जंतर-मंतर पर आरक्षण खत्म करने की मुहिम को हवा देने वालों को यह समझना होगा कि आरक्षण कोई खैरात नहीं, बल्कि संविधान द्वारा दिया गया सामाजिक न्याय का अधिकार है। सवाल यह भी है कि इस मुहिम को ताकत और संरक्षण आखिर किसका मिल रहा है? देश की जनता सब देख रही है।
उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय की बदहाली और प्रशासनिक व्यवस्था की पोल खोलना एक युवक को भारी पड़ गया। स्कूल की दुर्दशा और सुविधाओं के अभाव का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर शेयर करने के बाद प्रशासन ने मामले में सुधार करने के बजाय उल्टा वीडियो बनाने वाले युवक पर ही एफआईआर (FIR) दर्ज कर दी है। इस कार्रवाई के बाद इलाके में भारी नाराजगी है। स्थानीय लोगों का सवाल है कि क्या सरकारी तंत्र की कमियों को उजागर करना और बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए आवाज उठाना अब जुर्म बन चुका है? जहां एक तरफ बुनियादी सुविधाओं के अभाव में नौनिहाल पढ़ने को मजबूर हैं, वहीं दूसरी तरफ सवाल उठाने वालों पर इस तरह की पुलिसिया कार्रवाई प्रशासनिक रवैये पर कई गंभीर सवाल खड़े करती है।
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बिहार पुलिस से ही Law & Order को खतरा है।
बिहार पुलिस से अब निर्दोष युवाओं को ख़तरा है।
बिहार पुलिस अब पुलिस नहीं रही वो बर्बर हो चुकी है!
और सब कुछ सम्राट जी के आदेश पर हुआ है। बिहार के युवा याद रखेंगे।
DU ने पूरी निर्लज्जता के साथ लिखा है~
“अगर आप जंतर-मंतर जाएँगे तो आपकी academic progress और opportunities ख़तरे में होगी।”
देश के सभी कॉलेज-विश्वविद्यालय पर RSS क़ब्ज़ा कर रही है और संघियों को हर पद पर बिठा रही है ताकि शिक्षा व्यवस्था और उसके लोग RSS के सामने दण्डवत प्रणाम करें और ये भाजपा के आने के बाद ही शुरू हो गया था। उसका असर अब खुल कर दिख रहा है।
DU के पोस्ट से समझ सकते है ,रेंगना क्या होता है।
सोनम वांगचुक ने अस्पताल से जारी किया वीडियो. कहा, अभी मैं जिंदा हूं. आज अनशन का 25वां दिन है. इस दौरान मेरा करीब 11Kg वजन कम हुआ है.
उन्होंने निवेदन किया कि छात्रों पर आगे किसी तरह का बल प्रयोग न हो और प्रदर्शनकारियों पर किसी भी तरह पुलिस कार्रवाई या FIR भी न हो. अगर प्रशासन से इस बात का अश्वासन मिलता है तो वो 22 जुलाई को ही अनशन तोड़ देंगे.
Courtesy : X/@Wangchuk
Sonam Wangchunk | Hunger Strike
"कुछ गुंडे किस्म के लोग आए और उसी बहाने मारा-पीटा जा रहा है।"
सुबह से वहां कुछ सत्ता समर्थक गुंडे मौजूद थे। अमित शाह के संरक्षण में दिल्ली को रणभूमि बनाया जा रहा है!
खुद का बेटा लेट हुआ तो दर्द उठने लगा,
लेकिन जब किसी और के 20 बच्चे मर गए तो तुम्हारे कानों में जूं तक नहीं रेंगी।
"लगेगी आग तो आयेंगे कई घर जद में,
यहां पर सिर्फ हमारा मकान थोड़े है"!
सामान्य तौर पर दिल्ली पुलिस में ऑन-ड्यूटी सिपाही या अधिकारी दाढ़ी नहीं रख सकते हैं, उन्हें Clean Shave रखना अनिवार्य होता है। इसका मतबल ये पुलिस वाले नहीं हो सकते ये RSS के गुंडे है वर्दी में।
ओर ये शक्ल दे पुलिस वाले लगते है क्या नेम प्लेट भी नहीं ह
यह दोनों के चेहरे नक़ाब में देश की जनता के सामने रख रहा हु यह एक तो है यस कांवत और दूसरा है हनी डागर यह दोनों ही दिल्ली पुलिस के हवलदार है तो अब दिल्ली पुलिस @DelhiPolice कब इनके ख़िलाफ़ मुकदमा दर्ज कर रहे हो
इनकी सच्चाई सुनकर आप हैरान हो जाओगे यह पढ़ लिख कर नॉकरी नहीं लगे यह इनके पिता जी की मौत के बाद उनकी जगह नॉकरी लगे हैं देश की जनता को पता होना चाहिए यह ।
यह पिता की मौत के बाद दोनों नॉकरी लगे हैं लेक़िन कल यह ड्यूटी बिना युवाओं को पीटने आए हुए थे अब दिल्ली पुलिस इनके खिलाफ कार्यवाही करती है या नही देश इंतजार में रहेगा