आज बिकानेर में सरकार की जनविरोधी नीतियों और आमजन की समस्याओं को लेकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया गया।
प्रदर्शन के पश्चात जिला कलेक्टर महोदय को ज्ञापन सौंपकर जनहित से जुड़े मुद्दों के शीघ्र समाधान की मांग की गई।
— @VijayBeniwal_@hanumanbeniwal
राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री @BhajanlalBjp
से मेरा सवाल है —
एक तरफ आपकी सरकार हक और अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे किसानों, युवाओं और छात्रों पर मुकदमे दर्ज कर उन्हें जेल भेज रही है तथा उनकी गिरफ्तारी पर हार्डकोर अपराधियों की तरह इनाम घोषित कर उनका भविष्य बर्बाद करने पर तुली है।
दूसरी तरफ, प्रमोद शर्मा नामक व्यक्ति, जो स्वयं को आपका रिश्तेदार बताता है और जिसके विरुद्ध गंभीर धाराओं में मामले दर्ज हैं, पिछले एक महीने से दिल्ली के सरदार पटेल मार्ग स्थित ताज पैलेस होटल में ठहरा हुआ था, तो क्या आपकी सरकार और राजस्थान पुलिस को इसकी जानकारी थी ?
यदि जानकारी थी तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई, और यदि नहीं थी तो क्यों नहीं?
राजस्थान की जनता जानना चाहती है कि क्या प्रभावशाली लोगों और आम नागरिकों के लिए अलग-अलग कानून हैं, या कानून सबके लिए समान है ?
@RajCMO@PoliceRajasthan
लोकतंत्र में जनता से सड़क, चौक और सार्वजनिक स्थान छीन लेना किसी समस्या का समाधान नहीं है। जनता को शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने, संगठित होने और विरोध दर्ज कराने का अधिकार लोकतंत्र की आधारशिला है। जब प्रशासन पूरे शहर में रैलियों, धरनों और सभाओं पर व्यापक प्रतिबंध लगाता है, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या कानून-व्यवस्था के नाम पर नागरिक स्वतंत्रताओं को अनावश्यक रूप से सीमित किया जा रहा है।
लोकतंत्र में जनता की आवाज़ को नियंत्रित करने के बजाय उसे सुनना प्रशासन की जिम्मेदारी है। असहमति को व्यवस्था के लिए खतरा मानना लोकतांत्रिक सोच नहीं, बल्कि प्रशासनिक असहिष्णुता का संकेत है।
जोधपुर कमिश्नरेट को याद रखना चाहिए कि लोकतंत्र में सड़कें सिर्फ सत्ता के जुलूसों के लिए नहीं, जनता की आवाज़ के लिए भी होती हैं।
जोधपुर कमिश्नरेट का यह आदेश लोकतांत्रिक अधिकारों पर सीधा प्रहार प्रतीत होता है। जोधपुर पुलिस कमिश्नर और अन्य अधिकारियों को यह नहीं भूलना चाहिए कि जनता की आवाज़ को अनुमति और प्रतिबंधों की दीवारों में कैद नहीं किया जा सकता। शांतिपूर्ण विरोध लोकतंत्र की आत्मा है, और उस पर व्यापक रोक लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करती है। कानून-व्यवस्था बनाए रखना आवश्यक है, लेकिन नागरिक स्वतंत्रताओं को सीमित करना उसका विकल्प नहीं हो सकता।
आवाज़ों को दबाकर शांति नहीं बनाई जाती, बल्कि असंतोष को और गहरा किया जाता है।
राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री @BhajanlalBjp को जोधपुर पुलिस आयुक्तालय के इस तुगलकी फरमान पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है |
@hanumanbeniwal@RajCMO@CP_Jodhpur
राजस्थान चतुर्थ श्रेणी भर्ती सहित समस्त प्रक्रियाधीन भर्तियों में एक वर्ष की प्रतीक्षा नियम को संविधान के अनुच्छेद 309 के अंतर्गत पूर्ण प्रभाव के साथ लागू करवाने के संदर्भ में अभ्यर्थियों ने विगत दिनों जयपुर आवास पर ज्ञापन दिया |
कुचामन में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन और अन्य मुकदमों में जमानत पर रिहा होने के बाद हमारे नेता आदरणीय हनुमान जी बेनीवाल से मुलाक़ात कर आशीर्वाद व मार्गदर्शन प्राप्त किया॥
संघर्ष के साथी भाई रामनिवास जी पोषक, अंकित बुगालिया, महेंद्र जी श्योर, रमेश कलकला, विकास जाखड़ व दिनेश जाजड़ा भी साथ रहे॥
#RlpRajasthan
नागौर जिले के रियां बड़ी में बजरी माफियाओं के खिलाफ राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी ने जन-सहयोग से बड़ा आंदोलन किया,प्रशासन ने माफियाओं के दबाव में कोई समझौता करना उचित नहीं समझा तो उसके बाद जयपुर कूच का ऐलान हुआ और हजारों लोग नागौर से अजमेर के मध्य स्थित बाडी घाटी पहुंचे तब सरकार हरकत में आई, मुख्यमंत्री के ACS से दूरभाष पर वार्ता हुई और सीएमओ के निर्देशों पर जिला कलक्टर,जिला पुलिस अधीक्षक,खनन विभाग सहित अन्य विभागों के आला अधिकारी समझौता करने मौके पर पहुंचे। विस्तार से बातचीत के बाद बजरी माफियाओं के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने, माफियाओं के खिलाफ आंदोलित लोगों पर दर्ज मुकदमों में कोई कार्रवाई नहीं करने, गलत रूप से आवंटित लीजों को निरस्त करने सहित कई मुद्दों पर सहमति बनी। मगर आपकी पुलिस ने आज अलसुबह 3-4 बजे रियां क्षेत्र में दर्जनों घरों में महिलाओं और बच्चों को नींद में परेशान किया और जिस तरह हार्डकोर अपराधियों को पकड़ने के लिए छापे मारे जाते हैं, उसी तर्ज पर छापेमारी कर बजरी माफियाओं के खिलाफ आंदोलन करने वाले दो दर्जन से अधिक लोगों और जन-प्रतिनिधियों को गिरफ्तार किया गया। मैं पुलिस की इस कार्रवाई की कड़ी निंदा करता हूं।
मैं राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री @BhajanlalBjp
से पूछना चाहता हूं कि क्या आपकी सरकार में आंदोलन के समय जनता से किए गए वादे और हुए समझौते केवल कागजों तक ही सीमित रह गए हैं ? सरकार के निर्देशों के बाद अधिकारियों द्वारा किए गए वादों से मुकरना जनता के विश्वास के साथ छल है। मुख्यमंत्री जी को याद रखना चाहिए कि आंदोलनकारियों ने भरोसा करके समझौता स्वीकार किया था, बहाने सुनने के लिए नहीं।
चूंकि गृह और खनन विभाग का जिम्मा मुख्यमंत्री के पास है, ऐसे में यदि पुलिस, खनन विभाग और सत्ता में बैठे कई नेता मिलकर अवैध बजरी के कारोबार को बढ़ाने में व्यस्त हैं, तो मुख्यमंत्री ऐसे लोगों के फोन सर्विलांस पर कब लेंगे ?
