ये मंज़र सियासी ख़तरनाक है ,
कि सारी फिज़ा ही ख़तरनाक है ।
मेरे ऐब को भी बताएं हुनर ,
मेरे यार तू भी ख़तरनाक है।
बुरे लोग दुनिया का खतरा नहीं ,
शरीफ़ों की चुप्पी ख़तरनाक है।
पवन दीक्षित
ये मंज़र सियासी ख़तरनाक है ,
कि सारी फिज़ा ही ख़तरनाक है ।
मेरे ऐब को भी बताएं हुनर ,
मेरे यार तू भी ख़तरनाक है।
बुरे लोग दुनिया का खतरा नहीं ,
शरीफ़ों की चुप्पी ख़तरनाक है।
पवन दीक्षित
#Modiact#UGCRollBack#Aarakshan#shayari
मुझे पीएम के जन्मदिवस से समस्या नहीं है। मेरी समस्या तरीके से है। जो व्यक्ति सत्ता में आते ही दिखास और छपास पर नेताओं को समझाया करता था, आज उसकी चाटुकारिता में हर भाजपा सरकार, हर विभाग/मंत्रालय ओवर द टॉप उत्सवधर्मिता में डूबने को व्याकुल है। क्या यह दोगलापन नहीं है?
मोदी का जन्मदिवस उनके जीते-जी सरकारी खर्चे पर कैसे मनाया जा सकता है? उज्जैन के 58 लाख दीपों का व्यय भाजपा वहन करेगी या मध्यप्रदेश सरकार? दिल्ली के सवा लाख दीपकों का व्यय रेखा गुप्ता के व्यक्तिगत लॉकर से जाएगा या दिल्ली सरकार के फंड से?
मोदी का जन्मोत्सव एक व्यक्तिगत विषय है और उसका उत्सव पार्टी मना सकती है, सरकार नहीं। सरकार तब मनाएगी, जब वो सेवानिवृत्त हो चुके होंगे और जनता को लगेगा कि कुछ कर के गए हैं। संभवतः, राष्ट्रीय अवकाश हो जाए उस दिन, ‘सेवा दिवस’ मने और ड्राय डे रहे।
उनकी छवि नोटों पर आ जाए और… जो भी है, आप समझ गए होंगे। जीवित रहते ऐसा करना बिलकुल वही कार्य है जैसे गाँव में कुछ बुजुर्ग अपने जीवनकाल में ही मृत्युभोज करवा लेते हैं। उन्हें विश्वास रहता है कि उनके मरने पर नकारे लोग जमीन हथिया लेंगे, और भरगामा की जगह भैयारी भोज कर देंगे।
भाजपा मुख्यालय को दीपों से नहला दीजिए। हर भाजपा कार्यकर्ता कलशयात्रा निकाले। हर राज्य मुख्यालय में चायनीज झालड़ बँधे। महीने भर आयोजन हो। भोज और उत्सव हो। लोग उपवास और रोजे रखें। किसी को कोई समस्या नहीं होगी। पर स्कूलों में बच्चों को बुला कर दीये जलवाना, चित्रकारी, भाषण आदि, वह भी एक महीने तक!
बिहार में बाढ़ है और हमारे महान मुख्यमंत्री दीये जलवा रहे हैं! कर्ज में डूबे राज्य दीपकों का गिनीज रिकॉर्ड्स बनवा रहे हैं! और इन सबके मध्य मोदी जी की आत्मा धिक्कारती नहीं कि हे महामानव, ये तू क्यों करवा रहा है? रोक क्यों नहीं रहा अपने नाम पर हो रहे इस बकवास को?
सरकारी खर्च पर यह भौंडापन अस्वीकार्य है। मोदी ने देश के लिए बहुत कुछ किया है, क्योंकि वही कार्य होता है प्रधानमंत्री का। हमने अच्छी बातों की सराहना की है, और बुरी की आलोचना करते रहेंगे।
यह आत्ममुग्धता असुरक्षा की भावना और विश्वास की कमी के कारण बढ़ती जा रही है। आपका कार्य ही आपकी डिग्री, पहचान और पीआर होना चाहिए। इसके लिए कुछ भी अतिरिक्त करना, स्वयं के अच्छे कार्यों में कॉन्फ़िडेंस खोने जैसा है।
ब्रांड मोदी को मोदी के इनर सर्कल के मूर्खों ने जितना डाल्यूट किया है, वह एक केस स्टडी बनेगा।
खैर जो भी हो, आप शतायु हों। आप सत्ता में होने के कीर्तिमान बनाएँ। विहग, बंदी और चारण, आपका कीर्ति गायन करें। आपको भारत रत्न दिया जाए। आपके सम्मान में लोग स्वतः दीपक प्रज्वलित करें, आपको टैक्सपेयर के पैसों पर अम्बानी के स्तर का पीआर न करना पड़े, यही मेरी कामना है।