सूत्रों के मुताबिक, महेंद्रजीत मालवीय ने बुधवार को डोटासरा से मुलाकात कर करीब 300 से अधिक कार्यकर्ताओं को कांग्रेस में शामिल कराने का कार्यक्रम तय किया था। डोटासरा ने इसके लिए गुरुवार दोपहर का समय भी निर्धारित कर दिया था। लेकिन इसी बीच वागड़ के एक नेता(अपने आपको गवर्नर समझते हैं) ने पूरा घटनाक्रम बदल दिया। सूत्रों का दावा है कि पीसीसी पहुंचने से पहले मालवीय और उनके समर्थकों को “डेलिगेशन” के नाम पर सीधे पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के सिविल लाइंस स्थित आवास ले जाया गया। वहां गहलोत के समर्थन में “चौथी बार मुख्यमंत्री”के नारे लगे, जिसने पूरे कार्यक्रम का राजनीतिक संदेश बदल दिया। इसके बाद वो नेता पीसीसी कार्यालय नहीं पहुंचे और वाया दिल्ली चीन रवाना हो गए थे।
सूत्रों के अनुसार, इस घटनाक्रम से नाराज होकर डोटासरा ने महेंद्रजीत मालवीय से साफ शब्दों में कहा कि “जब तक मैं प्रदेश अध्यक्ष हूं, कांग्रेस किसी व्यक्ति विशेष की पार्टी नहीं बनने दूंगा।” पीसीसी कार्यालय में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए डोटासरा ने कहा कि उनका आलाकमान केवल राहुल गांधी हैं। उन्होंने हाल ही में पुष्कर में राहुल गांधी द्वारा दिए गए उस बयान का भी जिक्र किया, जिसमें राहुल ने कहा था कि “डोटासरा-जूली की जोड़ी शानदार काम कर रही है।” डोटासरा ने कहा कि उन्हें किसी और की परवाह नहीं है। उन्होंने मंच से कार्यकर्ताओं को यह नसीहत भी दी कि “यहां किसी व्यक्ति विशेष के नारे मत लगाना, नहीं तो पहले वाला नारा खराब हो जाएगा।” इसे गहलोत आवास पर लगे नारों की प्रतिक्रिया के तौर पर देखा जा रहा है।
डोटासरा ने महेंद्रजीत मालवीय का नाम लेते हुए कहा कि जब उन्होंने कांग्रेस छोड़ी थी, तब उन्होंने उन्हें चुनौती दी थी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने उन्हें लोकसभा और विधानसभा उपचुनाव, दोनों में हराया। अब जब उन्होंने अपनी गलती मान ली है तो उनकी घर वापसी का स्वागत है। कांग्रेस मालवीय को वागड़ का बड़ा नेता माना रहा है।
हालाँकि,तकनीकी रूप से पहले औपचारिक जॉइनिंग की प्रक्रिया पूरी होनी चाहिए थी। इस पर डोटासरा ने टिप्पणी करते हुए कहा कि “इनकी जॉइनिंग तो मालवीय पहले ही करवा चुके हैं, इसलिए ये सभी कांग्रेस कार्यकर्ता हैं। आज उनका अभिनंदन किया जा रहा है। हालाँकि अशोक गहलोत ने साफ कहा था कि जॉइनिंग पीसीसी में होगी।
सूत्रों के अनुसार, वागड़ की इस जॉइनिंग का उद्देश्य कांग्रेस को पंचायती राज चुनावों में राजनीतिक मजबूती देना था, लेकिन कार्यक्रम के क्रेडिट और राजनीतिक संदेश को लेकर पार्टी के भीतर अलग-अलग शक्ति केंद्रों की सक्रियता भी खुलकर सामने आ गई। गहलोत आवास पर लगे नारों और उसके बाद पीसीसी में डोटासरा के सार्वजनिक संदेश को कांग्रेस की आंतरिक राजनीति के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हालांकि डोटासरा ने यह भी कहा कि गहलोत साहब कोई पराए नहीं हैं, वे हमारी पार्टी के सीनियर नेता हैं।तीन बार सीएम, तीन बार पीसीसी चीफ, तीन बार केन्द्रीय मंत्री रहे चुके हैं। डोटासरा ने कहा कि मैं नहीं कह रहा उनसे मैं बड़ा हूँ, लेकिन पार्टी मैं चला रहा हूँ तो इसके नाते मेरा धर्म बनता है जो आए सबका स्वागत। मेरे लिए तो सचिन पायलट के वहाँ जाए वो भी सम्मानीय है, गहलोत साहब वहाँ जाये वो भी सम्मानीय हैं लेकिन जाने वाले को सोचना चाहिए कब कहाँ जाना चाहिए।
सूत्रों का कहना है कि हाल ही में सचिन पायलट ने वागड़ का दौरा किया था उस समय मालवीय उनके साथ नजर आए थे, तो वागड़ वाले नेताजी को लगा कि अब अच्छा मौका है नंबर बढ़ाने के। फिर यह प्लान बनाया गया लेकिन इस प्लान की स्क्रिप्टिंग परफेक्ट नहीं थी इसलिए मिस फायर हो गया।
अब तक देश में सड़कों के पुल, एयरपोर्ट के टीनशेड गिरते देखे होंगे, अब रेलवे स्टेशनों के घटिया निर्माण की गुणवत्ता का परिणाम भी आप देख सकते हैं।
'अमृत भारत स्टेशन योजना' के अंतर्गत लगभग ₹140 करोड़ की लागत से विकसित जैसलमेर रेलवे स्टेशन का उद्घाटन आज से 5 वर्ष पहले नहीं, मात्र 5 दिन पहले 17 जुलाई 2026 को हुआ था। इसी दिन देशभर में 74 रेलवे स्टेशनों का उद्घाटन किया गया था। न जाने उन स्टेशनों की स्थिति क्या है?
