@JharkhandCMO@HemantSorenJMM झारखंड सहायक पुलिस के बारे में सोचने के लिए धन्यवाद @JharkhandCMO and @HemantSorenJMM लेकिन सेवा विस्तार के साथ ही हमलोग का वेतन बढ़ोतरी होना चाहिए क्योंकि 13000 में अभी का महंगाई में जीवन चलना बहुत कठीन है।
माननीय मुख्यमंत्री @HemantSorenJMM झारखंड सहायक पुलिस कार्यकाल समाप्त होने वाला है कृपया सहायक पुलिस के बारे में ठोस निर्णय लीजिए ताकि हम सहायक पुलिस भी समान जनक जिंदगी जी सकें। कृपया सहायक पुलिस के मांगों पर विचार करते हुए सहायक पुलिस को स्थाई करने की कृपा करें।
कहानी: “माटी का वादा”
झारखंड के एक छोटे से गाँव में आदिवासी परिवार का बेटा मनोज था। उसका सपना था—खाकी पहनकर अपने गाँव की रक्षा करना। पिता खेतों में मजदूरी करते, माँ जंगल से लकड़ी लाती, ताकि मनोज पढ़ सके और अपने लोगों का सहारा बन सके।
किस्मत ने साथ दिया, और मनोज सहायक पुलिस में भर्ती हो गया। तनख्वाह कम थी, लेकिन उसे लगा—
"सेवा में गर्व है, पैसों में नहीं।"
लेकिन हकीकत उससे अलग थी। महीनों तक मनोज और उसके साथी नक्सल इलाकों में ड्यूटी देते, शहरों में धूप हो या बारिश हो तभी भी डियुटी करते,पसीना ही नहीं कभी-कभी खून भी बहता। फिर भी उन्हें सिर्फ "तेरह हज़ार रुपये मिलते।"
उधर राजधानी तथा अन्य क्षेत्रों में मुख्यमंत्री जी मंच से बार-बार कहते—
मैं अपनी माटी, अपने आदिवासियों का बेटा हूँ।
लेकिन जब उसी माटी के बेटे का हक मार लिया जाता, अधिकारियों के अन्याय से उसका मनोबल टूटता, तब मुख्यमंत्री जी खामोश रहते।
गाँव के लोग पूछते—
जब मुख्यमंत्री जी खुद को माटी का बेटा कहते हैं, तो क्या माटी के बेटों का दर्द सुनना उनका फर्ज़ नहीं?
मनोज ने उस दिन ड्यूटी पर खड़े-खड़े सोचा—
शायद हम इस माटी के बेटे हैं, लेकिन सरकार के लिए हम बस एक सस्ती ताकत हैं, जो चुपचाप जान दे भी दे, तो भी वे समझते हैं कि हमको ज्यादा दे रहे हैं।
और उस दिन मनोज की आँखों में सिर्फ़ गुस्सा नहीं, बल्कि अपने ही माटी के नेताओं से टूटा हुआ भरोसा भी था।
यही हकीकत है माननीय। कि आपलोग को लगता है कि हम सहायक पुलिस को 13000 ज्यादा दे दे रहे हैं। आज हमारे गांव में एक मजदूर को भी हमसे (433रू) से कहीं ज्यादा मिलता है। झारखंड के आम जनमानस से भी पुछ लिजीए की क्या एक सहायक पुलिस का पारिश्रमिक 13000 देना सही है या नहीं।
@HemantSorenJMM@JMMKalpanaSoren@Supriyo__JMM@JharkhandCMO@JharkhandPolice@JmmJharkhand@RajeshThakurINC@KRajuINC@RahulGandhi@yadavtejashwi@DipikaPS@kumarsudivya@chamralindaJMM@hafizulhasan001@IrfanAnsariMLA@ShilpiNehaTirki@bandhutirkeymla@deepakbiruajmm
#jharkhand_sahayak_police
कहानी: “माटी का वादा”
झारखंड के एक छोटे से गाँव में आदिवासी परिवार का बेटा मनोज था। उसका सपना था—खाकी पहनकर अपने गाँव की रक्षा करना। पिता खेतों में मजदूरी करते, माँ जंगल से लकड़ी लाती, ताकि मनोज पढ़ सके और अपने लोगों का सहारा बन सके।
किस्मत ने साथ दिया, और मनोज सहायक पुलिस में भर्ती हो गया। तनख्वाह कम थी, लेकिन उसे लगा—
"सेवा में गर्व है, पैसों में नहीं।"
लेकिन हकीकत उससे अलग थी। महीनों तक मनोज और उसके साथी नक्सल इलाकों में ड्यूटी देते, शहरों में धूप हो या बारिश हो तभी भी डियुटी करते,पसीना ही नहीं कभी-कभी खून भी बहता। फिर भी उन्हें सिर्फ "तेरह हज़ार रुपये मिलते।"
उधर राजधानी तथा अन्य क्षेत्रों में मुख्यमंत्री जी मंच से बार-बार कहते—
मैं अपनी माटी, अपने आदिवासियों का बेटा हूँ।
लेकिन जब उसी माटी के बेटे का हक मार लिया जाता, अधिकारियों के अन्याय से उसका मनोबल टूटता, तब मुख्यमंत्री जी खामोश रहते।
गाँव के लोग पूछते—
जब मुख्यमंत्री जी खुद को माटी का बेटा कहते हैं, तो क्या माटी के बेटों का दर्द सुनना उनका फर्ज़ नहीं?
