🙏🙏🙏🙏🙏
नासै रोग हरै सब पीरा।
जपत निरंतर हनुमत बीरा॥
संकट तें हनुमान छुड़ावै।
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै॥
निरंतर हनुमान जी का नाम जपने से सभी रोग नष्ट हो जाते हैं और हर तरह की पीड़ा दूर हो जाती है।
जो व्यक्ति मन, कर्म और वचन से हनुमान जी का ध्यान करता है, उसे हनुमान जी हर संकट से छुड़ा देते हैं।
सोच रही हम अगले आरक्षित श्रेणी में पैदा हो जाऊं।
सस्ती पढ़ाई
मुफ्त इलाज़
मुफ्त घर
नेताओं द्वारा तुष्टिकरण
और
4 नंबर में नौकरी मिल जाएगी।
और तो और 5000 साल से ज़्यादा बिना पाने के ज़िन्दा रहने की अत्भुद शक्ति भी मिल जाएगी।
#आरक्षण_हटाओ_आंदोलन#SayNoToReservation
#ReservationHataoAandolan
ये प्रयागराज के फूलपुर से अम्ब्रेश तिवारी है,
Hello - @ADGZonPrayagraj , आशा करते हैं कि आप इनके साथ न्याय करेंगे.
इनके घर में SC समाज के कुछ लोगों ने धावा बोला, मारा पीटा और एक्ट भी लगा दिया
आप इन दलित गुंडों पर कार्यवाही करिए
गोद में छोटे-छोटे बच्चों को लेकर स्वर्ण समाज की बहनें भी यूजीसी रोलबैक की मांग को लेकर आंदोलन में डटी हुई हैं।
यह सिर्फ एक आंदोलन नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी के भविष्य और शिक्षा के अधिकार की लड़ाई है।
मां की गोद में बच्चे हैं, लेकिन आंखों में अपने बच्चों के बेहतर भविष्य का सपना है
तू क्या किसी को चैलेंज देगा रे गवार, अनपढ़, बैल बुद्धि
एक तरफ़ खुली बहस का चैलेंज देने का नाटक करता है और दूसरी तरफ़ BLOCK करके भाग जाता है।
#भगौड़ा_रावण
आपके परिवार का हमें पता है, गर्भ में आते ही नाम के आगे सांसद विधायक लिख जाता है। बाकी OBC बस तुम्हारे यहां दरी बिछाने के लिए हैं।
जिनपे SC/ST एक्ट लगता है कभी उनके लिए चूं तक निकली है क्या। शर्म आ रही है या बेशर्मी का क्रैश कोर्स किया है।
स्कूल की छुट्टी होते ही बाहर खड़े हो जाते थे रेहान, फरदीन, शहरयार, शुभान, कामरान और फैज़ान,
आने-जाने वाली छात्राओं पर कसी जाती थी गंदी-गंदी फब्तियां और साथ में धमकी भी,
गार्ड ने रोका तो कर दिया हमला और छीनने लगे उसकी बंदूक,
हिन्दू संगठन के सदस्यों ने संभाला मोर्चा और ये रहा रिजल्ट..
जिला- पीलीभीत, UP.. Ps- पूरनपुर
#Pilibhit #LoveJihad @pilibhitpolice
हर्ष दुवे मूल रूप से उत्तर प्रदेश के कन्नौज जनपद की विधानसभा छिबरामऊ का मूल निवासी है, जो मेरे यहां से मात्र 50 किलोमीटर की दूरी है मैंने अभी उसके गांव में पता किया है उसका पूरा घर खाली है, किसी का कोई अता पता नहीं है, चार भाई और पिता जी जो बुजुर्ग हैं वह भी इस आंदोलन का हिस्सा बने थे, शायद वह सब अभी पुलिस की कस्टडी में हैं।
एक जानकारी अभी यह भी निकल कर आ रही है उनके रिश्तेदारों से कि हर्ष दुवे जब राजघाट जा रहा था उसी बीच दिल्ली पुलिस ने उसे डिटेन कर लिया, पूरी रात दिल्ली घुमाया, फिर दिल्ली पुलिस ने उसे आनंद बिहार में उत्तर प्रदेश की पुलिस की कस्टडी में दे दिया, जहां से वह लखनऊ लाया गया, प्रशासनिक लोगों की बातचीत के माध्यम से उसे ब्रजेश पाठक से मिलाया गया उसके बाद में यह कांफ्रेंस हुई।
अब सवाल यह है कि जो आंदोलन आरक्षण हटने तक चलने वाला था वह सिर्फ एक दिवसीय आंदोलन बनकर खत्म हो गया, जिस आंदोलन के लिए लोग दशकों से तैयारी कर रहे थे कि आरक्षण का एक दिन खात्मा करा कर ही पीछे हटेंगे, वह आंदोलन 24 घंटे तक न चल सका? जिस आंदोलन के लिए गांव घर गली मोहल्ले कूंचे से लोग देश के कोने कोने से आए थे उन्हें कुछ पता ही नहीं चला, वह केवल लाठीचार्ज का शिकार हो गए।
आंदोलन तो शाहीन बाग का भी महीनों तक चला था, आंदोलन तो किसानों का भी महीनों तक चला था, आंदोलन कांक्रोच जनता पार्टी का भी 15 दिनों तक चला था? और इन आंदोलनों ने रिज्लट दिए हैं तुम्हें क्या लगता है भीख और खैरात जिस पर देश की आधी जनसंख्या टिकी है वह इतनी आसानी से मलाई छोड़ देंगे? इसके लिए लंबा संघर्ष और बलिदान देना पड़ेगा कोई एक दिन में यह आंदोलन आपको आपकी मंजिल नहीं दिला देगा।
