योगी आदित्यनाथ जी! क्या ये आपके राज्य की पुलिस पर संगीन आरोप नहीं लगाए जा रहे हैं? यूपी में भाजपा राज में दलितों, पिछड़ों और कमज़ोरों पर ज़ुल्म की इंतहा होती जा रही है।
@Baliyan_x आज अखिलेश जी नहीं बोलते तो चोरी का खुलासा भी नहीं होता यह भी कान खोल करके सुन लो नहींलुटेरे ऐसे लुटते रहते और तुम लोग कान में तेल डाल करके सोएरहते राम जी के नाम पर दान करतेरहते करोगे भी क्योंकि तुम्हारी नजर में राम ने दुनिया बनाई है
प्रिय देशवासियों,
आज प. बंगाल आकर चुनाव की महाधांधली और महाबेईमानी के बारे में जानकर ये लगा कि अब बात केवल चुनाव की प्रक्रिया को बचाने की नहीं है, देश को बचाने की है।
आज देश उन गलत हाथों में चला गया है जो संविधान, लोकतंत्र, आरक्षण, स्वतंत्रता, समता-समानता, न्याय, गरिमा, देश की एकता-अखंडता, सद्भाव-सौहार्द-बंधुत्व, महिलाओं के मान-सम्मान, युवाओं, किसानों, मज़दूरों, शोषित, वंचित, ग़रीब कुल मिलाकर पीड़ित-पीडीए के वर्तमान व भविष्य के हक़ और अधिकारों के घोर विरोधी हैं।
भाजपाई और उनके मुख़बिर संगी-साथी आज़ादी से पहले भी देश के विरोधी थे और आज़ादी के बाद भी हैं।
अब देशवासियों को ये समझना है कि :
- देश की एकता और व्यवस्था को भंग करके कमज़ोर करनेवाले ये लोग किसके एजेंट हैं?
- स्वदेशी की बात करके विदेश से पैसा लेनेवाले ये लोग कौन हैं?
- ये अनरजिस्टर्ड क्यों हैं और अंडरग्राउंड क्यों रहते हैं?
- ये कोविड के नाम पर जनता से जमा किये चंदे का हिसाब क्यों नहीं देते हैं?
- ये भ्रष्टाचार को बढ़ाकर देश को बर्बाद क्यों कर रहे हैं?
- ये देश की तरक़्क़ी के लिए योजना बनानेवाले ‘योजना आयोग’ को समाप्त करके देश के विकास को ख़त्म करने की चाल क्यों चल रहे हैं?
- ये शिक्षा पर क़ब्ज़ा करके देश की मानसिक शक्ति को खोखला क्यों कर रहे हैं?
- ये सरकारी स्कूलों को बंद करके आम जनता के बच्चों को अनपढ़ रखने का षड्यंत्र क्यों कर रहे हैं?
- नोटबंदी से छोटे कारोबार के ख़ात्मे की साज़िश क्यों करी?
- नोटबंदी घोटाले में बैंकिंग व्यवस्था को नोट बदलने के नाम पर भ्रष्ट क्यों किया?
- जीएसटी को जानबूझकर उलझाऊ और भ्रष्ट बनाकर ये देश की अर्थव्यवस्था को चौपट क्यों कर रहे है?
- ये अपने लोगों को पैसा जमाकर करके बाहर क्यों भेज देते हैं?
- विश्वगुरु का दावा करनेवाले विश्व के विभिन्न देशों में भाग गये, देश के लुटेरों को ये लोग वापस क्यों नहीं ला रहे हैं?
- ये साम्प्रदायिकता का ज़हर फैलाकर देश की एकता को क्यों तोड़ना चाहते हैं?
- राजनीतिक दलों को तोड़कर ये लोग देश की राज-व्यवस्था को नेस्तनाबूद करने पर क्यों आमादा है?
अब वो निर्णायक समय आ गया है, जब हम सबको मिलकर इन देश विरोधी नकारात्मक ताक़तों को हमेशा के लिए हराना होगा, देश को बचाना होगा, और देश की नई आज़ादी के लिए तिंरगा उठाना होगा!
