कवरपुरा में स्कूल नहीं, तबेले में पढ़ रहे हैं बच्चे!- जिनकी जगह है उनकी ज़ुबानी सुनिए !
जिस जगह स्कूल चल रहा है, उसके मालिक ने खुद बताया—“ये तबेला है, इसमें गाय-भैंस बंधती हैं।”
स्कूल की छत की पट्टियां तीन साल से टूटी पड़ी हैं। बार-बार शिकायत के बावजूद मरम्मत नहीं हुई। नतीजा ये कि तीन साल से बच्चे स्कूल की जगह तबेले में पढ़ने को मजबूर हैं।
सवाल सिर्फ टूटी छत का नहीं, सवाल ये है कि तीन साल तक जिम्मेदारों की नजर में बच्चों की पढ़ाई और सुरक्षा क्यों नहीं आई?
जिस जगह मवेशी बांधे जाते थे, वहां बच्चों का भविष्य बांध दिया गया।
राजस्थान के वो धर्म के ठेकेदार जो शिक्षा के ठेकेदार बन रहे है क्या उनके पास इस बात का कोई जवाब है
जिस जगह स्कूल चल रहा है, उसके मालिक ने खुद बताया—“ये तबेला है, इसमें गाय-भैंस बंधती हैं”
स्कूल की छत की पट्टियां तीन साल से टूटी पड़ी हैं। बार-बार शिकायत के बावजूद मरम्मत नहीं हुई। नतीजा ये कि तीन साल से बच्चे स्कूल की जगह तबेले में पढ़ने को मजबूर हैं।
सवाल सिर्फ टूटी छत का नहीं, सवाल ये है कि तीन साल तक जिम्मेदारों की नजर में बच्चों की पढ़ाई और सुरक्षा क्यों नहीं आई?
जिस जगह मवेशी बांधे जाते थे, वहां बच्चों का भविष्य बांध दिया गया।