हम फिर से वापस आएंगे, हम फिर से लौटेंगे, हम फिर से लड़ेंगे, हम अपनी कमजोरियों को ठीक करेंगे, हम इस आंदोलन में हुई गलतियों पर सुधार करेंगे, हम अगली बार चौगुनी ताकत के साथ लौटेंगे, हमने कोई समझौता नहीं किया है हम हर्ष दुवे और राज शेखावत की तरह झुकने वाले नहीं है, हमारे साथी न झुकने के कारण ही अभी पुलिस की कस्टडी में हैं, हम लड़ेंगे और जीतेंगे 💪
🤣🤣🤣🤣🤣
यमन के रहने वाले 30 साल के शिया मुस्लिम याह्या, लगभग 7 साल पहले जर्मनी में शरणार्थी बन गए थे। कुछ महीनों बाद उनकी मुलाकात 73 साल की अमीर जर्मन महिला जेसिका से हुई। दोनों ने शादी कर ली।
एक पत्रकार ने उनसे पूछा कि वह इतनी उम्रदराज़ महिला से शादी करने के लिए कैसे तैयार हो गए।
याह्या ने जवाब दिया: "हमने यमन में सीखा था कि प्यार न तो उम्र देखता है और न ही रूप-रंग। मुझे जेसिका का साफ़ दिल पसंद आया; वह बहुत अच्छी हैं।"
प्यार और रोमांस से भरे 6 साल साथ बिताने के बाद जेसिका का निधन हो गया, और याह्या ने उनके लिए एक शानदार अंतिम संस्कार का आयोजन किया।
कुछ दिनों बाद, याह्या को हैम्बर्ग सिटी काउंसिल से एक पत्र मिला, जो जेसिका की वसीयत थी। उसमें लिखा था:
"मेरे प्यारे याह्या, मैं बहुत खुश हूँ कि तुम मेरी ज़िंदगी के इन आखिरी सालों में मेरे साथ रहे और मैं उन्हें कभी नहीं भूलूँगी।
"मैं तुम्हें यह भी बताना चाहती थी कि मैंने अपनी पूरी संपत्ति चैरिटी और बेघर लोगों को दान कर दी है, क्योंकि जब तुमने मुझे उस उम्र में प्यार किया, तो मैंने तुमसे ही इंसानियत सीखी।"
पांडे जी, हमको झाँट भर फर्क नहीं पड़ता तुम्हारे विरोध में चलने वाली ‘विदेशी साजिशों’ से। मेरे नाक से दूध नहीं बहता। माँग सही है, बात खत्म। देश में हर वर्ष पाँच चुनाव होते हैं, तो वक्त तो कभी सही होगा नहीं।
तुम ही लोग तो चूतिए थे न साले कि हर्ष दूबे को स्टूडियो-स्टूडियो घुमा रहे थे?
तुमने सोचा कि राम मंदिर की डकैती के बवासीर को CJP बिठा कर डायवर्ट कर देंगे। वो बवासीर बना तो दूबे को ले आए NEET पर बोलने के लिए कि वो डायवर्ट हो जाए। फिर वो दबा तो तुमने उस विषय पर उससे बुलवाना चालू किया जिसे अचानक से तुम आज ‘सेंसिटिव’ मान रहे हो।
फिर मैं आ गया आउट ऑफ सिलेबस। और मैं, दूबे या दीपके तो हूँ नहीं कि तुम प्रधान को हटा दोगे मैं नाचने लगूँगा क्योंकि मेरी माँग न तो मेरी नेतागीरी के लिए है, न ईगो सेटिस्फैक्शन के लिए।
तुमने ऐसा व्यक्ति देखा ही नहीं है, इसलिए पुरानी से ले कर नई आइटी सेल और मोमो की दुकानों की तरह हर नुक्कड़ पर फोन लिए डीप स्टेट, विदेशी साजिश टाइप करने वाले मीशो के अजय सान्यालों को समझ ही में नहीं आ रहा है कि टैकल कैसे करें।
आज भी मेरी माँ के मरने को ले कर बातें लिखी जा रही हैं। पर भाई, मैंने उसे अपने हाथों से मुखाग्नि दे कर उसकी राख को गंगाजी में बहा दिया है। तुम मुझे ‘इसकी माँ और उसकी माँ’ कह कर अपमानित नहीं कर सकते। हाँ क्रोधित कर सकते हो। और वह अच्छा नहीं होगा, इसकी मैं गारंटी दे सकता हूँ।
खैर, तुम्हें इतना समझ में नहीं आएगा क्योंकि आईटी सेल में निम्न स्तरीय बुद्धि होना एक अपेक्षित मानदंड है। तुम वैसे भी राज्य के आइटी सेल के हो। अतः, तीन वाक्यों में यह समझ लो:
पार्टी के भटकाव की आलोचना देशद्रोह नहीं है। पार्टी के नेता द्वारा समाज को एक्टिवली बाँटने का उपक्रम देशद्रोह और गद्दारी है। गांड में दम है तो उस नेता का नाम कमेंट में लिखो।
अमित शाह और नरेंद्र मोदी जानते हैं,सवर्ण को हाथ पैर बांध कर मारेंगे,
फिर किसी दिन लॉलीपॉप चाटने को दे देंगे
सवर्ण समाज अपनी पूंछ को हिलाकर बीजेपी के पीछे-पीछे आ जाएगा!
इसलिए दिल्ली पुलिस को आदेश दिया गया है कि सवर्ण समाज की बहन बेटियों के साथ बदसलूकी करो और को घसीट घसीटकर मारो