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तुम्हारा नाम लिखने की इबादत हर रात करते हैं,
तुम से दूर रहकर भी, हम तुम्हीं से मोहब्बत रोज़ करते हैं।
ज़माने की निगाहों से छुपा कर अश्क आँखों के,
तुम्हारे ख़्वाब बुनने की शराफ़त रोज़ करते हैं।
चले आओ कि ये धड़कन तुम्हारे बिन अधूरी है,
तुम्हें ही याद करने की जसारत रोज़ करते हैं।
नसीबों की लकीरों में भले ही तुम नहीं मेरे,
मगर रूह-ओ-नफ़स पर तुम हुकूमत रोज़ करते हैं।
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