मेरे साथ ही, नेहा दास @neha_laldas को सवर्णों के अधिकारों पर लिखने-बोलने के लिए जिस स्तर की नीचता कुछ बड़े हैंडलों ने की थी, वह भूला नहीं जा सकता। जिहादी और पाकिस्तानी से ले कर घटिया स्तर की बातें…
फिर याद है मुझे ‘मीसो के अजय सान्याल’ द्वारा ‘UC व्हाट्सएप’ एवम् प्रदर्शन में घुसपैठ करने का दावा करने की। तत्पश्चात, ‘पाकिस्तान से मदद लेंगे’ वाला नैरेटिव चला कर इस स्वस्थ चर्चा को डीलेजिटिमाइज करने की।
आज वो सारे लोग सरकार का हगा समेट रहे हैं। ‘दो कदम पीछे’, ‘कॉन्ग्रेस का शिक्षा मंत्री त्यागपत्र क्यों नहीं दे रहा’, ‘जेन जी के संस्कार दिख गए हमें, बच्चों को ठीक से पालो’ जैसे दर्शन पढ़ा रहे हैं।
अब बताओ न चूतियों, कौन सा मास्टरस्ट्रोक था ये?
भाजपा नेता के ‘वराहे’ से संबद्ध हरामी सूअरों ने मेरी माँ के निधन के समय सबसे अधिक नीचता भरे आक्रमण कराए थे। अब निकालो न तीन फॉलोवर वाले वैरिफाइड हैंडल और AI के पोस्टर, बताओ न मुझे प्रधान की महान उपलब्धियाँ?
अब तुम लोग यूपी पर ध्यान दो, वहाँ का रायता समेटना, फैला तो बहुत दिए हो।
आप एथनॉल मंत्री के पेड ट्वीट कर तो रहे हैं पर कल यही मंत्री जब मोदी और अमित शाह की राह का रोड़ा बनेगा तब आप इसे कांग्रेस का दलाल बतायेंगे। हाँ वो बात अलग है की आपकी निष्ठा सिर्फ़ पैसे के प्रति है ना की नेता के प्रति तो फ़र्क़ पड़ेगा नहीं पर यही आदमी जल्दी गोभी खोदेगा देखते रहना।
मुंडक उपनिषद अथर्ववेद के आखिरी पेज पर भी इस्तीफे का वर्णन है , ये देना अच्छी बात है,
"इस्तीफ़ं ददाम्यद्य, कर्तव्यं मया कृतम्।
सर्वेषां मङ्गलं भूयात्, भवतु लोकहितं सदा॥"
डीप स्टेट वगैरह बहुत सुनते हैं आजकल पर जिस देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार से लेकर विदेश मंत्री के बालक और लगभग पूरा मंत्रालय और टॉप आर्मी अफ़सर जिनके बालक विदेश में हैं, उस देश में विदेशी हाथ नहीं होगा तो किसमे होगा? आपके पूरे राजतंत्र की अगली पीढ़ी विदेश में है और कुछ वहाँ की नागरिकता ले चुके हैं, लड़ने भिड़ने के लिए बाकियों को छोड़ दिया है। इस देश में भी विदेशी ताक़त राज नहीं करेंगी तो और कहाँ करेंगी।
व्हाट अ क्लाउन! जब तर्क समाप्त हो जाते हैं, तब बात भाषा, मर्यादा, व्यवहार पर आ जाती है। सत्य यह है कि आपकी पार्टी ने हर उस बात को सामान्य बनाया है जिस पर आप पिनक रहे हैं।
कहाँ था आपका यह ज्ञान जब सभ्य भाषा में यही बातें सात महीने पहले कही जा रही थीं? आपके पूरे तंत्र ने ट्रोल छोड़े, गालियाँ दीं और हर वह बात बोली जो किसी को भी नहीं बोलना चाहिए था। राहुल कौशिक और वराहे के सूअरों से तो हर दिन उठना बैठना होता होगा आपका?
इसलिए, प्लीज कट द क्रैप!
इस आंदोलन का सबसे बड़ा प्रभाव ये हुआ है कि जिसे MSM माने मेन स्ट्रीम मीडिया कहा जाता है, जेन ज़ी जिसे गोदी मीडिया कहती है और आम भाषा में जिसे दलाल मीडिया कहा जाता है, वो अब सिर्फ कमलगट्टों और मोदी छाप जमात तक सीमित हो गया है. विश्वसनीयता का नया दौर अब यूट्यूबर्स के नाम है.