क्या आपको पता है,
ये जो छात्र इलाहाबाद में UPPSC मुख्यालय पर धरना दे रहे हैं,
ये UP के गांवों के बेहद साधारण परिवारों के छात्र होते हैं,
इनमें से 90 फीसदी बेहद गरीब होते हैं,
गांव में दो, चार बीघा खेत होता है,
कुछ के पास तो वो भी नहीं होता है,
कोई भाग्यशाली हुआ तो उसके मम्मी पापा में से कोई एक टीचर या कोई दूसरी छोटी मोटी नौकरी करता होगा,
इनमें से नब्बे फीसदी कई साल तक
दाल, भात, रोटी, चोखा खाकर बिता देते हैं,
बीमार होते हैं तो दो चार दिन तक डॉक्टर के पास नहीं जाते हैं, पैसा बचाने के लिए,
एक रुपया वाला पैरासिटामोल खाकर ठीक हो जाते हैं,
कई बार राशन खत्म हो जाता है, तो जुगाड़ लगाकर दूसरे छात्रों के यहां खाने का प्रयास कर लेते हैं,
कई कई बार कमरे का किराया नहीं दे पाते हैं, तो मकान मालिक के ताने सुनते हैं,
गांव में बाबू जी से पैसे मांगने में डरते हैं,
जानते हैं, उनके पास भी कहां हैं,
ये सब इलाहाबाद में खाली पढ़ाई नहीं करते हैं,
ये अपने कंधों पर घर वालों की उम्मीदों का पहाड़ लेकर जीते हैं,
इस उम्मीद में कि,
कभी तो जीत जाएंगे,
गरीबी से,
#UPPSC_No_Normalisation
उत्तराखंड PCS मुख्य परीक्षा को लेकर छात्रों ने आयोग ने कुछ सवाल उठाए हैं।
ख़ासकर हिंदी माध्यम के बच्चों ने।
इनकी माँग को अनसुना नहीं किया जा सकता @pushkardhami#ukpcs
मोदी-योगी की डबल इंजन सरकार को जड़ से उखाड़ने के लिए ये भीड़ काफी है!
PCS और RO/ARO परीक्षा एक ही दिन में करानी होगी, युवाओं की माँग जायज़ हैं।
#UPPSC_No_Normalization