ध्रुव राठी को छोड़िए, उन्होंने अपना वीडियो डाल दिया है। जो गुंडे हैं, गोदी मी���िया को उनका पीछा करना चाहिए। ज़रा चार सवाल पूछ कर देखना चाहिए कि हज़ारों की सुरक्षा के बीच गुंडे कहाँ से आ गए? जनता के पैसे से गोदी चै��लों और अख़बारों को कई सौ करोड़ के विज्ञापन मिलते हैं। इनके पास कई सौ रिपोर्टर हैं। इनका डिटेल ले आएं, पुलिस और गृहमंत्री से पूछ कर दिखाएं कि गुंडे कहाँ से आए थे? कहाँ से हर बार आ जाते हैं और पुलिस कुछ करती क्यों नहीं है? ध्रुव का इंटरव्यू तो आसान है। उन्होंने तो अपना पासपोर्ट दिखा दिया कि भारतीय है। कमाल का दौर है। एक अखबार की रिपोर्ट में गुंडों की चर्चा न के बराबर है और इंस्टाग्राम पर उसी अख़बा��� के अकाउंट पर शानदार तस्वीरे हैं। वैसी तस्वीरें अख़बार में नहीं हैं। इसका मतलब है उस अख़बार के पास हिंसा की सूचना थी, पुलिस की ज़बरदस्ती की अपनी तस्वीरें थीं फिर भी आप पेपर के तीन चार पन्नों को पलट कर देखेंगे तो ज़बरदस्ती का स्केल दिखेगा नहीं जो उनके इंस्टा अकाउंट पर उन्हीं के शानदार फोटोग्राफर ने ली है।
@neeleshmisra In every state condition are same neelesh bhai
I went with dad's check up and their are 6 Patient with one family member means at least 10-12 persons at a time