आत्मिक फल आत्मिक चरित्र, आत्मा की भरपूरी, वचन लागूकरण की दृढ़ता को प्रदर्शित करते है और आत्मिक वरदान आत्मिक सेवाकाईयों के प्रभावी कार्यों को प्रगट करते है। आत्मिक फल के बिना आत्मिक वरदानों का सही इस्तेमाल नहीं हो सकता है अर्थात आत्मिक सेवाकाई में ईश्वरीय इच्छा का अनपालन न होना।
Qualification or disqualification does not matter but if we want to be used more for our God; So there is no better tool than surrendering and being present at all times to His will.
#walkWithGod
दुःख भोग के लिए क्रूस पर रक्त बलिदान के मसीह यीशु यरूशलेम के लिए चल दिए।जगत के राजा आए हैं और गदह पर सवार हैं। होशाना होशाना के नारे लग रहे है। लोग अपने कपड़े बिछा रहे हैं.. खजूर की डालियां बिछा रहे हैं स्वागत कर रहे है... धन्य है वह जो प्रभु के नाम से आता हैं
#happypalmsunday