इंदौर: रोते हुए राजपूत समाज की बेटी ने लगाई मदद की गुहार
तनिष्का ठाकुर ने आरोप लगाया कि दबंगों ने पुलिस के सामने उन्हें धमकाया और महिला पुलिसकर्मी ने भी उनके साथ मारपीट की पिता के निधन के बाद परेशान बेटी ने रोते हुए कहा क्या समाज का कोई भी आदमी हमारी मदद नही करेगा?”
"यदि राम केवल नारों में रहेंगे और मर्यादा व्यवहार से गायब रहेगी, तो मंदिरों में ताले बढ़ते चले जाएंगे" 💯🔥💯🔥
राम मंदिर में चोरी के मुद्दे पर शेखर सुमन के ये 3 मिनट एकदम लाजवाब है। 🫡🫡
और अंत में जय श्री राम तो बहुत ही गजब। 🚩💯🔥🔥
इसको ये नहीं समझ आ रहा है कि ट्विटर पे पूरी दुनिया है,
और दिल्ली की यमुना पे सबकी नज़र रहती है।
बेज्जती होती है यार! मत बनाया करो वीडियो!! https://t.co/Tuw2SfCPb9
'अगर कोई रिश्वत मांगे, तो बस कह देना कि आप रिश्वत नहीं देंगे और मेरा नाम ले लेना. सीधे उस अधिकारी का नाम मुझे बता देना. उसके बाद का मैं देख लूंगा…'
- 'थलापति' विजय, सीएम, तमिलनाडु
दुनिया के बड़े बड़े वैज्ञानिक बनारस रेल्वे स्टेशन की ये टेक्नोलॉजी देख कर परेशान हैं,
और भारत के सामने हाँथ फैला के टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की भीख मांग रहे
छुट्टी का अर्थ क्या है?
विदेश यात्राएँ भी, मंदिर दर्शन भी, लक्षद्वीप के समुद्र तट भी देखे गए, समुद्र के भीतर की तस्वीरें भी आईं।
अगर विदेश यात्रा, धार्मिक यात्रा, समुद्र तट पर जाना, प्रकृति के बीच समय बिताना, अच्छा भोजन करना और आराम करना भी छुट्टी नहीं है,
तो फिर मुझे लगता है इस देश में कोई भी छुट्टी नहीं ले रहा।
हर आदमी काम ही कर रहा है - कोई मनाली में काम कर रहा है, कोई गोवा में, कोई परिवार के साथ, कोई दोस्तों के साथ।
2014 से 2026 के बीच प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं पर सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च हुए। असली बहस यह है कि इन दौरों से भारत को कितना निवेश मिला, कितने रोजगार बने और व्यापार हितों को कितना लाभ हुआ?
देश का आम आदमी नहीं देखता कि नेता ने कितने घंटे काम किया, वह देखता है कि उसके जीवन में क्या बदला।
जिस युवा का पेपर लीक हो गया, जिस किसान को फसल का दाम नहीं मिला, जिस मरीज को अस्पताल में बेड नहीं मिला, जिस परिवार की नौकरी चली गई - उसे 18 घंटे और 20 घंटे के से क्या फर्क पड़ता है?
18 घंटे काम करने का काम का परिणाम क्या निकला? शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, न्याय और नागरिक सुरक्षा के मोर्चे पर देश कहाँ पहुँचा।
युवा पूछ रहा है कि डिग्री के बाद नौकरी कब मिलेगी?
आम आदमी भी अपनी नौकरी में भी 12-14 घंटे खटता है, मजदूर धूप में पूरा दिन काम करता है, किसान बिना रविवार के खेत में उतरता है।
सवाल यह नहीं कि किसने कितने घंटे काम किया। सवाल यह है कि उस काम का परिणाम क्या निकला।
अगर काम का पैमाना सिर्फ घंटे हैं, तो इस देश का सबसे बड़ा कर्मयोगी शायद वह मजदूर है जो रोज़ दो वक्त की रोटी के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक देता है।
माननीय न्यायालय में आज हुई सुनवाई के दौरान Anjana & ANR. case में कोई interim relief प्रदान नहीं की गई। मामले की अगली सुनवाई 17 जून को निर्धारित है।
हम न्यायिक प्रक्रिया का पूरा सम्मान करते हैं और न्यायालय के समक्ष अपना विस्तृत reply प्रस्तुत करेंगे। आवश्यक हुआ तो उपलब्ध तथ्यों और कानूनी सलाह के आधार पर अपने अधिकारों के संरक्षण हेतु उपयुक्त विधिक कदमों तथा Counter Claim पर भी विचार करेंगे।
हमें न्यायपालिका पर विश्वास है और हम अपना पक्ष न्यायालय के समक्ष ही रखेंगे।
फाइनली अवध ओझा सर भी अब आ ही गए हैं । जितनी शालीनता से इन्होंने अपनी बात अंजना ओम कश्यप से लेकर हर नेता पीएम तक और टीचर्स के लिए कही सच में कबीले तारीफ़ है । 9 मिनिट की वीडियो है तो आप टाइम निकाल कर देखे । आँखे खुल जायेंगी।
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शिक्षकों के सम्मान में बबीता मैडम भी आ गई मैदान में..
उन्होंने जबरदस्त ढंग से अंजना को रेलते हुए कहा कि अगर अंजना टीचरों को कह रही है कि टीचर दो कौड़ी की है तो अंजना खुद फूटी कौड़ी की ठहरी..!
एक कॉकरोच नितिन गडकरी जी सवाल कर रहा है ,
मुझे पूरा भरोसा है नितिन गडकरी जी जवाब देंगे ,
अब हर कोई सवाल करेगा जवाब ना देकर कांग्रेस की गलती बताना भूल जाइए।