बीजेपी महायुति प्रत्याशी हाजी अरफात शेख ने "भारत माता की जय" बोलने से मना कर दिया।
@narendramodi जी ये एंटीनेशनल माना जाएगा या फिर मास्टरस्ट्रोक?
📍 मुंबई
🚨 अशनीर ग्रोवर ने प्राइवेट स्कूलों की मनमानी बेनक़ाब की!
प्राइवेट स्कूल… डिमांड ज़्यादा, सीटें कम - एटीट्यूड आसमान पर।
BJP सरकार से सवाल पूछो
तो बोलते हैं - “पाकिस्तान चले जाओ।”
वैसा ही रवैया स्कूलों का भी हो गया है।
इसी मनमानी पर
कभी केजरीवाल ने लगाम कसी थी। 💥
अभी दिल्ली-NCR में प्रदूषण और खराब वायु गुणवत्ता को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। हालात किसी हेल्थ इमरजेंसी जैसे हैं -लोग साफ हवा के लिए तरस रहे हैं , सामान्य रूप सांस लेना भी मुश्किल हो गया है।
ऐसे समय में, जब सरकार से ठोस समाधान औ�� नीतिगत हस्तक्षेप की उम्मीद थी, एक ऐसा कदम उठाया गया है जो आने वाले समय में दिल्ली-NCR सहित उत्तर भारत के कई हिस्सों के लिए और भी गंभीर पर्यावरणीय संकट खड़ा कर सकता है।
केंद्र सरकार ने अरावली पर्वत श्रृंखला की नई परिभाषा सुप्रीम कोर्ट के सामने रखी और सुप्रीम कोर्ट ने उसे स्वीकार कर लिया है। इस नई परिभाषा के अनुसार, अब केवल वही भू-आकृतियाँ अरावली मानी जाएंगी जो अपने आसपास के भू-भाग से कम से कम 100 ��ीटर ऊँची हों।
समस्या यह है कि इस मानक के तहत अरावली का लगभग 90% हिस्सा अरावली की श्रेणी में आएगा ही नहीं, क्योंकि यह हिमालय जैसी ऊँची पर्वत श्रृंखला नहीं, बल्कि कऱोड़ों वर्षों में क्षरण से बनी बेहद पुरानी लो-राइज पर्वतमाला है -जिसके बहुत कम हिस्सों की ऊँचाई 100 मीटर से अधिक है।
चूंकि नए मानक के बाद इन क्षेत्रों को अरावली नहीं माना जाएगा, इसलिए उन पर पर्यावरण संरक्षण कानून भी लागू नहीं होंगे। इसका सीधा असर यह होगा कि अरावली से जुड़े जंगल, पहाड़ी ढलान, खनन-प्रतिबंधित क्षेत्र और संवेदनशील इको-ज़ोन संरक्षण की कानूनी सुरक्षा से बाहर हो जाएंगे -और फिर बेकाबू खनन, जंगलों की कटाई, निर्माण और अंधाधुंध दोहन का रास्ता खुल जाएगा।
पर्यावरण विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यह फैसला दिल्ली-NCR के लिए बेहद ख़तरनाक हो सकता है, क्योंकि अरावली न केवल रेगिस्तान की गर्म हवाओं और धूल को रोकती है, बल्कि यह पूरे क्षेत्र के लिए भूजल रिचार्ज का बड़ा प्राकृतिक स्रोत भी है। अरावली के सिमटने का मतलब है गंभीर जलवायु संकट।
कुल मिलाकर -यदि यह अंतिम रूप से लागू हो गई, तो पूर्वी गुजरात से लेकर हरियाणा तक लगभग 700 किलोमीटर में फैली दुनिया की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखला के अस्तित्व पर संकट है ।
हवा, जंगल, पहाड़, जल स्रोत और जैव-विविधता हमारे जीवन और भविष्य की बुनियाद हैं। हम विकास के नाम पर इन्हें खोने का जोखिम उठा रहे हैं, जबकि इनके बिना विकास का अर्थ ही शून्य रह जाएगा।
A security official Collapsed during the Speech of JP Nadda
Nadda didn’t stop, continued his speech.
Please note, he is the healthcare minister of India
Shame!
Rohit Sharma's wife Ritika Sajdeh is now crying about stray dogs and has written a nice paragraph for them.
She never spoke about people who died because of rabies. She never spoke about kids who were killed by these stray dogs.
She spoke about Rafah. But she never spoke about Bangladeshi Hindus.
How do these people are so selective in their outrage? It is beyond my understanding.
Perhaps the most phony, double-faced person on Twitter.
She used to go all guns blazing against stray dogs, calling them a “death threat to ordinary people,” but the moment she realised Congress was politicising it against the BJP, she flipped to preaching love and coexistence.
आवारा कुत्तों को बचाने के लिए जो सड़क पर बिल्लियां कैंडल लेकर घूम रही हैं , उनसे मेरा सवाल है , जब ऐसे छोटे बच्चों पर ये खूंखार कुत्ते झपटते हैं , तो तुम्हारी कैंडल बुझ क्यों जाती है?
🚨 Every Indian Deserves Roads Free of
• Beggars
• Potholes
• Stray Animals
• Bangladeshis
• E-Rickshaws
• Illegal Encroachments
• Outdated Polluting Vehicles
Hope To See This in The Next Few Years
भारत में अधिकांश लोग पशु प्रेमी हैं -और यह प्रेम इंस्टाग्राम के क्यूट ऐनिमल वीडियो के चलन से बहुत पहले से रहा है। चूंकि भारतीय समाज लंबे समय तक ग्रामीण और कृषक समाज रहा है, इसलिए पशुओं और पक्षियों के साथ उसका रिश्ता सिर्फ सहानुभूति का नहीं, बल्कि सहच��्य का रहा है। इसमें गौधन से लेकर घोड़े, हाथी, बकरी जैसे पशु और कुत्ते भी शामिल हैं।
लेकिन हाल के वर्षों में एक शहरी वर्ग उभरा है, जिसे लगता है कि वही असली dog lovers है और बाकी सभी dog haters हैं। यह उनकी सबसे बड़ी गलतफहमी हैं। बाकी लोग भी कुत्तों से प्रेम करते हैं, लेकिन इतना नहीं कि कुत्तों के काटने की समस्या, जो अब महामारी का रूप ले चुकी है, को नजरअंदाज कर दें।
केंद्रीय मंत्री एस.पी. सिंह बघेल द्वारा 22 जुलाई को संसद में साझा किए गए आंकड़ों क�� अनुसार, पिछले वर्ष देश में लगभग 37 लाख कुत्ते के काटने के मामले दर्ज हुए, जबकि रेबीज़ की वजह से 54 लोगों की मौत हो गई। ये आंकड़े समस्या की गंभीरता को खुद बयान करते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसला दिया उसका dog lovers विरोध कर रहे हैं, उन्हें पहले ही सामूहिक प्रयास करने चाहिए थे जैसे नसबंदी, टीकाकरण और शेल्टर मैनेजमेंट- ताकि यह स्थिति ही पैदा न होती।
साहब कभी शिक्षा पर बोलिये
New education policy कब लागू हो पायेगी?
Skill learning- innovation कब basic education का हिस्सा होगा या बस man power create होंगी और graduation के बाद कह दिया जायेगा कि ���पके पास skill क्या है?
Now she is Crossing her limits, unnecessarily dragging Bhagwan Krishna and doing blasphemy.
I Challenge Disha Patani's sister to have a debate with me and prove where Bhagwan Krishna did wrong.