धान की सीधी बुआई (डीएसआर) धान उत्पादन की एक आधुनिक एवं संसाधन संरक्षण तकनीक है, जिसमें पारंपरिक नर्सरी एवं रोपाई विधि के स्थान पर बीजों की सीधी बुआई खेत में की जाती है। इस पद्धति में डीएसआर सीडड्रिल, मल्टीक्राप सीडर, जीरो टिलेज, सुपर सीडर जैसे यंत्रों का उपयोग किया जाता @AgriGoI
'खेत बचाओ अभियान' के तहत "दलहन मिशन" योजना के अंतर्गत बिहार राज्य के गयाजी जिले में प्रखंड कृषि कार्यालयों में विभिन्न गांवों के किसानों के बीच राजेंद्र अरहर-2 किस्म के अरहर बीज मिनीकिट डा अरविंद कुमार, सहायक निदेशक की उपस्थिति मे वि���रण किया गया।
@AgriGoI
#khetBachaoAbhiyan
Optimum fertilizer application relies on the 4R Principle: applying the Right Source at the Right Rate, at the Right Time, and in the Right Place. The most effective techniques balance minimizing nutrient loss with maximizing crop uptake.
#KhetBachaoAbhiyan ; @AgriGoI
एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन मे रासायनिक उर्वरकों पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय जैविक खादों (FYM, कम्पोस्ट, वर्मी कम्पोस्ट) और जैव उर्वरकों (जैसे राइजोबियम, पीएसबी) का इस्तेमाल करतें हैं। 4-R सिद्धांत यानि सही मात्रा/समय/तरीका/उर्वरक का उपयोग करें। #KhetBachaoAbhiyan ; @AgriGoI
फॉस्फेट घुलनशील बैक्टीरिया(PSB) जैव उर्वरक मिट्टी में मौजूद अघुलनशील फास्फोरस को घोलकर पौधों के लिए उपयोगी बनाता है।यह जैविक अम्ल छोड़कर पौधों की जड़ों का विकास करता है और रासायनिक उर्वरकों (डीएपी) की उपयोग दक्षता बढ़ाकर उपज में वृद्धि करता है। #KhetBachaoAbhiyan ; @AgriGoI
"दलहन में आत्मनिर्भरता मिशन" के अंतर्गत एवं 'खेत बचाओ अभियान' के तहत बिहार राज्य के जमुई जिले में प्रखंड जमुई, सिकंदरा तथा इस्लामनगर कृषि कार्यालयों में व��भिन्न गांवों के किसानों के बीच राजेंद्र अरहर-2 किस्म के अरहर बीज मिनीकिट का वितरण किया गया। @AgriGoI #khetBachaoAbhiyan
मैं आप सबसे आग्रह करता हूं कि संकट से घबराना नहीं है, बल्कि डटकर मुकाबला करना है। हमें अपने किसानों, कृषि और जनता को इस चुनौती से सुरक्षित निकालना है। मुझे विश्वास है कि हम सब मिलकर यह सुनिश्चित करेंग�� कि किसानों को किसी कठिनाई का सामना न करना पड़े।
उर्वरकों का संतुलित उपयोग् के अंतर्गत फसलों को उनकी आवश्यकता, मिट्टी की स्थिति और मौसम के अनुसार सही मात्रा, सही अनुपात और सह��� समय पर पोषक तत्व प्रदान किया जाता है, जिससे फसल उत्पादन अधिकतम हो और भूमि का स्वास्थ्य भी सुरक्षित रहे। #KhetBachaoAbhiyan ; @AgriGoI
उर्वरकों का विवेकपूर्ण उपयोग करने के लिए विशिष्ट मिट्टी और फसल की आवश्यकता के अनुसार सही स्रोत, सही मात्रा, सही समय और सही विधि का उपयोग करना होता है। यह न केवल पैदावार बढ़ाता है, बल्कि मिट्टी के स्वास्थ्य और पर्यावरण की रक्षा भी करता है। #KhetBachaoAbhiyan ; @AgriGoI
"खेत बचाओ अभियान" के अंतर्गत चावल विकास निदेशालय, पटना द्वारा दिनांक 19.06.2026 को ��्राम-दरियापुर, जिला सारण, बिहार मे किसान जागरूकता/प्रशिक्षण कार्यक्रम किया | उक्त कार्यक्रम की संक्षिप्त प्रतिवेदन निम्नवत् प्रस्तुत है।#KhetBachaoAbhiyan
@AgriGoI
धान की खेती मे हरी खाद (जैसे ढेंचा, सनई) को खेत में उगाकर, फूल आने से पहले मिट्टी में दबा दिया जाता है। यह मिट्टी की उर्वरता को काफी बढ़ाती है, नाइट्रोजन का प्राकृतिक स्थिरीकरण करती है और भूमि की जलधारण क्षमता को सुधारकर फसलों की पैदावार बढ़ाती है।
#KhetBachaoAbhiyan ; @AgriGoI
मृदा परीक्षण (Soil Testing) के आधार पर संतुलित उर्वरक का उपयोग करना खेती की लागत कम करने और पैदावार बढ़ाने का सबसे वैज्ञानिक तरीका है। इससे मिट्टी की सेहत सुधरती है और मिट्टी में पोषक तत्वों का सटीक स्तर बना रहता है। #KhetBachaoAbhiyan ; @AgriGoI
'खान-पान में लाएं थोड़ा सुधार, कम तेल से सेहतमंद परिवार'
देश की आयात निर्भरता घटाने के लिए खाद्य तेल की खपत में 10% कमी लाने का संकल्प माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा देश के लोगों को दिया गया है। #KhetBachaoAbhiyan , @AgriGoI
खाद उ��नी डालो जितनी इजाज़त मृदा स्वास्थ्य कार्ड देता है खाद डालने की, पैसा बचेगा और धरती का स्वास्थ्य भी बेहतर होगा।
- श्री शिवराज सिंह चौहान माननीय केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री
#PMKISAN
#23rdInstalment