मनोज ने उस दिन ड्यूटी पर खड़े-खड़े सोचा—
शायद हम इस माटी के बेटे हैं, लेकिन सरकार के लिए हम बस एक सस्ती ताकत हैं, जो चुपचाप जान दे भी दे, तो भी वे समझते हैं कि हमको ज्यादा दे रहे हैं।
और उस दिन मनोज की आँखों में सिर्फ़ गुस्सा नहीं, बल्कि अपने ही माटी के नेताओं से टूटा हुआ भरोसा भी था।
यही हकीकत है माननीय। कि आपलोग को लगता है कि हम सहायक पुलिस को 13000 ज्यादा दे दे रहे हैं। आज हमारे गांव में एक मजदूर को भी हमसे (433रू) से कहीं ज्यादा मिलता है। झारखंड के आम जनमानस से भी पुछ लिजीए की क्या एक सहायक पुलिस का पारिश्रमिक 13000 देना सही है या नहीं।
@HemantSorenJMM@JMMKalpanaSoren@Supriyo__JMM@JharkhandCMO@JharkhandPolice@JmmJharkhand@RajeshThakurINC@KRajuINC@RahulGandhi@yadavtejashwi@DipikaPS@kumarsudivya@chamralindaJMM@hafizulhasan001@IrfanAnsariMLA@ShilpiNehaTirki@bandhutirkeymla@deepakbiruajmm
#jharkhand_sahayak_police
माननीय मुख्यमंत्री श्री @HemantSorenJMM जी मुझे याद है सहायक पुलिस को लेकर विधानसभा में हमलोग ने कितनी लंबी लड़ाई लड़ी थी, उस वक्त आपने कहा था की इनका समायोजन पुलिस में कर लिया जाएगा परंतु एक साल से ऊपर हो गया सहायक पुलिस का ना समायोजन हुआ ना ही मानदेय में आपकी सरकार ने सम्मानजनक बढ़ोतरी किया उल्टा उनका अनुबंध समाप्त करने की धमकी दी जा रही है ..
मैं आग्रह करूँगा की यह सहायक पुलिस के बदौलत जो आज थोड़ा बहुत क़ानून व्यवस्था बचा है उस पर सहानुभूति पूर्वक विचार करें ..
