नासिक के कळवण स्थित सरकारी आदिवासी आश्रम विद्यालय में कक्षा 9 की एक नाबालिग छात्रा द्वारा बच्चे को जन्म देने की घटना बेहद गंभीर और चिंताजनक है। यह केवल एक छात्रा के साथ अन्याय नहीं, बल्कि आदिवासी छात्राओं की सुरक्षा व्यवस्था की भयावह विफलता है। इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को तत्काल गिरफ्तार किया जाए और सभी आदिवासी आश्रम विद्यालयों की सुरक्षा व्यवस्था की उच्चस्तरीय समीक्षा की जाए।
आदिवासी बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
Mount Kilimanjaro is not only Africa's highest peak (5,895 meters) but also home to a rich Indigenous heritage. For centuries, the Chagga people have lived on its slopes, preserving their unique culture and traditional farming practices while living in harmony with nature.
चीन ने 400 साल पुराने गाँव को आग से बचाने के लिए आधुनिक हाई-प्रेशर वॉटर कैनन सिस्टम लगा दिया, ताकि सांस्कृतिक विरासत सुरक्षित रहे। और हमारे यहाँ? आज भी कई जगह वैज्ञानिक समाधान की बजाय मंत्र, टोटके और अंधविश्वास को बढ़ावा दिया जाता है। आग सुरक्षा तकनीक से बुझती है, मंत्रों से नहीं। जब तक वैज्ञानिक सोच और आधुनिक व्यवस्था को प्राथमिकता नहीं मिलेगी, तब तक विकास के दावे अधूरे ही रहेंगे।
मोगा (पंजाब) में बेटियों को स्कूल पहुँचाने के लिए युवाओं को बाढ़ के पानी में अपनी जान जोखिम में डालकर मानव श्रृंखला बनानी पड़ रही है, यह सरकार की घोर विफलता का प्रमाण है। जब बच्चे सुरक्षित स्कूल तक नहीं पहुँच सकते, तब विकास के दावों का क्या अर्थ रह जाता है?
🦡🐍 साँप और नेवले की जानलेवा लड़ाई!
देखो ये जंग… रेगिस्तान की धूल उड़ रही है, मौत नाच रही है!
नेवला हवा में उछलकर हमला बोल रहा है और कोबरा अपना फन फैलाकर डंक मारने को तैयार… एक पल की चूक और खेल खत्म! 💥
एक ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ IPS अधिकारी का समय से पहले सेवा छोड़ना गंभीर चिंता का विषय है। यदि जगमोहन मीणा का इस्तीफा वास्तव में राजनीतिक दबाव का परिणाम है, तो इसकी निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए। सच्चाई सामने आनी चाहिए और यदि किसी प्रकार का अनुचित दबाव बनाया गया है, तो जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
2013 बैच के युवा IPS अधिकारी जगमोहन मीणा का मात्र 37 वर्ष की आयु में, लगभग 13 वर्ष की सेवा के बाद इस्तीफा देना कई सवाल खड़े करता है।
IIT से पढ़ाई, पहले ही प्रयास में IPS, कई संवेदनशील जिलों में बेहतरीन सेवा और राष्ट्रीय पुलिस पदक जैसे उपलब्धियों के बाद अचानक इस्तीफा… जबकि कोई स्पष्ट कारण भी सार्वजनिक नहीं किया गया।
ईमानदारी के साथ चलना बहुत कठिन मार्ग है !
इंडिया टुडे का कार्टून राम मंदिर की दान पेटी में हुई चोरी तो दिखा देता है, लेकिन असली जिम्मेदार किरदारों और सत्ता से जुड़े सवालों को दिखाने का साहस नहीं जुटा पाता। चयनात्मक निर्भीकता पत्रकारिता नहीं, बल्कि डर और सुविधा का परिचय है।