कोई हृदय ऐसा वज्र और कठोर नहीं हो सकता, जो सत्य सेवा से द्रवीभूत न हो जाए।
- प्रेमचंद
प्रधानाचार्य पदोन्नति में Lecturer/H.M 94:6 अनुपात किया जाये, ताकि 54000 व्याख्याताओं को उनका न्यायोचित सेवा प्रतिफल मिल सके
#गांधीवादी_पथ_है_संख्यात्मक_अनुपात_हक_है@ashokgehlot51