I bought moto g54 in October 23,and within span of 2 months there is this type of mark on whole camera setup which I went to service center they asked to keep phone in service center for 7 days,which is totally not practical.please help @motorolaindia@Moto_Support@motorola
पिताजी सुबह चार बजे जगते हैं, ग्राम कीर्तन के लिए लोगों को जगा कर पूरे गाँव का एक चक्कर मार कर, मंदिर परिसर में समापन करते हैं। हर दिन। लगभग एक से डेढ़ घंटे का चक्कर। लोग कम ही होते हैं, फिर भी मनोबल ऐसा कि यदि किसी दिन अकेले भी जाना हो तो रुकते नहीं।
आज पहली बार कहीं से वीडियो पहुँचा है, मैंने एडिट कर के आप तक पहुँचा दिया।
2008 में IIT Kanpur ने भी ऐसा किया गया था जब पढ़ाई का दबाव नहीं झेलने के कारण कुछ स्टूडेंट्स ने जान दी थी। पंखे की जगह कूलर लगाए गए थे। उनकी गूगल सर्च हिस्ट्री में था कि उन्होंने महीने भर खोजा था मरने का रास्ता।
सुसाइड भी कॉपी कैट सिंड्रोम है। एक स्टूडेंट् को ऐसा करता देख दूसरे में यह प्रवृत्ति तेज़ी से बढ़ती है। संक्रामक रोग की तरह।
पंखा बदलें लेकिन सबसे पहले माहौल बदलें। जिन स्टूडेंट के अंदर उथल पुथल चल रही है,उन्हें पहचानें। इसके लिए परिजन/दोस्त का प्रयास सबसे कारगर होगा।
बाज़ार समझ लेता है,किसे क्या बेचना है,क्या ज़रूरत है,ऐसे में हम अपनों के अंदर के तनाव को नहीं समझ पाते हैं तो इसमें हमारी भी गलती है।
अच्छा महात्मा गांधी की ये बातचीत किनके साथ हुई थी और किस किताब इसका जिक्र है और इसका रेफरेंस क्या है हम जैसे कुछ अज्ञानी को भी ये पढ़ने का मौका मिलें....
शर्मसार हूँ,इस व्यक्ति को मैने महात्मा माना और विश्वास कर लिया कि यह सत्य और अहिंसा का पुजारी है!
जब से इस व्यक्ति का असल चाल और चरित्र पल्ले पड़ने लगा तो लगता है पैरों के नीचे से धरती खिसक गई!
इतना फ़रेब अपने ही सह धर्मियों से?
और इतनी ग़ुलामी लिप्त मुहब्बत बर्बर ज़ालिमों से!
आज़ादी ना लीज़ पर मिली, ना भीख में…
एक जवान था जो हंसते हुए फाँसी पर झूला था, एक बुजुर्ग था जिसने दधीचि की भाँति हड्डियाँ गला दीं।
एक नेहरू थे,एक बोस थे,एक पटेल थे,एक मौलाना थे,एक आज़ाद थे,एक अश्फ़ाक थे। ये एक नहीं अनेक थे और आज़ादी को जीता था ✊🏻
शहीदों को नमन,सपूतों को सलाम 🙏🏼
#IndiaIndependenceDay
पहले जब कोई सैनिक तिरंगे में लिपट कर आता था तो न्यूज चैनलों में लता जी का "ऐ मेरे वतन के लोगो" बजता रहता था।आज लता जी खुद तिरंगे में लिपटी हुई है और वही गाना बजता जा रहा है। बहुत मार्मिक पल है एक प्रशंसक के लिए।
#LataMangeshkar#लता_मंगेशकर