22 जुलाई 2026 को हुई पहली ही बारिश में जैसलमेर रेलवे स्टेशन के टीनशेड से एक जगह नहीं कई स्थानों पर पानी की धाराएं बहने लगी, जिससे करोड़ों रुपये की लागत से हुए निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्नचिह्न हैं। जब उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद यह स्थिति है, तो पूरे निर्माण कार्य का सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है। इतने बड़े बजट की परियोजनाएं यदि इस प्रकार भ्रष्टाचार और लापरवाही की भेंट चढ़ेंगी, तो यह सरकारी धन की बर्बादी ही नहीं, यात्रियों की सुरक्षा के साथ भी गंभीर खिलवाड़ है। ऐसे घटिया निर्माण कार्य भविष्य में किसी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकते हैं।
प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी का "न खाऊंगा, न खाने दूं गा" का नारा आज इन घटनाओं के बीच कठघरे में खड़ा दिखाई दे रहा है। देश की जनता जानना चाहती है कि आखिर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद निर्माण कार्यों की गुणवत्ता इतनी खराब क्यों है और इसके लिए जिम्मेदार कौन है?
माननीय रेल मंत्री श्री @AshwiniVaishnaw जी आपकी पहल पर कराए गए रेलवे विकास कार्य किस प्रकार भ्रष्टाचार के भेंट चढ़ गए हैं आपसे आग्रह है कि जैसलमेर रेलवे स्टेशन के निर्माण कार्य की उच्च स्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए, दोषी अधिकारियों, ठेकेदारों और संबंधित एजेंसियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए तथा यह सुनिश्चित किया जाए कि रेलवे विकास के नाम पर जनता के पैसे के साथ किसी भी प्रकार का भ्रष्टाचार या समझौता न हो।
केन्द्रीय मंत्री श्री @gssjodhpur जी इस उद्घाटन समारोह में आप भी उपस्थित थे, आप भी कुछ तो प्रतिक्रिया दीजिए यह क्या हो रहा हैं।
@RailwayNorthern@RailMinIndia@INCIndia
साहिल हाथ में तिरंगा लेकर बस साफ़-सुथरी परीक्षा और मेहनत का फल मांग रहा था - पुलिस ने बंदूक उठाई और छर्रे दाग कर बुरी तरह घायल कर दिया।
ये अंग्रेज़ों का ज़ुल्म नहीं, आज़ाद भारत की मोदी सरकार की बर्बरता है - जहाँ अपना हक़ मांगते मासूम छात्रों को न्याय नहीं, छर्रे मिलते हैं।
You are the one who has harmed the future of our youth the most.
You allowed and encouraged the total capture and destruction of our education system - and protected every person responsible for it.
The students’ demands are clear:
1. Sack Dharmendra Pradhan.
2. Apologise to the students.
3. Take action against those who assaulted them.
आपने ही हमारे युवाओं के भविष्य को सबसे ज़्यादा नुकसान पहुंचाया है।
आपने न सिर्फ हमारी education system पर पूरा कब्ज़ा होने और उसे बर्बाद होने दिया, उसे बढ़ावा भी दिया - और इसके ज़िम्मेदार हर व्यक्ति को संरक्षण दिया।
छात्रों की मांगें साफ़ हैं:
1. धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाएं।
2. छात्रों से माफ़ी मांगे।
3. छात्रों के साथ हिंसा करने वालों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करें।
दिल्ली पुलिस द्वारा CJP प्रोटेस्ट के दौरान हिरासत में लिए गए लगभग 3000 छात्र-छात्राओं तथा युवाओं और महिलाओं पर बर्बर लाठी चार्ज के बाद दोपहर 2 बजे से अब तक विभिन्न थानों और स्टेडियमों में जानवरों की तरह बिना खाना और पानी गिरफ्तार रखना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और अन्यायपूर्ण है।
क्या छात्राओं और महिलाओं को इतने रात तक पुलिस स्टेशनों और स्टेडियम में रखना क़ानून का मख़ौल उड़ाना नहीं है?
मोदी जी अब और कितना नीचे गिरोगे ?
लोकतांत्रिक देश में शांतिपूर्ण विरोध करना अपराध नहीं है।
मैं दिल्ली पुलिस से मांग करता हूँ कि सभी युवाओं को तत्काल रिहा किया जाए और उनके संवैधानिक अधिकारों का सम्मान किया जाए।
पिछले 19 दिन से सोनम वांगचुक जी केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की माँग को लेकर अनशन पर बैठे हुए हैं, जिससे उनके स्वास्थ पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। मैं उनसे आग्रह करता हूँ कि वे अपना अनशन समाप्त करें।
पेपरलीक और विभिन्न अनियमितताओं के मामलों के कारण छात्रों और उनके परिवारों पर जो आपबीती है उसने सभी को झकझोर दिया है।
@RahulGandhi जी और हमारी पार्टी का मानना है — युवा देश का भविष्य हैं। उनके साथ किसी भी प्रकार का अन्याय स्वीकार नहीं किया जाएगा। छात्रों को न्याय मिलना चाहिए।
भाजपा सरकार को इस मुद्दे पर जवाब देना होगा और यह सिर्फ भावनात्मक विषय नहीं है, बल्कि छात्रों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता का प्रश्न है।