कल हाथरस में उ. प्र. की पूर्व मुख्यमंत्री आयरन लेडी परम आदरणीय बहन कुमारी मायावती जी के राजनैतिक उत्तराधिकारी बसपा के राष्ट्रीय कोर्डिनेटर माननीय @AnandAkash_BSP जी से खूबसूरत यादगार मुलाकात की और साथ में तस्वीर भेट की 💙🙏🙏🙏
1.जैसाकि यह विदित है कि पिछले कुछ दिनों से देश के विभिन्न भागो में भारी वर्षा व आँधी, तूफान आदि के कारण जनता काफी मुश्किल दौर से गुजर रही है। ऐसे कुदरती विकट हालात में सम्बन्धित सभी राज्य सरकारों को प्रभावित लोगों की हर स्तर पर पूरी-पूरी मदद करनी चाहिये। बी.एस.पी. की यह मांग है।
2.इसके साथ ही महाराष्ट्र राज्य के काफी इलाको में सूखे की मार झेल रहें लोगों व खासकर किसानों के प्रति राज्य सरकार को केवल औपचारिकता नहीं बल्कि पीडि़तों की जमीनी स्तर पर सही से मदद करके किसानों को फौरी राहत देने का प्रयास करना चाहिये।
3.इसी परिपेक्ष्य में यहाँ मैं यह भी कहना चाहूँगी कि देश में बी.एस.पी. संगठन को तैयार करने व सर्वसमाज में पार्टी के जनाधार को बढ़ाने के लिए अब पार्टी संगठन को तीन सेक्टरों में बांट दिया गया है।
*जिसके तहत सेक्टर नं.-1 में 10 राज्य आते है। जिनको बी.एस.पी. राज्यसभा सांसद श्री रामजी गौतम व श्री सुरेश राव ये दोनों केन्द्रीय सेक्टर प्रभारी मिलकर यहाँ पार्टी के सभी कार्य देख रहें हैं।
*सेक्टर नं.-2 में 9 राज्य आते है। जिनको पार्टी के पूर्व राज्यसभा सांसद श्री राजाराम व पूर्व विधायक श्री अतरसिंह राव ये दोनों केन्द्रीय सेक्टर प्रभारी मिलकर यहाँ पार्टी के सभी कार्य देख रहें हैं।
*सेक्टर नं.-3 में उत्तर प्रदेश व उत्तराखण्ड प्रदेश आते है जिनको लखनऊ पार्टी केन्द्रीय कैम्प कार्यालय 9 माॅल एवेन्यू द्वारा सीधा देखा जा रहा है।
4.ऐसे में लोगों के कुदरती मार पड़ने से खासकर सेक्टर नं.-1 व सेक्टर नं.-2 के इन चारों केन्द्रीय सेक्टर प्रभारियों से यह अपील की जाती है कि वे अपने-अपने सेक्टर के अन्तर्गत आने वाले सभी राज्यों में,
*जहाँ-जहाँ भारी वर्षा व तूफान आदि के कारण जबरदस्त जानी, माली, तबाई मची हुई है, वहाँ अपनी पार्टी के लोग भी अपनी सामर्थ के हिसाब से उनकी मदद जरुर करें।
*लेकिन इसके लिए इनको कोई भी अलग से धन इकट्ठा नहीं करना है। ताकि इसकी आड़ में कोई भी नाजायज फायदा ना उठा सके।
5.साथ ही जरुरत पड़ने पर ज्यादा प्रभावित प्रदेशों में, मैं बी.एस.पी. के राष्ट्रीय प्रभारी श्री ईशान आनन्द को भी भेज सकती हूँ। और इस मामले में खासकर सेक्टर नं.-3 के दोनों राज्यों में मेरी खुद भी पैनी नजर है। जहाँ मैं खुद भी ऐसे क्षेत्रों का दौरा कर सकती हूँ।
6.अन्त में मेरा केन्द्र सरकार से भी अनुरोध है कि वे देश के ज्यादा प्रभावित हो रहे राज्यों में, वहाँ कि सरकारों की समय से पूरी-पूरी मदद जरुर करें, जो यह उचित होगा।
1. उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा अगले छह महीने में (अर्थात विधानसभा आमचुनाव तक) एक लाख युवाओं को सरकारी नौकरी देने की घोषणा हालाँकि विलम्ब से उठाया गया सही किन्तु चुनावी क़दम ज़्यादा लगता है, फिर भी वे नियुक्तियाँ पेपरलीक व भ्रष्टाचार आदि के अभिशाप से मुक्त समय से पूरा हो जायें तो यह सही होगा ताकि यह चुनावी छलावा ना साबित हों, जबकि इसके साथ ही एससी, एसटी व ओबीसी समाज के आरक्षित पदों के बैकलाग पर भर्तियों के बारे में भी सरकारी घोषणा की लोगों को उत्सुकता से प्रतीक्षा है।
2. इतना ही नहीं बल्कि यहाँ 69,000 शिक्षक भर्ती में आरक्षण के नियमों को लेकर इन वर्गों के 6,800 अभ्यार्थी अपनी नियुक्ति के लिये भूखे-प्यासे लगातार आन्दोलनरत हैं, उनके बारे में भी सरकार को पूरी सहानुभूतिपूर्वक ज़रूर सोचना चाहिये, क्योंकि उन्हें वास्तविक राहत सरकार ही दे सकती है।
3. इसके साथ ही, बी.एस.पी. यूपी सहित पूरे देश भर में स्कूली शिक्षा की बदहाल व्यवस्था को समुचित तौर पर बेहतर बनाने की माँग लगातार करती रहती है, किन्तु संभवतः ’जेन-जी’ व ’जेन-अल्फा’ के दबाव में जो थोड़ी अनचाही हलचल सरकारी स्तर पर देखने को मिल रही है वह मामूली ही सही परन्तु स्कूली शिक्षा में सुधार करने की सही नीयत से हो तो यह उचित होगा और इस क्रम में यहाँ लगभग 30 हज़ार जो सरकारी स्कूल बंद कर दिये गये हैं उन्हें दोबारा अच्छे तरीके से सक्रिय करने की व्यवस्था सरकार अविलम्ब करे तो यह भी जनहित में होगा।
4. इसके अलावा, बुजुर्ग महिलाओं को बसों में निशुल्क यात्रा आदि की व्यवस्था से कहीं अधिक महिलाओं को हर क्षेत्र में शोषण, अत्याचार, उत्पीड़न आदि से बचाने के साथ ही महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान व आत्मनिर्भरता के बारे में भी सरकारों को सही नीयत व नीति से कार्य करने की ज़रूरत है।
1. जैसाकि सर्वविदित है कि समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख द्वारा अपनी पुरानी सहयोगी पार्टी राष्ट्रीय लोकदल व उस पार्टी के नेता केन्द्रीय मंत्री के बारे में यह सार्वजनिक बयान देना कि ’हमने इनको चवन्नी से रुपया बना दिया है’, यह कहना पूर्णतः अमर्यादित, अशोभनीय व अति-शर्मनाक है तथा इस प्रकार की अहंकारी व अलोकतांत्रिक बयानबाज़ी के लिये उन्हें उस पार्टी से व उनके नेता से ही नहीं बल्कि स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह जी के परिवार का अपमान करने हेतु पूरे जाट समाज से भी अविलम्ब माफी माँगनी चाहिये तो यह उचित होगा।
2. वैसे देश की राजनीति में सपा का चाल, चरित्र व चेहरा अपने विरोधी पार्टियों के लिये ही नहीं बल्कि अपने सहयोगियों के लिये भी हमेशा से राजनीतिक संकीर्णता व जातिवादी द्वेष आदि से ग्रसित ज़्यादातर अप्रिय और अविश्वसनीय ही रहा है, जिस कारण इसका राजनीतिक एवं चुनावी लाभ भी अक्सर मौक़ों पर भाजपा ही उठाती रही है और सेक्युलर ताक़तें कमज़ोर होती रहीं हैं।
3. इस पार्टी के इसी प्रकार के अति-अहंकारी स्वाभाव के कारण पहले सन् 1993 में, यू.पी. में श्री मुलायम सिंह यादव के साथ सपा व बसपा का बना गठबन्धन जल्दी ही टूट गया, जिसके फलस्वरूप दिनांक 2 जून 1995 को मेरी हत्या करने के षडयन्त्र के तहत् मेरे विरुद्ध कुख्यात लखनऊ स्टेट गेस्ट हाऊस काण्ड हुआ।