आपका
अखिलेश
क्लेम 1: टिपिटक के ओकाक ही इक्ष्वांकु है ?
फैक्ट: अगेन फेक गपोड़। बुद्ध शाक्य वंशी थे और उनके समकालीन कोई इक्ष्वांकु वंश नहीं था न ही उन्होंने कभी ख़ुद को इक्ष्वांकु वंश का कहा।
न ही उस समय क्ष नाम की ध्वनि पायी जाती थी।
पहली बार बुद्ध से हज़ार साल बाद पाँचवी सदी में ईखो की खेती के कारण इखवांकु वंश चर्चा में आया जो बुद्ध को मानता था। वो भी इक्ष्वांकु न कहके इखवाकु कहता था ख़ुद को।
कुछ अल्पज्ञानी अनुवादकों ने ओकाक का अनुवाद धूर्तता पूर्व इक्ष्वांकु किया जिसको अब नए रिसर्च में पूरी तरह नकार दिया गया है।
क्लेम 2 : टिपिटक में बुद्ध को सूर्यवंशी कहा गया ?
फैक्ट: अगेन फेक गपोड़। बुद्ध को सूर्य कहा गया साथ ही बुद्ध के बहुत से अनुवायी जो धम्म के लिए बेहतरीन काम किए उन्हें भी सूर्य कहा गया जैसे नागार्जुन, देव, अश्वघोष, बुद्धघोष, चंद्रकीर्ति, धम्मकीर्ति, धम्मपाल आदि।
सूर्यवंश की पहली कल्पना फ़ारस और ख़ोतान के बीच हुए शादी संबंध में बीच में राजकुमारी की प्रेग्नेंट हो जाने
की बात को दबाने हेतु सूर्यदेव ने ख़ुद ये पैदा किया है कि अफ़वाह उड़ाई गई और जब बच्चा जन्म हुआ ईओ ही पहला सूर्यवंशी शासक कहा गया जो बुद्ध धम्म को मानता था ( ह्यूएनसंग ने इसके बारे में डिटेल्स से लिखा है ) यानी बुद्ध को मानने वाला पहला भारत से बाहर फ़ारस खोतान के बीच सूर्यवंशी था न की बुद्ध से पूर्व भारत में कोई सूर्यवंश या सूर्यवंशी होता था।
क्लेम 3 : संस्कृत टेक्स्ट में ओकाक को इक्ष्वांकु कहा गया?
फैक्ट: भारत में 12 वी सदी बाद संस्कृत में बुद्धिस्ट लिट्ररेचर कौन लिख पढ़ रहा था जवाब है उस समय बुद्धिस्ट नाम मात्र बचे थे और ग़ैर ब्राह्मण से संस्कृत लुप्त था । बाक़ी सभी देश में उनकी भाषा में टिपिटक थी तो इक्ष्वाकु संस्कृत में अनुवाद अंग्रेजो के समय किया गया न की बुद्ध के समकालीन।
क्लेम 4 : विष्णु पुराण और पाली केनन में यही कहानी कही गई है ?
फैक्ट : विष्णु पुराण में अंग्रेजों और मुस्लिम शासक की चर्चा है तो कब ये काहठा गपोड़ी गई जाहिर है। जहाँ तक पालि केनन की बात है तो उसमें क्ष त्र ज्ञ होता ही नहीं तो अगेन फिर से ढाक के तीन पात।
क्लेम 5: अश्वघोष ने बुद्ध को इक्ष्वांकु वंश का कहा?
फैक्ट: अश्वघोष की बुद्ध चरित भारत में 28 में से सिर्फ़ 14 सर्ग मिले और पहला सर्ग के सुरु के श्लोक चाइना और तिब्बत में मिले बुद्ध चरित से मैच नहीं करते। संस्कृत बुद्धचरित के पहले ही श्लोक में इक्ष्वांकु लिखा वो भी संस्कृत ब्राह्मण लेखकों ने अभी 150 साल पहले. और वो किताब की भूमिका में स्वीकार भी करते है की बहुत कुछ ख़ुद से अनुमान कर जोड़ा दिया गया है क्योकि बहुत से अंश मिट गए थे संस्कृत बुद्धचरित में।
क्लेम 6 : शाक्य वंश और इक्ष्वांकु वंश सेम है?