@BJP4Jharkhand@yourBabulal
माननीय मुख्यमंत्री @HemantSorenJMM महोदय झारखंड सहायक पुलिस का कार्यकाल माह अगस्त में समाप्त होने वाली है जिससे हम सभी सहायक पुलिस अपने भविष्य को लेकर काफी चिंतित हैं साथ ही झारखंड पुलिस 8 साल सेवा दे चुके हैं और अभी भी हमलोग को मानदेय के रूप में एकमुश्त 13000 रुपया मिलता है जो
महंगाई के हिसाब से बहुत कम है। महोदय 13000 रुपया में यात्रा खर्चा और अन्य जिला में ड्यूटी जाने के दौरान जो खर्चा होता उसी 13000 रुपए में वहन करना पड़ता है तथा उसी 13000 हजार में परिवार चलना काफी मुश्किल है।
आपसे विनम्र निवेदन है कृपया सहायक पुलिस की समस्या का निदान करें
माननीय मुख्यमंत्री @HemantSorenJMM महोदय,
आज समस्त सहायक पुलिस को आपसे उम्मीद है कि वेतन विसंगति को दूर करते हम सभी के समस्या का निराकरण करें। क्योंकि आज इस मंहगाई के दौर में इतने कम वेतन पर पुलिस का डियुटी कर घर परिवार चलाना असमर्थ हैं। सभी सहायक पुलिस मानसिक तनाव से गुजर रहे है
@DCGumla@chamralindaJMM@BhushanTirky@HemantSorenJMM
ये देखिए चौकीदार बहाली में गुमला डीसी का झोल! वेकेंसी निकाला बीट क्षेत्र से और कट ऑफ रिजल्ट बनाया पूरे जिला से जब यही करना था तो पूरे जिला में बहाली क्यों नहि निकाला जिला के यूवा विरोध में उतर चुके है तानाशाह नही चलेगा
@DCGumla@JharkhandCMO चौकीदार बहाली को पूर्णतः शांति और निष्पक्षता के साथ बहाली करने के लिए बहुत बहुत आभार @DCGumla महोदय। लेकिन रिजल्ट किस प्रकार निकला जाएगा इसमें संचय बना हुआ है उम्मीद है जैसे बिट अनुसार बहाली निकला गया था वैसे ही बिट अनुसार ही मैरिट जारी होगा।
माननीय मुख्यमंत्री श्री @HemantSorenJMM जी सहायक पुलिस पिछले 50 दिनों से रांची में हैं हम सभी झारखंड के आदिवासी मूल निवासी हैं दिनांक 22-07-2024 को जो सहमति बनी थी उसको आगामी कैबिनेट में लाया जाए। इसके लिए हम सहायक पुलिस आपका आभारी रहेंगे।
माननीय मुख्यमंत्री श्री @HemantSorenJMM जी सहायक पुलिस और सरकार के बीच जो सहमति बनी है उसको आगामी कैबिनेट में लाया जाए। इसके लिए हम सहायक पुलिस आपका हमेशा आभारी रहेंगे।
मैं भारत के सभी युवाओं से यही कहूंगा इस भ्रम में मत रहना कि राहुल गांधी या कांग्रेस तुम्हारे हितैषी है।
युवाओं का जितना शोषण कांग्रेस ने किया है उतना शोषण किसी ने भी नहीं किया
आज राहुल गांधी यह जो मजदूर युवाओं शोषण अग्निवीर की बड़ी-बड़ी बातें कर रहे हैं उनकी खुद की झारखंड सरकार ने 15000 से ज्यादा युवाओं को जिसमें ज्यादातर आदिवासी है उनका शोषण नहीं दिखता ??
पूरे झारखंड में पुलिस सहायक आंदोलन पर है लेकिन राहुल गांधी को इन युवाओं का युवकों की पीड़ा क्यों नहीं दिख रही?
ये पलामू जिला की महिला सहायक पुलिसकर्मी हैं। 8 महीने की गर्भवती हैं। पिछले 15 दिनों से रांची के मोरहाबादी मैदान में आंदोलन पर हैं। नक्सल इलाके में नियुक्त इन सहायक पुलिसकर्मियों की मांग है कि इनका समायोजन किया जाए। 2017 में इनकी नियुक्ति 10 हज़ार रुपये के मानदेय पर हुई थी। अब तक इन्हें सिर्फ 10 हज़ार रुपये ही मिलते हैं इसके अलावे कोई सरकारी सुविधा नहीं मिलती।
झारखंड में पुलिसकर्मियों की भारी कमी है। ऐसे में सभी राजनीतिक दुर्भावना को त्यागकर मुख्यमंत्री @HemantSorenJMM जी को अब इनके बारे में सोचना चाहिए। हर साल इन्हें आंदोलन करना पड़ता है। ये पिछले 7 साल में अपने काम में दक्ष्य हो चुके हैं। अब बस सिर्फ हथियार की ट्रेनिंग लेनी बाकी है।