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सदियों से जाति व्यवस्था के कारण दलितों को अस्पृश्यता, शिक्षा-रोजगार से वंचित रखा गया।
आदिवासियों को दूरदराज के क्षेत्रों में
सामाजिक-आर्थिक अलगाव का सामना करना पड़ा ।
ओबीसी को पारंपरिक रूप से निम्न सामाजिक स्थिति तथा शिक्षा-संसाधनों तक सीमित पहुंच मिली।
जब कोई “भीमटी” कहता है तो “भीम” का नाम गूंजता है , जब कोई “नीलचट्टी” कहता है तो नीला रंग याद आता है जो समता और सामाजिक न्याय का प्रतीक है।
नफ़रत, हिंसा, पितृसत्ता और जातिवाद के ख़िलाफ़ “उलगुलान” था, है और जारी रहेगा।
@priyanka2bharti जी।
Reservation Bachao Aandolan से कृपया जुड़िए ओबीसी, दलित, आदिवासी के खिलाफ रचें जा रहें इस भ्रामक कैंपेन को काउंटर किजिए।
हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कृपया आरक्षण के पक्ष को मजबूत किजिए।
यह देश की किसी की जागीर नहीं है !
देश को ओबीसी, आदिवासी और दलितों ने अपने ख़ून पसीने से सींचा है ! हम जनरल कैटेगरी को कभी भी देश से जाने के लिए नहीं कहेंगे क्योंकि उन्होंने हजारों वर्षों तक 95% आबादी पर ज़ुल्म किया !
आज़ के दौर में 90% जनरल कैटेगरी भी आरक्षण के पक्ष में है।
Reservation Bachao Aandolan 👊
To fight against Anti- reservation 👊
इस देश के दलित, आदिवासी और ओबीसी के हकों और अधिकार के लिए हम लड़ेंगे और हर उस राजनीतिक ताकत को नेस्तनाबूत कर देंगे जो आरक्षण पर आंख भी उठाकर देखेगा।
जय भीम, जय बापू, जय संविधान।
बीएसपी ने भाजपा-आरएसएस को सन 2017 में ही चेतावनी दी थी कि यदि आरक्षण से छेड़छाड़ की,तो फिर बीएसपी पूरे देश में जन-आन्दोलन करेगी।
पिछले वर्ष 21 अगस्त 2024 और 24 दिसम्बर 2024 को बीएसपी पूरे देश में एक साथ आन्दोलन कर चुकी है।
फर्क है फर्क है !
वे 3000 साल के आरक्षण में देश को गुलाम बनाए मुगलों और अंग्रेजों को आजादी के बाद 70 साल के आरक्षण में देश सशक्त और मजबूत बन गया।
महिलाएं सरकारें चला रही है।
जो भी जनरल कैटेगरी के लोग आरक्षण खत्म करना चाहते हैं हम दिल खोलकर उनका समर्थन करेंगे !
शर्त यह हैं कि जाति-व्यवस्था को खत्म कर दिजीए कोई भी व्यक्ति सरनेम(उपनाम) नहीं लगाएगा।
फिर आरक्षण भी खत्म हो जाएगा !
आरक्षण इस देश की आत्मा हैं और कोई भी राजनीतिक दल भारत की आत्मा पर हमला नहीं करेगी !
और यदि किसी ने भी यह प्रयास किया तो वह सत्ता से संन्यास ले लेंगे यह बात सबको पता है।
आरक्षण पर चर्चा किसी भी पार्टी को असहज करेगी, और अब वही करना पड़ेगा। पटरी उखाड़ कर आरक्षित हो जाना, सामाजिक न्याय नहीं, राजनैतिक गिरोहबाज़ी है। अब जबकि प्रताड़ित वर्ग इस पर लामबंद हो रहा है, तो सत्ता के चाटुकारों को समस्या होने लगी है कि ये 'मूर्खता' है।
UGC, NEET, CBSE पर बोलना भी सबको मूर्खता और षड्यंत्र ही लग रहा था, फिर एक भीड़ आई, आप पर थूका और आपको चाटना पड़ा। अंततः, हुआ वही जो हम आपको बता रहे थे।
अब आरक्षण पर भी एक संगठित, सघन और गंभीर चर्चा होगी। इसके चक्कर में चुनावों पर असर पड़ना चाहिए कि कौन इन विषयों पर चर्चा से भाग रहे हैं, कौन इसे नकार रहे हैं, और कौन एक ही श्वास में 'विकसित भारत' और निजी क्षेत्र में आरक्षण ढूँढ रहे हैं।
अब मुझे यह मैटर नहीं करता कि कौन सत्ता में है और किसको होना चाहिए, मैंने पिछले 7 महीनों में जो देखा और फिर गत शनिवार को जो हुआ, उस से में आश्वस्त हूँ कि बिखरा हुआ, बिका हुआ नैरेटिव काम नहीं आता। सत्ता में रहने या निकाले जाने की चिंता राजनैतिक दलों को होनी चाहिए, आम नागरिक को नहीं।
आरक्षण की पूर्ण समाप्ति लक्ष्य है, जो की संविधान का भी लक्ष्य है, तो हम तो वही कर रहे हैं जो संविधान निर्माताओं ने सोचा था। ठीक है, समय सीमा नहीं थी, पर OBC आरक्षण भी तो नहीं था? उस समय के वंचित-पीड़ित-शोषित यदि आज भी वंचित-पीड़ित-शोषित ही हैं, तो इस पर सर्वेक्षण होना चाहिए कि तथाकथित सामाजिक न्याय तक पहुँचने के लिए कोई और मार्ग है क्या?
