मैं कलयुग का जोगी हूं...
मैं कलयुग का जोगी हूं,..
कभी क्रोधी, कभी वैरागी, कभी भोगी हूं,
हां हां मैं कलयुग का जोगी हूं,
कभी भक्ति में ओत प्रोत, कभी भोग में तर बतर,
कभी भावना का वेग का रोगी हूं,
हां हां मैं कलयुग का जोगी हूं....
धुरंधर - द रिवेंज का वो आखिरी सीन याद है, जब मेजर इक़बाल को पता चल चुका होता है कि हमज़ा एक इंडियन एजेंट है.
मुरीदके वाले मदरसे मे दोनों आमने सामने बैठे होते हैं और इक़बाल पूछता है, हमज़ा, तुझे पता है मै हर हमले के समय अपने मुज़ाहिदों के साथ सैटेलाइट फ़ोन पर क्यों रहता हूँ?
हमज़ा बोलता है, मुज़ाहिदों कि रहनुमाई के लिए...
इस पर इक़बाल इशारे से मना करता है और एक लम्बी ख़ामोशी के बाद बोलता है, काफिरों की चीखें सुनने के लिए, राहत मिलती है, सुकून मिलता है मुझे...
हर एक चुनाव, जिसमे बीजेपी जीतती है, मै अधिकतर समय उस दिन फेसबुक और दूसरे सोसल मीडिया पर बिताता हूँ, जानते हैं क्यों??
चुनाव का रिजल्ट जानने के लिए... बिलकुल नहीं...
मै यहाँ आता हूँ उन भेड़ की खाल मे छुपे भेड़ियों की चीखें सुनने, जो दम भरते हैं हिन्दू होने का, लेकिन हैं जातिवादी कीड़े... जो दम भरते हैं देश की तरक्की के लिए कुछ भी करने का, लेकिन उनके पैरों मे लोटते हैं जो देश को बेच के खा जाएँ...
मै यहाँ आता हूँ भाजपा के प्रचंड जीत मे उन बेगैरत हिन्दुओं की चीखे सुनने... राहत मिलती है, सुकून मिलता है मुझे....🚩
@aman9950@SanjayAzadSln टिकट ब्लैक करता था तो क्या हुआ? किसी से भीख तो नहीं मांगता था ना?
टिकट ब्लैक करने में मेहनत नहीं लगता क्या? गर्मी में पिछवाड़ा से पसीने की बौछार हो जाती है टिकट बेचते बेचते!