बिल्कुल याद रखे जाएंगे ये शब्द और ये फैसले।
इतिहास गवाह है जब-जब युवाओं ने अपने अधिकार और सम्मान के लिए ठान लिया है, सत्ता को अपने फैसलों का जवाब देना पड़ा है।
गलती हमसे भी हुई दोहरे चरित्र की पहचान धरना स्थल पर ही कर लेनी चाहिए थी। वरना पंचायती राज मंत्री से जवाबदेही तय कराए बिना एक भी पंचायत सहायक अपने हक की लड़ाई से पीछे नहीं हटता।
लेकिन कोई बात नहीं… लोकतंत्र की परीक्षा अब नजदीक है।
अपमान का जवाब हम संवैधानिक और लोकतांत्रिक तरीके से देंगे।
वक्त जरूर याद रखेगा कि इन युवाओं की आवाज़ सुनने, उनके समान अधिकार और सम्मान की रक्षा करने के बजाय लिए गए फैसलों की कीमत क्या होती है।
#पंचायत_सहायक_संघर्ष
@oprajbhar