भारतीय रेलवे ने बेंगलुरु से मैसूर रूट पर चलने वाली टीपू एक्सप्रेस का नाम बदल दिया है। टीपू की वीरता इतिहास में दर्ज हैं। लेकिन जिनके पूर्वज अंग्रेज़ों के मुखबिर रहे हों, वो यह कहां बर्दाश्त करेंगे कि अंग्रेजो के खिलाफ चट्टान की तरह खड़ा रहने वाले महान योद्धा के नाम पर ट्रेन चले।
पता नहीं क्या सोचकर इस मूर्ख @beingarun28 को @BJP4Haryana ने आईटी सेल की ज़िम्मेदारी सौंपी थी। इस मूर्ख को इतना भी मालूम नहीं कि नोबेल पुरुस्कार कोई प्रतियोगिता नहीं है! दूसरा यह कि शांति का नोबेल 'पंचर' जोड़ने वालों को ही मिलता है, जिन्होंने समाज, दुनिया में हुए पंचर जोड़े हों।