मेरा उद्देश्य प्रथम चरण में चर्चा का है, सरकार से इस पर संसद में आँकड़े रखवाने का है कि किस जाति समूह कि किन जातियों में कितनों को आरक्षण मिला, उनकी आर्थिक और सामाजिक स्थिति क्या है, उन्हीं जाति समूहों में कौन ऐसे लोग हैं जो अभी तक घिसट कर जीने को विवश हैं?
सामान्य वर्ग के लोगों में कितने लोग आर्थिक रूप से विपन्न हैं, उनके लिए सरकार की क्या नीतियाँ हैं, उन्हें फॉर्म भरने से ले कर हॉस्टल और कोर्स की फीस में छूट क्यों नहीं है? यदि आरक्षण EWS से दिया है तो यह इतना घटिया रूप में क्यों है कि निर्धन सामान्य वर्ग का विद्यार्थी लोन चुकाने में ही जवानी खपा देता है?
इसके बाद, हर राजनैतिक व्यक्ति को, दल को हम चुनावों के समय पूछेंगे कि उन्हें सामान्य वर्ग वोट क्यों दे? उनका मेरिट को ले कर क्या स्टैंड है, विकसित भारत में मेरिट की कितनी जगह है और शिक्षा व्यवस्था में आरक्षण के कारण राष्ट्र को कब तक नकारात्मक दिशा में ले जाया जाता रहेगा?
यही आरम्भ है, और यदि आवश्यकता पड़ी तो हम और भी विकल्प देखेंगे। हमें इस से अब मतलब नहीं है कि कौन आ जाएगा तो क्या हो जाएगा, उसका लोड वो लें जिनकी विधायकी और सांसदी जाएगी। हमें अपने बच्चों और इस समाज की चिंता हैं। हम बस अपने हिस्से की चिंता कर रहे हैं।
हमारी सरकार से मांग हैं कि UGC Bill को लागू किया जाए !
बीजेपी और कांग्रेस समेत तमाम पार्टियों को हम ओबीसी, दलित आदिवासी हितों की रक्षा के लिए आवाज़ उठाने की मांग करते हैं !
मारे गए लोगों के लिए दुःख हैं किंतु आरक्षण हमारा अधिकार है !
हजारों वर्षों तक जिन्होंने झेला आज़ 100 साल भी नहीं पुरे हुए और चिल्लाने लगे।
काबिलियत का शोर मचाने वाले यह भूल जाते हैं कि देश में मोदी जी के ने रोज़गार की बाढ़ लाई है वहां जाए हुनर दिखाने !
क्या रोजगार नहीं है?
1990 Anti Reservation Protest:
60+ deaths
Criminal charges
Police shootings
Mass arrests
200 self immolation attempts
DEMOCRACY IS NOT THE SAME FOR EVERYONE
#ReservationHatao
कौन जात हो भाई?
“दलित हैं साब!”
नहीं मतलब किसमें आते हो?
आपकी गाली में आते हैं
गंदी नाली में आते हैं
और अलग की हुई थाली में आते हैं साब!
मुझे लगा हिंदू में आते हो!
आता हूँ न साब! पर आपके चुनाव में।
चूल्हा मिट्टी का
मिट्टी तालाब की
तालाब ठाकुर का।
भूख रोटी की
रोटी बाजरे की
बाजरा खेत का
खेत ठाकुर का।
बैल ठाकुर का
हल ठाकुर का
हल की मूठ पर हथेली अपनी
फ़सल ठाकुर की।
कुआँ ठाकुर का
पानी ठाकुर का
खेत-खलिहान ठाकुर के
गली-मुहल्ले ठाकुर के
फिर अपना क्या?
गाँव?
शहर?
देश?