एक और धमाकेदार और सवाल दागते हुए गाना आ गया है दोस्तों..
"स्कूल ठीक करों"
सुनों गांव वालों.....
सुनो देश वालों.......
एक नई मुहिम शुरू हुई है
#स्कूल_ठीक_करों.....
#School_Thik_karo....
आजादी के 80 साल भी आज स्कूलों का स्थिति बहुत खस्ताहाल और बदहाल है।
क्या आप जानते हैं कि देश का एजुकेशन बजट 1.39 लाख करोड़ .
देश में एजुकेशन इंडस्ट्रीज 19 से 20 लाख करोड़ रुपए का है और 2030 तक 27 लाख करोड़ रुपए हो जाएगा।
इसमें सबसे ज्यादा प्राइवेट स्कूलों का बिजनेस है, प्राइवेट स्कूलों का बिजनेस 5 लाख करोड़ रुपए सालाना का है।
मतलब देश के एजुकेशन बजट से चार गुना ज्यादा।
कोचिंग इंडस्ट्रीज मात्र 58 हजार करोड़ रुपए का है।
सरकार कहती हैं कि कोचिंग फ्री करेंगे।
कोचिंग फ्री करने से कुछ नहीं होगा, अगर कुछ करना है तो देश के सारे सरकारी स्कूलों को ठीक किजिए, ताकि बच्चों को फ्री एज्युकेशन मिले विथ क्वालिटी।
देश का सरकारी स्कूल अगर ठीक हो गया ना तो बच्चों कोचिंग जाने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी।
दोस्तों क्या आप नहीं चाहते हैं कि आपके गांव कस्बे गलियों मोहल्ले का बदहाल खस्ताहाल स्कूलों का फोटो खिंचे और अपने सांसद, विधायक और सरकार को टैग करें तथा उसे सोशल मीडिया पर अपलोड करें.
ये मुहिम किसी एक इंसान का नही बल्कि सबका है, अगर प्राइवेट स्कूलों के लूट से बचना है तो इस मुहिम को हमें तेज रफ्तार धार देना होगा।
"स्कूल ठीक करों" आंदोलन में आप भी शामिल हों और इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा रिपोस्ट कर के जन जन तक पहुंचाए।
सुनो आरक्षण विरोधियो
रिजर्वेशन हटा देंगे। भारतीय जनता पार्टी कभी रिजर्वेशन को हटाने वाली नहीं है।
इतना ही नहीं, आप हटाना चाहोगे, तो आपको भारतीय जनता पार्टी हटाने भी नहीं देगी!
यह कमिटमेंट भारतीय जनता पार्टी का है।"
इनका नाम उदित गुप्ता है इन भाई साहब ने बड़े अच्छे से समझाया है कि "आरक्षण" क्यों खत्म नहीं होना चाहिए।
और इसका सॉल्यूशन क्या है।
इनकी ये वीडियो पूरी देखी जानी चाहिए और इनके तर्क सुने जाने चाहिए।
कल जंतर-मंतर पर एक बार फिर इरफ़ान से मुलाक़ात हुई. वो वैसा ही था जैसा पहली बार मिला. जंतर मंतर के बाहर दरी बिछाए आंदोलन पर बैठा था. 20 जुलाई की लाठीचार्ज में पुलिस ने उसपर भी लाठियां भांजी. इरफान बताते हैं कि पुलिस ने उनका सिर पैर में फंसा कर मारा. कुर्ता फट गया. चप्पल खो गए. इरफान के पांव में चप्पल नहीं थे. उसे चप्पल भिजवा दिए हैं. लेकिन इरफान के चहरे पर वो मुस्कान थी जो उसे बाकियों से उसे अलग बनाती है. हर बार इरफान से मिलकर अपनी परेशानियां भूल जाता हूं. सोचता हूं ये इतना परेशान होकर भी मुस्कुराता है और हमारे हिस्से तो भगवान ने फिर भी बहुत कुछ दिया है.
इरफ़ान की कहानी लाचारी की नहीं हिम्मत की है.
अपने संस्थान @thelallantop का बहुत शुक्रगुज़ार हूं कि वो हमें इरफ़ान जैसी कहानियों तक जाने का मौक़ा देते हैं.
#cjp #jantarmantar #lathicharge
सुना जाए इरफान को,
विश्व के पटल पर हम कैसा भारत ले जाना चाहते हैं जहां स्वामी रामकृष्ण परमहंस की सोच हो, जहां राजा राममोहन राय की सोच हो,
अम्बेडकर और गाँधी की सोच हो, भगतसिंह और रामप्रसाद बिस्मिल की सोच हो,
वाकई सच बात है।
21 मिनिटांचा हा व्हिडिओ वेळ काढून नक्की बघा.
इरफान फक्त अंगणवाडीपर्यंत शिकला. त्यानंतरचं त्याचं विद्यापीठ म्हणजे Google, YouTube आणि स्वतःची जिज्ञासा.
त्याच्या बोलण्यातला अभ्यास, समाज-राजकारणाची समज, भाषेवरची पकड आणि कष्टकरी माणसांविषयीची संवेदनशीलता पाहिली की एक गोष्ट स्पष्ट होते—प्रतिभेला महागड्या पदवीची गरज नसते; संधीची गरज असते.
आणि लल्लनटॉपचा पत्रकार रजत पांडे… त्याने घेतलेली ही मुलाखत म्हणजे केवळ प्रश्नोत्तर नाही, तर एका दुर्लक्षित भारताला आवाज देण्याचा प्रयत्न आहे.
देशाच्या झोपडपट्ट्यांमध्ये, छोट्या गावांत आणि दुर्लक्षित वस्त्यांमध्ये असे कितीतरी इरफान आजही आहेत. प्रश्न त्यांच्या क्षमतेचा नाही, तर त्यांना व्यासपीठ मिळतं का याचा आहे.