शादियां अब अंबानी के लिए बिजनेस डील का मंच बन गई हैं।
इवांका को बुलाकर सिग्नल दिया, डील पक्की हुई।
ट्रम्प परिवार को भारत बेचा जा रहा है।
अंबानी की लालच की कोई सीमा नहीं।
आज जोमैटो के फाउंडर दीपिंदर गोयल जी की एक बात ने सच में सोचने पर मजबूर कर दिया है।
उन्होंने बताया कि दिल्ली जैसे बड़े शहरों में कुछ लोग AI का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं।
लोग जोमैटो से खाना ऑर्डर करते हैं, खाना डिलीवर होते ही उसकी फोटो लेते हैं
और फिर AI की मदद से उस फोटो में मक्खी डाल देते हैं
उसके बाद वही फोटो कस्टमर केयर को भेजकर रिफंड मांग लेते हैं।
सबसे बड़ी परेशानी ये है कि
कस्टमर केयर के लिए असली और नकली शिकायत में फर्क करना लगभग नामुमकिन हो गया है।
अगर किसी के साथ सच में ऐसा हुआ हो, तो उसे भी शक की नजर से देखा जाता है।
AI जितनी तेजी से हमारी ज़िंदगी आसान बना रहा है,
उतनी ही तेजी से भविष्य के लिए खतरे भी पैदा कर रहा है
आज AI से कुछ भी बनाना आसान हो गया है
और सही-गलत की पहचान धुंधली होती जा रही है।
ये सिर्फ जोमैटो की समस्या नहीं है
👉 अमेज़न
👉 फ्लिपकार्ट
जैसी कंपनियां भी ऐसे ही फ्रॉड का सामना कर रही हैं।
जोमैटो अब डिलीवरी सिस्टम में कुछ एडवांस टेक्नोलॉजी जोड़ने की तैयारी कर रहा है,
ताकि भविष्य में ऐसे फ्रॉड रोके जा सकें।
लेकिन सोचने वाली बात ये है कि
ऐसी शिकायतों में
• होटल मालिक का कुछ नहीं बिगड़ता
• डिलीवरी बॉय का कुछ नहीं बिगड़ता
• ग्राहक खाना भी खा लेता है और पैसे भी वापस ले लेता है
सीधा नुकसान कंपनी को होता है
और उसकी प्रतिष्ठा भी खराब होती है
तकनीक का इस्तेमाल अगर ईमानदारी से हो तो वरदान है
लेकिन गलत हाथों में पड़ जाए तो
सबसे बड़ा नुकसान पूरे सिस्टम को होता है।
आप क्या सोचते हैं?
AI सुविधा है या खतरा?
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भारत की पहली एसिड अटैक सर्वाइवर डॉ. मंगला कपूर को पद्म श्री 2026 से सम्मानित किया गया। वाराणसी की यह BHU प्रोफेसर दुर्लभ रागों की संरक्षक हैं।
बचपन का काला पल
1965 में 12 साल की उम्र में पारिवारिक दुश्मनी के चलते मंगला पर एसिड अटैक हुआ। चेहरा-शरीर झुलस गया। 6 साल अस्पताल में रहीं, 36 सर्जरी कराईं। समाज ने "नककटी" जैसे ताने कसे, रिश्तेदारों ने मां को जहर खिला देने को कहा। बनारसी साड़ी व्यापारी पिता ने हौसला दिया। आर्थिक तंगी में पैदल BHU जातीं, फटे कपड़े पहनतीं। फिर भी BA, MA, PhD पूरा किया। ग्वालियर घराने से संगीत सीखा – आवाज बेदाग रही।
BHU में 30 साल की सेवा
महिला महाविद्यालय में संगीत विभाग की प्रोफेसर रहीं, 2019 में रिटायर। छात्रों को PhD कराया। राग मल्कौंस, दरबारी कनाडा जैसे लुप्त राग संरक्षित किए। 5 किताबें लिखीं, आत्मकथा 'सीरत' में संघर्ष बयां किया। "काशी की लता" कहलाईं। राज्य पुरस्कार, पीएम मोदी-सीएम योगी से मुलाकात। रिटायरमेंट के बाद निशुल्क संगीत सिखाती हैं, दिव्यांगों को मजबूत बनाती हैं।
हौसले का संदेश
मंगला कहती हैं, "चेहरा छीन लें, प्रतिभा नहीं।" एसिड हमलों पर सख्त कानून की मांग। उनके जीवन पर मराठी फिल्म 'मंगला' (2025) बनी। पद्म श्री ने सर्वाइवर्स को हौसला दिया। 70+ उम्र में साधना जारी, माता-पिता-गुरुओं का शुक्रिया। संगीत ने डिप्रेशन से उबारा।
अमर विरासत
डॉ. मंगला कपूर साबित करती हैं – जज्बा चोटों से बड़ा। भारतीय शास्त्रीय संगीत को बचाया। पद्म श्री राष्ट्र का सम्मान – संघर्ष को। युवाओं के लिए मंत्र: कला से लड़ो। यह कहानी हार न मानने की है।
कमजोर कौन है?