और फिर आगे चलकर इनके बेटे श्री अखिलेश यादव द्वारा, इनके पिता की तरह पुरानी ग़लतियों को फिर से ना दोहराने का आश्वासन देते हुये, लोकसभा का चुनावी गठबन्धन हुआ जो चुनाव का नतीजा इनके अनुरुप ना आने की वजह से कुछ समय के बाद ही बी.एस.पी. के प्रति इनके अहंकारी व स्वार्थी आदि रवैये के कारण फिर यह गठबन्धन भी टूट गया, क्योंकि परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के आत्म-सम्मान व स्वाभिमान के कारवाँ वाली पार्टी बी.एस.पी. व उसकी नेतृत्व ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ की सर्वसमाज हितैषी अम्बेडकरवादी नीतियों व सिद्धान्तों से कदापि विमुख नहीं हो सकती है।
4. अब संक्षेप में यही कहना है कि यह पार्टी (सपा) गठबन्धन के मामले में केवल अपना काम निकालना जानती है और अपना काम निकलते ही फिर यह पार्टी गिरगिट की तरह अपना रंग बदल लेती है तथा दूसरी पार्टी के बारे में अनाप-शनाप भाषा का भी ख़ूब इस्तेमाल करती रहती है, जो कि यह सपा का पुराना रवैया है। ऐसे में सर्वसमाज के लोग सपा की संकीर्ण व जातिवादी राजनीति से ज़रूर सावधान रहें।
5. इसके साथ ही, यह बात भी जग-ज़ाहिर है कि सपा मुखिया श्री अखिलेश यादव अपने राजनैतिक स्वार्थ के लिए अपने PDA में से P को कभी पिछड़ा वर्ग, तो कभी P को पण्डितों का हितकारी बता देते हैं, जबकि इनके बारे में सच्चाई तो यह है कि वे पिछड़े वर्गों में अपनी ख़ुद की जाति के अलावा बाकी पिछड़े वर्गों, अल्पसंख्यकों तथा अपरकास्ट समाज में से ख़ासकर ब्राह्मण समाज के भी क़तई हितैषी नहीं रहे हैं।
6. इतना ही नहीं बल्कि इस पार्टी (सपा) की सभी रही सरकारों में दलितों, पिछड़ों, अक़लियतों, अपरकास्ट समाज में से विशेषकर ब्राह्मण समाज का भी काफी शोषण व उत्पीड़न आदि किया गया है तथा ना ही इनके हितों में कोई भी सकारात्मक क़दम उठाये गये हैं, बल्कि इनकी सरकार में वास्तव में केवल गुण्डों, बदमाशों, माफियाओं व अन्य अराजक तत्वों का ही भला हुआ है और साथ ही इनकी सरकार में दिन-छिपने के बाद हमारी बहिन-बेटियाँ भी घर से बाहर नहीं निकल सकती थीं। ऐसे में सर्वसमाज के लोग यू.पी. आगामी विधानसभा आमचुनाव में इस पार्टी (सपा) को सत्ता में क़तई भी ना आन दें, जो यह उनके हित में होगा।
1. उत्तराखण्ड स्टेट के हल्द्वानी में अभी हाल ही में, कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री मल्लिकार्जुन खड़गे के हुये प्रोग्राम के बाद उनके मंच का दलित होने की वजह से शुद्धीकरण किया गया है। यह जानकारी कल संसद के ज़रिये भी देश को मिली है। यह मामला अति-निन्दनीय व चिन्तनीय है तथा वहाँ कि सरकार बिना कोई देरी किये हुये ऐसे जातिवादी एवं सामन्ती तत्वों के विरुद्ध सख़्त क़ानूनों के तहत् उचित कार्रवाई करके उन्हें जेल भेजे।
2. साथ ही, इस घटना आदि के सम्बंध में आर.एस.एस. के मुखिया को भी संज्ञान लेकर ज़रुर गंभीरता से सोचना चाहिये जो कि दलितों के आर्थिक तौर पर थोड़ा मज़बूत हुये लोगों को आरक्षण से वंचित करने की बात कर रहें हैं।
