जीव हत्या एक महापाप है। संत रामपाल जी महाराज की प्रेरणा से उनके करोड़ों अनुयायियों ने मांसाहार का पूर्ण रूप से त्याग कर दिया है और शुद्ध शाकाहारी जीवन अपना लिया है। 🌱
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विभिन्न गांवों से पहुंचे किसानों ने सतलोक आश्रम, श्री धनाना धाम में संत रामपाल जी महाराज से मुलाकात कर आशीर्वाद लिया। किसानों ने जनहित और किसान उत्थान के कार्यों की प्रशंसा करते हुए संत जी के प्रति सम्मान प्रकट किया।
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गुरु नानक देव जी को कबीर परमात्मा बेई नदी के किनारे 'जिंदा महात्मा' के रूप में मिले थे और उन्हें सचखंड (सतलोक) का साक्षात्कार कराया था।
गुरु नानक देव जी ने कहा
यक अर्ज गुफतम पेश तो दर गोश कुन करतार। हक्का कबीर करीम तू बेएब परवरदिगार!!
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सूफ़ी संत रूमी को कबीर परमात्मा शम्स तबरेज़ के रूप में 15 नवंबर 1244 को कोन्या (तुर्की) में मिले थे। इसके उपरांत, रूमी ने अपने मुर्शिद (गुरु) शम्स तबरेज़ की प्रशंसा में रचित कृतियों 'मसनवी' और 'दीवान-ए-कबीर' में कबीर परमात्मा (अल-खिज़्र) का उल्लेख किया है
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संत गरीबदास जी (गाँव - छुड़ानी, जिला- झज्जर, हरियाणा) को कबीर परमेश्वर सन् 1727 में खेतों में 'जिंदा महात्मा' के रूप में मिले और उन्हें सतलोक का साक्षात्कार कराया।
इस पर संत गरीबदास जी ने कहा हैः
गरीब, परमेश्वर एक कबीर है, दूजा नहीं आधार।
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कबीर परमात्मा के दर्शन गरुड़ जी को हुए थे, कबीर सागर में 11वें अध्याय ‘‘गरूड़ बोध‘‘ पृष्ठ 65 (625) पर प्रमाण है।
परमेश्वर कबीर जी ने धर्मदास जी को बताया कि मैंने विष्णु जी के वाहन पक्षीराज गरूड़ जी को उपदेश दिया, उनको सृष्टि रचना सुनाई।
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त्रेता युग में कबीर परमेश्वर मुनींद्र नाम से प्रकट हुए तथा नल व नील को शरण में लिया। उनकी कृपा से ही समुद्र पर पत्थर तैरे।
धर्मदास जी की वाणी में प्रमाण है:-
रहे नल नील जतन कर हार, तब सतगुरु से करी पुकार।
जा सत रेखा लिखी अपार, सिंधु पर शिला तिराने वाले।
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संत रामपाल जी महाराज (गाँव- धनाना, जिला- सोनीपत, हरियाणा) से परमेश्वर कबीर साहेब जी की भेंट संवत् 2054, फाल्गुन मास, शुक्ल पक्ष की एकम (9 मार्च 1997) को सुबह 10:00 बजे हुई थी।
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धर्मदास जी को कबीर परमात्मा पहली बार मथुरा में 'जिंदा महात्मा' के रूप में मिले थे। इसके बाद वे अनेक बार विभिन्न रूपों में मिले, उन्हें सतलोक का साक्षात्कार कराया और पुनः संसार में भेजा।
इस पर धर्मदास जी ने कहा हैः
आज मोहे दर्शन दियो जी कबीर ।।
संत मलूक दास जी को भी कबीर परमात्मा के दर्शन हुए थे।
जपो रे मन सतगुरु नाम कबीर।। जपो रे मन परमेश्वर नाम कबीर। चार दाग से सतगुरु न्यारा, अजरो अमर शरीर। दास मलूक सलूक कहत हैं, खोजो खसम कबीर।।
कबीर सागर, अध्याय अगम निगम बोध, पृष्ठ 45 #किसको_मिले_कबीरभगवान
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संत नामदेव जी से कबीर परमात्मा एक संत के रूप में पंढरपुर में मिले और उनके साथ अनेक लीलाएँ कीं।
इस विषय में संत गरीबदास जी ने कहा है:
मूंज अरू बांस सर खूब चोखे लिये, नामदेव की छांन तहां खूब छाई। पातशाह मस्क जद बांध नामा लिया, गऊ तत्काल बेगहि कबीर जिवाई ।।
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तैमूर लंग को कबीर परमात्मा ने 'जिंदा महात्मा' के रूप में तब दर्शन दिए थे, जब वह भेड़-बकरियाँ चरा रहा था। संत गरीबदास जी ने कहा है: गरीब, तैमूरलंग को तालिब मिले, एक रोटी की चाहय। जिंदा रूप कबीर धरहीं, सुनी तैमूरलंग की माय।।
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मानवता ही असली धर्म: कबीर परमात्मा जी के अनुसार, ईश्वर न केवल मंदिर में है और न ही मस्जिद या काबा में। वह हर इंसान के भीतर मौजूद हैं।,
कबीर परमात्मा, इस्लाम धर्म के प्रवर्तक पैगंबर हज़रत मुहम्मद जी से भी मिले थे।
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