रसिद्ध अभिनेता नाना पाटेकर जी के निधन का समाचार अत्यंत दुखद है।
अपने अभिनय और ���िरदारों से उन्होंने भारतीय सिनेमा पर और दर्शकों के दिलों में एक अमिट छाप छोड़ी है।
इस पीड़ा के समय में मेरी गहरी संवेदनाएं उनके शोकाकुल परिजनों, मित्रों और समर्थकों के साथ हैं।
We are not going to stop protesting till Gyanesh Kumar resigns.
This is a fight to protect the most sacred thing in this country.
There is nothing that Narendra Modi and Amit Shah can do that will stop us.
सत्य, अहिंसा और निर्भयता - यही बापू की सबसे बड़ी विरासत है।
उन्होंने सिखाया कि अन्याय के सामने कभी झुकना नहीं, सत्य और अहिंसा के साथ डटे रहना ही सच्ची ताकत है।
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की जयंती पर उन्हें सादर नमन।
पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह जी की जयंती पर उन्हें सादर नमन।
अपनी विनम्रता, ईमानदारी और दूरदर्शिता से उन्होंने देश की अर्थव्यवस्था और सामाजिक न्याय को नई दिशा दी। भारत के निर्माण में उनके ऐतिहासिक निर्णय और अमूल्य योगदान हमारा सदैव मार्गदर्शन करते रहेंगे।
The vote is the foundation of Indian democracy.
From the vote flows the power of our Constitution, the authority of our laws, and the legitimacy of our public institutions - this chain defines modern India.
Today this chain is broken, and this has never happened in India before. By destroying the vote, this government and the Election Commission have attacked the expression of every single Indian.
Everything this government has done on the strength of stolen votes is illegal. An MP elected through vote chori holds an illegitimate seat, and every law passed with that MP's support is an illegitimate law.
हर बार BJP सरकार का वही शर्मनाक पैटर्न - हादसों से पहले रोकथाम नहीं, उनके बाद बयानबाज़ी होती है, कुछ छोटे अफ़सरों पर ज़िम्मेदारी मढ़ दी जाती है, और असली गुनहगार जवाबदेही मुक्त रहते हैं।
सत्य निकेतन में छात्रों से भरी इमारत का गिरना कोई अकेली त्रासदी नहीं है। पिछले 4 महीनों में सैदुलाजाब में ऐसी त्रासदी में 6 लोगों की मौत हुई, हौज़ रानी ���ें आग ने 22 जानें ले लीं। हर बार जिंदगियां, सपने और अरमान मलबे में दबते हैं - और हर बार कार्रवाई गायब रहती है।
और जवाबदेही मांगने पर प्रधानमंत्री खुद आपको “दिमागी नक्सल, नाराज़ फूफा” जैसे अपमानजनक तमगे दे देते हैं - मकसद, सवाल पूछने वालों को शर्मिंदा करो, बदनाम करो और चुप करा दो।
12 साल में ये सरकार दुनिया भर की बातें कर के आपको गोल-गोल घुमाती रही, लेकिन मुद्दे की बात नहीं की। दिल्ली में "ट्रिपल इंजन" सरकार है, तो अब किस बात से लाचार है?
लाचारी है नीयत की - क्योंकि जहां नीयत नहीं होती, वहां जवाबदेही भी नहीं होती।
There Is No Accountability.
#TINA
सोचिए, ऐसा क्या गुनाह किया था इन बच्चों ने कि इन्हें गोली मार दी गई?
इन्होंने सरकार से सिर्फ़ तीन चीज़ें माँगी थीं - शिक्षा, रोज़गार, और जवाबदेही।
एक छात्र के पैर की हड्डी AK 47 की गोली से टूट गई। सेना में जाकर देश की सेवा कर���े का उसका सपना भी उसी के साथ चला गया। दो और छात्रों के कंधों को गोली चीरती हुई निकल गई।
ये अपराधी नहीं थे। ये ग़रीब घरों के वो बच्चे थे जो अपने परिवार के सपने लेकर पढ़ने निकले थे - किसी को अच्छी नौकरी चाहिए थी, किसी को अपने घर के हालात बदलने थे।
गोली के घाव भर जाएंगे - पर जो डर इन बच्चों के भीतर बैठ गया है, उसका इलाज किस अस्पताल में होता है?
