अध्याय 11 श्लोक 21 व 46 में अर्जुन कह रहा है कि भगवन् ! आप तो ऋषियों, देवताओं तथा सिद्धों को भी खा रहे हो, जो आप का ही गुणगान कर रहे हैं। हे सहस्त्राबाहु आप अपने उसी चतुर्भुज रूप में आईये। मैं आपके विकराल रूप को देखकर धीरज नहीं कर पा रहा हूँ।#भगवदगीता_के_गूढ़_रहस्य
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शांति पूर्वक तरीके से सतसंग व दहेज मुक्त विवाह में स्टेज पर बैठे दलित दूल्हे व दूल्हन को बजरंग दल के गूंडो ने क्यों पीटा और वहा पर दलित बहनो के साथ छेड़छाड़ क्यों की।
इन कलयुग के राक्षस को गिरफ्तार करो।
अध्याय 11 श्लोक 47 में पवित्र गीता जी को बोलने वाला प्रभु काल कह रहा है कि ‘हे अर्जुन यह मेरा वास्तविक काल रूप है, जिसे तेरे अतिरिक्त पहले किसी ने नहीं देखा था।‘#TrueGuru
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गीता ज्ञान दाता काल गीता अध्याय 2 श्लोक 12, अध्याय 4 श्लोक 5, अध्याय 10 श्लोक 2 में अपने को नाशवान यानि जन्म-मरण के चक्र में सदा रहने वाला बताया है। कहा है कि हे अर्जुन! तेरे और मेरे बहुत जन्म हो चुके हैं। तू नहीं जानता, मैं जानता हूँ।#गीतामहोत्सव_पर_गीतासार
काल कोई और शक्ति है। वह श्री कृष्ण जी के शरीर में प्रेतवत प्रवेश करके पवित्र श्रीमद्भगवत गीता जी के ज्ञान रूप में चारों पवित्र वेदों का सार बोल गया। #गीतामहोत्सव_पर_गीतासार