फैक्ट: अगेन टोटल गपोड़। आँख का अंध और कान से बहरा भी इतिहास थोड़ा बहुत पढ़ा होगा तो बता देगा की ये इक्ष्वांकु शब्द 5 वी सदी में भी कही लिखा हुआ नहीं मिला बल्की ईखो की खेतिहर इक्ष्वाकुओ को मुग़लो और अंग्रेजों के समय इक्ष्वाकु कहा गया जो बुद्ध को मानने वाले थे । जबकि ब्राह्मण ग्रंथ के अनुसार इक्ष्वाकु मनु के नाक से पैदा हुए थे और मनु ख़ुद ब्राह्मण की संतान थे जबकि पुरातत्व सबूत में ब्राहा ख़ुद बुद्ध की आराधना करते थे वो किसी इक्ष्वंकु के दादा जी नहीं थे ।
लगे हाथ कुछ रिफरेन्स भी संलग्न है।
महात्मा बुद्ध के अनुसार, वैर की शांति केवल अ-वैर (प्रेम, मैत्री और करुणा) से संभव है, न कि वैर से। बुद्ध ने कहा है कि घृणा से घृणा कभी शांत नहीं होती, यह एक शाश्वत नियम है कि प्रेम से ही वैर शांत होता है। यह आंतरिक शांति और आत्म-नियंत्रण के माध्यम से प्राप्त की जा सकती है।
बुद्ध ही सत्य हैं।
बाकी सब पाखंड हैं।
जहां खोदोगे वहां विश्व गुरु तथागत बुद्ध ही निकलेंगे। पूरे विश्व के रग रग में कण कण में तथागत बुद्ध मिलेंगे।
भारत में पाखंडियों ने विश्व गुरु तथागत बुद्ध को कॉपीराइट कर लिया है उनकी पूरी आईडियोलॉजी को चुरा लिया हैं।🍁⛩️☸️🪷
नमो बुद्धाय।
जाति जनगणना के बाद सिर्फ़ आरक्षण की बात अधूरी होगी। असली सामाजिक न्याय के लिए ज़रूरी सुधार:
• शिक्षा में समान अवसर और गुणवत्तापूर्ण सरकारी शिक्षा
• ज़मीन सुधार और भूमिहीनों को भूमि अधिकार
• आर्थिक हिस्सेदारी और निजी क्षेत्र में आरक्षण
• न्यायपालिका, मीडिया, सेना व कॉरपोरेट में प्रतिनिधित्व
• बजट और योजनाओं में आबादी के हिसाब से संसाधन वितरण
सिर्फ़ गिनती नहीं, हक़ और हिस्सेदारी की लड़ाई।
महात्मा फुले ब्राह्मणों के खिलाफ़ नहीं, पाखंड के खिलाफ़ थे। वे कहते थे “पूजा-पाठ करना ब्राह्मण का धर्म नहीं, धंधा है।”
गुलामगिरि में उन्होंने अंधविश्वास और जातिवाद की जड़ों को उखाड़ा, इसलिए मनुवादी आज भी जलते हैं।
महात्मा ज्योतिबा फुले की 200वीं जन्मजयंती पर भारत सरकार 11 अप्रैल 2026 से 2028 तक पूरे देश में राष्ट्रव्यापी समारोह आयोजित कर रही है।
2 साल तक फुले साहेब के क्रांतिकारी सामाजिक कार्यों का प्रचार-प्रसार होगा।
200वीं जन्मजयंती पर राष्ट्रव्यापी समारोह मनुवादियों के लिए नमक का छिड़काव है।
फुले जी अमर रहें जय भीम! जय फुले! जय सावित्रीबाई!