प्रधानमंत्री जी, मुख्यमंत्री जी - इनकी टूटी हड्डी तो जुड़ जाएगी। क्या इनका टूटा हुआ सपना आप लौटा सकते हैं?
महाराष्ट्र में हजारों छात्र सड़कों पर हैं, शांतिपूर���ण तरीके से आंदोलनरत हैं - इसकी वजह सिर्फ एक परीक्षा या भर्ती नहीं, पूरे सिस्टम से टूट चुका भरोसा है।
चाहे वो केंद्र की हो या राज्य की, BJP सरकार से हर छात्र त्रस्त है। पेपर लीक, रुकी हुई भर्तियां, शिक्षा की असहनीय लागत, हॉस्टल में अमानवीय हालात, ज़हर जैसा खाना, DBT में धोखाधड़ी...
...और अब MPSC जैसी संवैधानिक संस्था पर कब्ज़ा कर उसकी विश्वसनीयता बर्बाद कर दी है।
अपने सफल भविष्य के लिए छात्रों की हर मां�� जायज़ है। सरकार उनकी आवाज़ सुनकर तुरंत कार्रवाई करे - वरना न्याय मिलने तक ये छात्रों की गूंज बढ़ती ही जाएगी।
#ChhatronKiGoonj
बिहार के उन छात्रों और युवाओं से मिला, जिन्होंने सिर्फ परीक्षा व्यवस्था में धांधली के खिलाफ आवाज़ उठाने पर भयंकर पुलिस बर्बरता झेली।
पुलिस की लाठियों, AK-47 और पिस्तौल से चली गोली ने कई छात्रों को घायल कर दिया। सेना में जाकर देश की सेवा करने की ख्वाहिश रखने वाले एक युवा का पैर AK-47 से गोली मारकर तोड़ दिया - साथ ही उनकी जिंदगी का सपना भी।
ये युवा सिर्फ निष्पक्ष अवसर, पारदर���शी परीक्षा व्यवस्था और अपने अधिकार मांग रहे थे। ऐसी मांग पर लाठियां और गोलियां चलाने की क्या जरूरत थी?
और इतनी बड़ी बर्बरता की जिम्मेदारी सिर्फ कुछ छोटे अधिकारियों पर डालकर सरकार बच नहीं सकती। यह कार्रवाई या तो ऊपर के आदेश का नतीजा है या फिर सत्ता की घोर नाकामी।
बिहार सरकार कुछ भी कर ले मैं इन युवाओं के साथ खड़ा हूं। इनकी हर संभव मदद करने को तैयार हूं।
BJP याद रखे - युवाओं की आवाज़ दबाने वाली हर सत्ता को एक दिन जनता के सामने जवाब देना पड़त��� है। वह दिन अब दूर नहीं है।
#ChhatronKiGoonj
नासिक, महाराष्ट्र में आज आदिवासी छात्र-छात्राओं के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की, जिसमें अपनी मांगों को लेकर भूख हड़ताल कर रहे छात्र भी शामिल थे।
उनकी समस्याएं और मांगें ध्यान से सुनीं।
हर छात्र को पढ़ाई के लिए एक सम्मानजनक, सुरक्षित और अनुकूल माहौल मिलना उसका हक़ है। वंचित समुदायों से आने वाले छात्रों को सिस्टम की अनदेखी नहीं, उसके सहयोग और हर संभव मदद की जरूरत है।
शिक्षा कोई विशेषाधिकार नहीं - यह भारत के हर छात्र का अधिकार है।
#ChhatronKiGoonj
Deeply concerned by the devastating flash floods in Nepal, where hundreds of people, including Indian pilgrims have gone missing.
My heartfelt condolences to the bereaved families of those who have lost their lives. My thoughts are with the families anxiously waiting for news of their loved ones.
I urge the Government of India to make every possible effort, in close coordination with the Nepalese authorities, to locate the missing Indian citizens and ensure their safe return.