दीवारों पर लिखा होता है
“मर्दाना कमजोरी के लिए मिलें, हर बुधवार सुबह 11 बजे।”
कभी यह पढ़ा है?
“औरत की कमजोरी के लिए मिलें।”
नहीं। क्योंकि औरत कमजोर नहीं होती।
कमजोर तो वह चेतना होती है जो उसे समझ नहीं पाती।
एक औरत
अपना पेट कटवाती है
अपनी खाल फाड़ती है
अपने शरीर पर स्थायी निशान छोड़ती है
और उसे छुपा कर रखती है… सिर्फ इसलिए कि तुम्हारा वंश ज़िंदा रहे।
उसकी झुर्रियाँ तुम्हें बदसूरती लगती हैं,
पर क्या तुम जानते हो, वह उन्हें देखकर खुद को कितना टूटा हुआ महसूस करती है?
तुम्हें उंगली में हल्का सा कट लग जाए तो कराह उठते हो।
लेकिन जब एक औरत बच्चे को जन्म देती है
उसका दर्द सीमा पर खड़े सैनिक के कई गोलियों के बराबर होता है।
फर्क सिर्फ इतना है
सैनिक को देश सलाम करता है,
और औरत को… तुम बस “नॉर्मल” मान लेते हो।
एक कुत्ता भी अगर पाल ले, तो उसे किसी को देने का मन नहीं करता।
और कोई तुम्हें
अपनी बेटी दे देता है
अपनी बहन दे देता है
अपनी ज़िंदगी सौंप देता है
और तुम… उसकी वैल्यू तक नहीं समझते।
सभ्यता का पैमाना इमारतों की ऊँचाई नहीं,
बल्कि स्त्री को दिया जाने वाला सम्मान है।
जिस समाज में औरत को कमजोर कहा जाता है,
वह समाज नहीं बीमार मानसिकता है।
आईना दिखाने का समय है।
क्योंकि जो औरत दर्द सहकर तुम्हें जन्म देती है,
वह कमजोर नहीं हो सकती।
कमजोर वह समाज है जो उसे समझ नहीं पाया।
और हाँ, मर्द भी दर्द सहते हैं लेकिन समाज को चाहिए कि वो हर दर्द को बराबरी का सम्मान दे।
कचरे से कंचन की मिसाल: गेहूँ की भूसी से बने इको-फ्रेंडली बर्तन
आज जब पूरी दुनिया प्लास्टिक प्रदूषण से जूझ रही है, तब भारत के गाँवों से एक शानदार और टिकाऊ समाधान निकलकर सामने आया है।
गेहूँ की भूसी (Wheat Straw) से बनी ये इको-फ्रेंडली कटोरियाँ और बर्तन न सिर्फ पर्यावरण की रक्षा कर रहे हैं, बल्कि किसानों की आमदनी बढ़ाकर Waste to Wealth के सपने को भी साकार कर रहे हैं।
इस पहल की मुख्य विशेषताएँ और लाभ:
प्लास्टिक का बेहतर और सुरक्षित विकल्प
ये बर्तन पूरी तरह प्राकृतिक, बायोडिग्रेडेबल और पर्यावरण-अनुकूल हैं।
प्लास्टिक और थर्माकोल की तरह ये धरती को ज़हर नहीं बनाते, बल्कि मिट्टी में आसानी से घुल जाते हैं।
पराली जलाने की समस्या का समाधान
हरियाणा और आसपास के राज्यों में पराली जलाना वर्षों से एक गंभीर समस्या रही है।
