Four things support the world: the learning of the wise, the justice of the great, the prayers of the good, and the valor of the brave.
~ prophet Muhammad PUBH
चलो धीरे धीरे अब सबको समझ आ रही है कॉकरोच पार्टी की हकीकत
अन्ना आंदोलन की तरह लोग अब बेवक़ूफ़ नहीं बनेंगे
इसलिए बोलते हैं बीजेपी हटाओ देश बचाओ कांग्रेस लाओ देश को मजबूत बनाओ ❤️🙏
@AmaanAliqadri@1492Adil2 और रही बात ‘कौन किसको काफ़िर कहता है’तो ये बहुत बड़ा मसला है। हर जगह कुछ लोग सख्त बातें करते हैं, लेकिन पूरे ग्रुप को उसी से जज करना इंसाफ़ नहीं है।
अगर तुम सच में बात करना चाहते हो, तो कुरआन और सही हदीस की रोशनी में बात करो। मज़ाक, ताने और WhatsApp वाली बातें इल्म नहीं होतीं।
@AmaanAliqadri@1492Adil2 मैं खुद पहले बरेलवी था, लेकिन जब मैंने कुरआन और सही हदीस को खुद पढ़ा और समझा तो मुझे लगा कि हमें दलील को मानना चाहिए न कि सिर्फ अपने माहौल या मस्लक को
आज अगर मैं अपने आपको सलफ़ी कहता हूँ तो ये किसी से दुश्मनी की वजह से नहीं बल्कि तहक़ीक और समझ की वजह से है।
@AmaanAliqadri@1492Adil2 काफ़िर कहना इतना आसान काम नहीं है कि हर कोई उठा कर फतवा देने लगे।
अगर तुम्हारे पास कोई सही दलील है कुरान और सही हदीस से, तो पेश करो सिर्फ WhatsApp यूनिवर्सिटी वाले जुमले और मज़ाक से कोई बात साबित नहीं होती।
इल्म में अदब होना चाहिए, वरना बात इल्म की नहीं, बस जहालत की लगती है।
@AmaanAliqadri@1492Adil2 पहली बात, इल्म ताने मारने से नहीं आता, तहकीक से आता है। तुम खुद भी सुन लो हर मस्लक के अंदर अलग-अलग राय होती है, और किसी एक को पकड़कर पूरी कौम पर हुक्म लगाना नादानी है।
देवबंद, बरेलवी, अहले हदीस ये सब अपने आपको मुसलमान ही मानते हैं और कलिमा एक ही पढ़ते हैं।