3. इसके इलावा, अभी हाल ही में महाराष्ट्र के नान्देड़ में शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख श्री सुखबीर सिंह बादल पर किये गये हमले की घटना भी अति-दुःखद व चिन्तनीय है। केन्द्र व महाराष्ट्र की सरकार इस घटना को पूरी गम्भीरता से लेते हुये दोषियों के विरुद्ध सख़्त क़ानूनी कार्रवाई करे।
उत्तर प्रदेश में बी.एस.पी. सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहे श्री अनन्त कुमार मिश्रा उर्फ अन्टू मिश्रा को उनकी पार्टी विरोधी गतिविधियों आदि के फलस्वरूप आज तत्काल प्रभाव से उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है।
वैसे भी अब जबकि ख़ासकर उत्तर प्रदेश में चुनावी माहौल काफी गरमाया हुआ है, पार्टी के सभी स्तर के लोगों को विरोधियों के सभी प्रकार के साम, दाम, दण्ड, भेद आदि हथकण्डों से सावधान रहते हुये अपनी पूरी ईमानदारी व निष्ठा के साथ बी.एस.पी. के अम्बेडकरवादी मिशन को आगामी विधानसभा आमचुनाव में सफल बनाने में पूरे जी-जान से लगे रहना है, यही संदेश व अपील भी है।
3. अगर आप सामाजिक न्याय, बहुजन हित और वंचित समाज की मजबूत राजनीतिक आवाज चाहते हैं, तो **बहुजन समाज पार्टी (BSP)** को मजबूत कीजिए। 💙
**नारा बदलने से परिवारवाद नहीं बदलता।
जनता अब सब समझती है।**
**जय भीम 💙 | जय भारत 🇮🇳**
रोहित अम्बेडकर
1. **आज मैं आपको P.D.A. का एक “नया मतलब” बताता हूँ… 👇**
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने **P.D.A.** का नारा दिया, लेकिन समय-समय पर इसकी परिभाषा बदलती रहती है।
लेकिन अगर इसे परिवारवाद के चश्मे से देखें तो—
**P = पंडित
D = डिंपल
A = अखिलेश**
2.यानी नारा चाहे **P.D.A.** का हो, लेकिन सत्ता और राजनीति के केंद्र में फिर वही **परिवारवाद** दिखाई देता है।
जनता को नारों और राजनीतिक जुमलों के पीछे छिपी सच्चाई को समझने की जरूरत है।
**सावधान रहिए, जागरूक रहिए और सोच-समझकर अपना राजनीतिक समर्थन तय कीजिए।**
1.अगर दूरगामी नजरिए से देखा जाए, तो *मैं आकाश आनंद जी की बात से बिल्कुल सहमत हूँ।* उन्होंने अखिलेश यादव जी को “चाचा” कहकर न केवल एक सहज और सम्मानजनक संबोधन किया, बल्कि एक राजनीतिक संदेश भी दिया।
4. दुर्भाग्यवश, कुछ राजनीतिक लोगों ने समय-समय पर इस सम्मान को धूमिल करने का प्रयास किया। लेकिन **सही समय पर आकाश आनंद जी ने अखिलेश यादव जी को “चाचा” कहकर उसी भाषा में जवाब दिया**, जिससे यह स्पष्ट संदेश गया कि सम्मान एकतरफा नहीं हो सकता।
आज हाथरस के सादाबाद विधानसभा में डॉ. अविन शर्मा जी के समर्थन में बीएसपी के समर्पित कार्यकर्ताओं के बीच आदरणीय बहन कु. मायावती जी का संदेश लेकर पहुंचा।
आदरणीय बहन जी को पांचवीं बार मुख्यमंत्री बनाने के संकल्प के साथ जुटे सभी बीएसपी कार्यकर्ताओं का हृदय से आभार।
फिर वापस लाना है शासन, प्रशासन, अनुशासन
जय भीम, जय भारत