क्या सरकार का लक्ष्य सिर्फ आंदोलन करने वाले लोगों के इरादों को कुचलने का है ? मैं मुख्यमंत्री जी को स्मरण दिलाना चाहता हूं कि वादा निभाना नेतृत्व की पहचान होती है और वादा तोड़ना राजनीतिक मजबूरी नहीं, बल्कि राजनीतिक चरित्र का परिचय होता है। आंदोलन के दौरान जिन मांगों पर सहमति दी गई, आज उन्हीं से मुंह मोड़ा जा रहा है।
अगर समझौते लागू करने का इरादा नहीं था, तो जनता को झूठे आश्वासन क्यों दिए गए? जनता की याददाश्त कमजोर नहीं है और वादाखिलाफी का जवाब लोकतंत्र में जनता ही देती है।
आज नागौर पुलिस ने बजरी माफियाओं के खिलाफ आंदोलन कर रहे जिन निर्दोष लोगों को हिरासत में लिया है, उन्हें तत्काल रिहा करें। अन्यथा हम ऐसी कार्रवाइयों से डरने वाले नहीं हैं। हम पूरी मजबूती से सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ बड़ा आंदोलन करेंगे।
@RajCMO@PoliceRajasthan
नागौर जिले के रियां बड़ी में बजरी माफियाओं के खिलाफ राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी ने जन-सहयोग से बड़ा आंदोलन किया,प्रशासन ने माफियाओं के दबाव में कोई समझौता करना उचित नहीं समझा तो उसके बाद जयपुर कूच का ऐलान हुआ और हजारों लोग नागौर से अजमेर के मध्य स्थित बाडी घाटी पहुंचे तब सरकार हरकत में आई, मुख्यमंत्री के ACS से दूरभाष पर वार्ता हुई और सीएमओ के निर्देशों पर जिला कलक्टर,जिला पुलिस अधीक्षक,खनन विभाग सहित अन्य विभागों के आला अधिकारी समझौता करने मौके पर पहुंचे। विस्तार से बातचीत के बाद बजरी माफियाओं के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने, माफियाओं के खिलाफ आंदोलित लोगों पर दर्ज मुकदमों में कोई कार्रवाई नहीं करने, गलत रूप से आवंटित लीजों को निरस्त करने सहित कई मुद्दों पर सहमति बनी। मगर आपकी पुलिस ने आज अलसुबह 3-4 बजे रियां क्षेत्र में दर्जनों घरों में महिलाओं और बच्चों को नींद में परेशान किया और जिस तरह हार्डकोर अपराधियों को पकड़ने के लिए छापे मारे जाते हैं, उसी तर्ज पर छापेमारी कर बजरी माफियाओं के खिलाफ आंदोलन करने वाले दो दर्जन से अधिक लोगों और जन-प्रतिनिधियों को गिरफ्तार किया गया। मैं पुलिस की इस कार्रवाई की कड़ी निंदा करता हूं।
मैं राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री @BhajanlalBjp
से पूछना चाहता हूं कि क्या आपकी सरकार में आंदोलन के समय जनता से किए गए वादे और हुए समझौते केवल कागजों तक ही सीमित रह गए हैं ? सरकार के निर्देशों के बाद अधिकारियों द्वारा किए गए वादों से मुकरना जनता के विश्वास के साथ छल है। मुख्यमंत्री जी को याद रखना चाहिए कि आंदोलनकारियों ने भरोसा करके समझौता स्वीकार किया था, बहाने सुनने के लिए नहीं।
चूंकि गृह और खनन विभाग का जिम्मा मुख्यमंत्री के पास है, ऐसे में यदि पुलिस, खनन विभाग और सत्ता में बैठे कई नेता मिलकर अवैध बजरी के कारोबार को बढ़ाने में व्यस्त हैं, तो मुख्यमंत्री ऐसे लोगों के फोन सर्विलांस पर कब लेंगे ?