I stand in solidarity with the people of Nepal and everyone affected by this tragic disaster.
साहिल की FIR दर्ज न होने देने का एक ही मतलब है -
नरेंद्र मोदी और अमित शाह के राज में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर खुलेआम पैलेट गन चलाई जा सकती है, मगर उन्हें इंसाफ नहीं मिल सकता।
जब तक FIR दर्ज नहीं होती, जब तक दोषियों पर कड़ी कार्रवाई का भरोसा नहीं मिलता - हम डटे रहेंगे।
लक्ष्य न्याय है और वो हर हाल में लेकर ही ��हेंगे।
आज साहिल लोचब के साथ, उनके साथ हुई पुलिस बर्बरता के खिलाफ FIR दर्ज कराने संसद मार्ग के DCP कार्यालय पहुँचा।
20 जुलाई को जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे साहिल पर पुलिस ने पैलेट गन से हमला किया। छर्रों से बुरी तरह घायल साहिल की एक आँख की रौशनी खतरे में है।
शांतिपूर्ण प्रदर्शन के खिलाफ ऐसी बर्बरता कोई कानूनी कार्रवाई नहीं, एक गंभीर अपराध है। इस क्रूरता के लिए न गृह मंत्री अमित शाह ने छात्रों को कोई सफाई दी, न प्रधानमंत्री ने उनसे माफ़ी मांगी।
अब जब साहिल न्याय के लिए FIR दर्ज कराना चाहता है तो वो भी नहीं करने दिया जा रहा। इस तरह संविधान और संवैधानिक अधिकारों को कुचला जा रहा है।
@AmitShah ज��, न्याय से इतना क्यों घबरा रहे हैं? ये डर दिखा रहा है कि आप अपना अपराध कबूल कर रहे हैं।
FIR होगी। न्यायिक जाँच होगी। और ऊपर से नीचे तक जो भी इस बर्बरता के दोषी हैं, उन सभी पर कार्रवाई होगी।
साहिल और उसके जैसे पीड़ित हर छात्र को न्याय दिलाकर रहेंगे।
Yet again, the inefficiency of NTA has come to light, with the agency acknowledging complaints received regarding UGC-NET 2026 for multiple papers - English, Commerce, and Sociology.
Given NTA’s proven track record of incompetence in conducting examinations efficiently and accurately — the question is not merely whether this agency can conduct examinations, but how fair and just the system is.
Students pay the price. So, the question remains the same — where is the accountability of the Ministry and NTA?
Modi ji, look at what your NTA has just done.
UGC-NET exams for Sociology, English and Commerce were held between 22 and 30 June. Nearly two months later, NTA has cancelled all three because it set faulty papers and repeated old questions.
Thousands of candidates who prepared for years, filled forms, paid the fees, travelled to distant centres, must now do it all again in September. NTA makes the mistake but the student serves the sentence.
I said this in Kota, in Dehradun, in Prayagraj, and I will keep saying it - this is no longer an education system. It is an extraction machine. It takes your money, your years, your mental health, and your confidence and returns nothing. Not even a job.
NTA still won’t answer the real question - were these papers leaked before the exam?
Just like every other arm of the Modi government, NTA never says it’s their fault. Just like every other compromised paper, I am absolutely sure there will be no accountability.
Dharmendra Pradhan’s resignation was the first step, not the last. NTA’s leadership must be held accountable too.
To every student sitting this exam again in September - you are not the problem. PM Modi built a system that cannot run an exam and then blames the students who take it. Your years are being stolen and we will not stop until PM Modi answers for it.
क्या चाहिए देश की लड़कियों को? बराबरी, सुरक्षा, अवसर और अपनी बात कहने की आज़ादी।
उन्हें मिला क्या है? असुरक्षा, भेदभाव और अपने असली अधिकारों के लिए बस इंतज़ार।
अब और नहीं। 22 अगस्त | पुणे | छात्रों की गूंज
आंदोलन से जुड़ें - अभी रजिस्टर करें।
https://t.co/i5B4pG5kk9