1.देश में ’बहुजन समाज’ में से ख़ासकर एससी, एसटी व ओबीसी वर्गों के लिये आरक्षण ’सामाजिक परिवर्तन व आर्थिक मुक्ति’ अर्थात् हमेशा से इनके आत्म-सम्मान की ज़िन्दगी से जुड़ा अति-महत्वपूर्ण व अत्यन्त संवेदनशील मामला है और जाति के आधार पर सदियों से यहाँ तोड़े, सताये व पछाड़े गये एससी व एसटी समाज के लिये तो यह अत्यन्त ज़रूरी मामला भी विशेषकर तब बन जाता है जब जातिवादी द्वेष, शोषण, प्रताड़ना, अन्याय-अत्याचार कम होने का नाम ना ले, और इसीलिये इसमें क्रीमी लेयर की बात करना अनुचित ही नहीं बल्कि परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के मानवतावादी संविधान के पवित्र उद्देश्यों के भी विरुद्ध है, हालाँकि किसी को भी इसकी अनदेखी नहीं करनी चाहिये बल्कि सभी को देश व जनहित के मद्देनज़र अपनी पूूरी ईमानदारी व निष्ठा के साथ इस पर अमल भी ज़रूर करना चाहिये।
2.जबकि इस बारे में आरएसएस प्रमुख का अभी हाल में फिर से यह कहना कि, ’आरक्षण का जानबूझकर राजनीतिकरण किया गया है जिससे समाज में कड़वाहट भरी है तथा आरक्षण के लाभार्तियों को स्वेच्छा से इसका लाभ छोड़ देना चाहिये’, वास्तव में यह इनकी ऐसी जातिवादी सोच है जिससे संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थ की पूर्ति तो हो सकती है, किन्तु इससे संवैधानिक उद्देश्यों की अवहेलना होती है, क्योंकि आरक्षण मूलतः सदियों से जातिवादी व्यवस्था के शिकार करोड़ों शोषित-पीड़ित, उपेक्षित व तिरस्कृत लोगों को मानवीय आधार पर समता व समानता का संवैधानिक व कानूनी अधिकार देना है, और जिसे आर्थिक उन्नति से कतई भी नहीं आँका जा सकता है, क्योंकि जातिवाद का दंश जीवन के हर पहलू में उन्हें डसता ही रहता है और जो क्रम अभी भी हर स्तर पर लगातार जारी है, यह आरएसएस से ज़्यादा भला कौन जानता है?
3.इतना ही नहीं बल्कि केन्द्र में अभी तक रही सभी सरकारें भी इस कड़वी ज़मीनी वास्तविकता को भलीभाँति जानती और समझती भी हैं और इसीलिये अगर वर्तमान सरकार अपने वाजिब तर्कों के आधार पर इसकी प्रभावी व समुचित पैरवी करके एससी व एसटी समाज को क्रीमी लेयर से दूर रखने हेतु अपना पक्ष अदालत से मनवा लेती है तो यह पूर्णतः उचित व संवैधानिक होगा। वैसे अक्सर यही देखा गया है कि सरकारों के लचर रवैये व अच्छी कानूनी पैरवी के अभाव में ही अदालतें ’सामाजिक परिवर्तन’(Social Transformation) आदि के मामलों में सही से न्याय नहीं कर पाती हैं।
4.इस बारे में आरएसएस से भी यही कहना है कि वह परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के मानवतावादी एवं कल्याणकारी संविधान को पूरा-पूरा आदर-सम्मान देते हुये आरक्षण को लेकर राजनीति करना छोड़ दे और साथ ही आरक्षण में किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ की वकालत बंद करके देश में ’समतामूलक समाज व्यवस्था’ (Equalitarian Social order) की स्थापना के संवैधानिक दायित्व/उद्देश्यों की पूर्ति में पूरी तरह से सहयोग करे तो यह बेहतर होगा, यही वक्त की ज़रूरत व समय की माँग भी है।
2. ये कांग्रेस की दलित विरोधी घटिया मानसिकता को दर्शाता हैं।
इसलिए दलित समाज अब समझ चुका है कि पहले भी कांग्रेस पार्टी बाबा साहब के लिए कैसे षडयंत्र रच चुकी हैं।
और कांग्रेस हमेशा से ही दलितों का उत्पीड़न और उनका प्रयोग करती आई हैं। 2/6