क्या सरकार का लक्ष्य सिर्फ आंदोलन करने वाले लोगों के इरादों को कुचलने का है ? मैं मुख्यमंत्री जी को स्मरण दिलाना चाहता हूं कि वादा निभाना नेतृत्व की पहचान होती है और वादा तोड़ना राजनीतिक मजबूरी नहीं, बल्कि राजनीतिक चरित्र का परिचय होता है। आंदोलन के दौरान जिन मांगों पर सहमति दी गई, आज उन्हीं से मुंह मोड़ा जा रहा है।
अगर समझौते लागू करने का इरादा नहीं था, तो जनता को झूठे आश्वासन क्यों दिए गए? जनता की याददाश्त कमजोर नहीं है और वादाखिलाफी का जवाब लोकतंत्र में जनता ही देती है।
आज नागौर पुलिस ने बजरी माफियाओं के खिलाफ आंदोलन कर रहे जिन निर्दोष लोगों को हिरासत में लिया है, उन्हें तत्काल रिहा करें। अन्यथा हम ऐसी कार्रवाइयों से डरने वाले नहीं हैं। हम पूरी मजबूती से सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ बड़ा आंदोलन करेंगे।
@RajCMO@PoliceRajasthan
न्याय का आखिरी द्वार
तेरे द्वार पर ऐसे ही लोग नहीं पहुंचते उनको पता है कि यहां अपना दुःख मिटाने वाला या बांटने वाला बैठा है
न्याय योद्धा हनुमान बेनीवाल जी
@hanumanbeniwal
जयपुर में 1100 किलो से अधिक विस्फोटक सामग्री तथा बड़ी मात्रा में अवैध पटाखों का बरामद होना बेहद गंभीर मामला है,आखिर आबादी के बीच इतने बड़े स्तर पर अवैध भंडारण और निर्माण की गतिविधियां लंबे समय तक कैसे चलती रहीं ? यह जयपुर पुलिस कमिश्नरेट पर बड़ा सवालिया निशान है| यदि पुलिस और प्रशासन की नियमित निगरानी प्रभावी होती तो ऐसी स्थिति पैदा नहीं होती। एक चिंगारी से बड़े पैमाने पर जनहानि और संपत्ति का नुकसान हो सकता था। यह केवल कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि आम नागरिकों की सुरक्षा से जुड़ा विषय है।
मेरा राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री @BhajanlalBjp
से प्रश्न है कि 8 मौतों के बाद केवल C.I. और कुछ पुलिस कार्मिकों को हटाकर आपने इतिश्री कर ली मगर पुलिस कमिश्नर और संबंधित DCP की जिम्मेदारी सरकार अभी तक क्यों नहीं तय कर पाई ?
समाचार पत्रों की खबरों से यह स्पष्ट हो गया कि जयपुर में 6 साल से अवैध पटाखा फैक्ट्री चल रही थी, 16 बीघा तालाब भूमि पर बस्ती बस गई, 60% घरों में बारूद का काम होता रहा, और महज 700 मीटर दूर IOCL पाइपलाइन होने के बावजूद जयपुर कमिश्नरेट की नजर नहीं पड़ी ,ऐसे में क्या पुलिस कमिश्नर और अन्य अफसरों की कोई जिम्मेदारी नहीं बनती ? इतने बड़े स्तर पर अवैध गतिविधियां वर्षों तक चलती रहीं, तो जिम्मेदार अधिकारियों ने क्या कार्रवाई की ? किसके संरक्षण में यह सब चलता रहा ?
नागरिकों की जान जोखिम में डालने वाली ऐसी लापरवाही किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है।
राज्य सरकार इस मामले में दोषियों के साथ-साथ जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय करके उनके खिलाफ कार्यवाही करें |
@PMOIndia@AmitShah@RajCMO
अभी जयपुर में चार वर्ष की मासूम बच्ची की हत्या हो जाने,कल टोंक में वृद्ध महिला की निर्मम हत्या करके उसका शव कट्टे में बंद करके फेंक देने के प्रकरण सामने आए |
राजस्थान में अपराधियों का आतंक और सरकार की चुप्पी, दोनों ही चिंताजनक हैं।
प्रदेश में आए दिन हत्या, लूट, गैंगवार, महिलाओं के खिलाफ अपराध और संगठित अपराध की घटनाएँ सामने आ रही हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि अपराधियों में कानून का कोई भय नहीं रह गया है और आमजन खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है।
प्रदेश की जनता राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री @BhajanlalBjp से जानना चाहती है कि आखिर अपराधों पर प्रभावी अंकुश कब लगेगा ?
पुलिस ऐसे मामलों में आरोपियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्यवाही करके अपराधियों को सजा दिलवाने के लिए प्रभावी पैरवी करें |
@RajCMO@PoliceRajasthan@jaipur_police@TonkPolice_