"उद्धरेदात्मनात्मानं नात्मानमवसादयेत्।
आत्मैव ह्यात्मनो बन्धुरात्मैव रिपुरात्मनः॥" (गीता ६.५)
अर्थ:
स्वतःच स्वतःचा उद्धार करावा. स्वतःला खचू देऊ नये. कारण मनुष्य स्वतःच स्वतःचा मित्र असतो आणि स्वतःच स्वतःचा शत्रूही असतो.
@kollumpok अच्छी कॉमेडी कर लेते हो!
खुद के साथ साथ पढ़ने वालों का भी मनोरंजन होता ���ै।
जनाब, यदि मंत्री बनना है, ��ो चुनाव जितना ही काफी नहीं बहुमत वाली पार्टी से होना भी जरुरी होता है।
सिर्फ मिडिया वोटिंग से मंत्री तय नहीं होता।
@Shikhasinghana 70 साल के शासन काल में देश का विकास ही हुआ है।
स्व. इंदिरा जी का " गरिबी हटाव " का नारा आसमान को छू गया.. तो अब राहुल जी के लिये कौन सा विकास कार्य शेष रहा है?
@SabhapatiM30191 श्रीमान, अतीत से बाहर आओ।
अयोध्या धाम के श्रीराम मंदिर से जो चढावा गायब है,
उसपर ध्यान दीजिए..
ये चढावा चोर ही मुझे सनातन विरोधी लगते हैं!
बोलो जय श्रीराम! 🚩🚩