अब वही पराली और भूसी मशीनों के ज़रिये उपयोग में लाकर प्रदूषण को रोका जा रहा है और उसे एक उपयोगी उत्पाद में बदला जा रहा है।
किसानों के लिए अतिरिक्त आय का स्रोत
अब किसान फसल के अवशेष जलाने के बजाय उन्हें बेचकर कमाई कर रहे हैं।
इससे ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे-छोटे उद्योग पनप रहे हैं और रोज़गार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।
मजबूत, टिकाऊ और उपयोगी
हाई-प्रेशर मशीनों से बने ये बर्तन दिखने में ही नहीं, इस्तेमाल में भी बेहद मजबूत हैं।
इनमें गर्म दाल, सब्ज़ी, सूप या चाय तक आराम से परोसी जा सकती है।
पर्यावरण + अर्थव्यवस्था = दोहरा फायदा
प्रदूषण में कमी
किसानों की आय में वृद्धि
ग्रामीण आत्मनिर्भरता
आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित भविष्य
यही है असली आत्मनिर्भर भारत
जहाँ खेत का कचरा, देश की ताकत बन रहा है।
अगर आपको भी लगता है कि ऐसे प्रयासों को बढ़ावा मिलना चाहिए,
तो इस संदेश को ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुँचाइए।
🌱 आज हमारे खेत मे महीनों की मेहनत, पसीना और उम्मीदें आज फसल के रूप में खेतों में मुस्कुरा रही हैं। किसान का हर दिन संघर्ष से भरा होता है, लेकिन फसल की कटाई उस संघर्ष का सबसे खूबसूरत पुरस्कार है।
मेहनत के बल पर आज मूंग की फसल तैयार है।
सभी किसान भाई और बहनों की मेहनत को सलाम।
चौधरी चरण सिंह का संदेश साफ था "किसानों के बिना कोई राष्ट्र समृद्ध नहीं हो सकता" । उनका मानना था कि अगर भारत को सशक्त बनाना है तो किसानों की भलाई, उनके अधिकारों की रक्षा और उनके हितों की रक्षा करना आवश्यक है💐🙏
शायद उनकी प्रेरणा से ही आप में उनके जैसा साहस और देश भक्ति आयी होगी ना।🤔
तभी तो जैसे उन्होंने अंग्रेजों के सरेंडर कर दिया था, वैसे ही ट्रम्प के सामने सरेंडर कर पाये हैं।🧐
सोशल मीडिया विभाग में प्रदेश महासचिव की जिम्मेदारी सौंपने हेतु शीर्ष नेतृत्व का हृदय से आभार।
विशेष धन्यवाद @ShaliniSinghINC एवं @kashikirai जी का, जिन्होंने मुझ पर विश्वास जताया।
@INCIndia की विचारधारा, जनहित की आवाज़ और युवाओं-किसानों के मुद्दों को जन-जन तक पहुँचाता रहूंगा।
@CockroachNewsX बिल्कुल सभी युवाओं को एक साथ आना चाहिए सरकार कब तक हमारे सवालों का जवाब नहीं देगी क्योंकि यूथ ही हमारे देश का भविष्य है सरकार यूथ को इग्नोर नहीं कर सकती।