नीली नगरी जोधपुर का गुलाबी पौंड। जोजरीनदी रिवरफ्रंट जो हमारे मानवीय सांसद जी @gssjodhpur ने बनाया है उसके पास ही ये भव्य दर्शनीय स्थल है।
ना @RSPCB_official को दिखाई देता है और ना @JodhpurDm कलेक्टर साहब को।
INDIA HAS JUST STUNNED DEFENDING CHAMPION BAHRAIN IN STRAIGHT SETS 3-0 🤯
- 4th Consecutive win for Indian Boys at the Men's AVC Volleyball Cup 2026 🇮🇳🥹
Today, India takes a defining step in its civil nuclear journey, advancing the second stage of its nuclear programme.
The indigenously designed and built Prototype Fast Breeder Reactor at Kalpakkam has attained criticality.
This advanced reactor, capable of producing more fuel than it consumes, reflects the depth of our scientific capability and the strength of our engineering enterprise. It is a decisive step towards harnessing our vast thorium reserves in the third stage of the programme.
A proud moment for India. Congratulations to our scientists and engineers.
सोचिए, नौकरी करना कितना मुश्किल है...
वायरल ऑडियो चित्तौड़गढ़ के विधायक चंद्रभान सिंह आक्या और परिवहन निरीक्षक सुशील उपाध्याय के बीच बातचीत का बताया जा रहा है। परिवहन निरीक्षक ने चालान बना दिया है और सिफारिशी से आदमी को ऑनलाइन भरने के लिए कह रहे हैं। सिफारिशी आदमी विधायक आक्या को लाइन पर लेता है।
विधायक महोदय को जितने गालियां देनी आती हैं, वे तमाम गलियां देकर अपना रौब दिखा देते हैं। उन तमाम गालियों को बीप में बदल दिया गया है। कुल मिलाकर विधायक महोदय का आदेश यही है कि उनके आदमी की गाड़ी का चालान नहीं हो सकता।
सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को अपना काम करने के स्वतंत्रता होनी ही चाहिए। उनके बीच में इस तरह दखल देने से सख्ती से रोका जाना चाहिए। आप अपनी बात रखिए लेकिन गाली गलौज का कोई भी स्थान कैसे हो सकता है? विधायक महोदय पिछले दो चुनावों में भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़े थे लेकिन इस बार निर्दलीय हैं लेकिन नरेंद्र मोदी जी को अभी भी अपना नेता मानते हैं। फिर भी पार्टी का कोई अनुशासन तो उन पर लागू नहीं हो सकता लेकिन जनता का अनुशासन जरूर लागू होना चाहिए।
@BhajanlalBjp@narendramodi@svoruganti1466@RajCMO
FLASH: Health minister @JPNadda files an affidavit in the Supreme Court stating he will henceforth only be diagnosed by a Physiologist who scored -12 out of 800, investigated by a Biochemist who scored -8 out of 800, and operated by a Surgeon who scored 4 out of 800 in NEET.
A ₹12.35 crore under-construction ropeway collapsed in Rohtas dist, Bihar, during a trial run, days before inauguration. Not just the rope, but the pillars also collapsed.
We criticise the govt when they do bad work but rarely praise them when they do something good. That’s not right. So here’s the credit where it’s due. By making it so low quality that it collapsed before inauguration, the Bihar administration has saved many lives. If the quality had been even a shade better, it would have collapsed after inauguration and could have been catastrophic.
Thank you to whoever the honest people were behind this. I’m sure the entire ₹12.35 crore was spent on the project and nobody, from top to bottom, took any cut. God bless you for being the saviours.
This is Barmer, whose DM is called a role model because of the amazing work she has done for the district. Itna kaam karne wale DM ko “reel star” kahoge, to phir arrest to hona hi chahiye.
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में ऐसी रिपोर्ट पेश की है जिससे अरावली का दायरा सिमट गया है। अरावली राजस्थान का केवल पर्वत नहीं, हमारा 'रक्षा कवच' है। केंद्र सरकार की सिफारिश पर इसे '100 मीटर' के दायरे में समेटना, प्रदेश की 90% अरावली के 'मृत्यु प्रमाण पत्र' पर हस्ताक्षर करने जैसा है।
सबसे भयावह तथ्य यह है कि राजस्थान की 90% अरावली पहाड़ियाँ 100 मीटर से कम हैं। यदि इन्हें परिभाषा से बाहर कर दिया गया, तो यह केवल नाम बदलना नहीं है, बल्कि कानूनी कवच हटाना है। इसका सीधा मतलब है कि इन क्षेत्रों में अब वन संरक्षण अधिनियम लागू नहीं होगा और खनन बेरोकटोक हो सकेगा।
पहाड़ की परिभाषा उसकी ऊँचाई से नहीं, बल्कि उसकी भूगर्भीय संरचना (Geological Structure) से होती है। एक छोटी चट्टान भी उसी टेक्टोनिक प्लेट और पर्वतमाला का हिस्सा है जो एक ऊंची चोटी है। इसे अलग करना वैज्ञानिक रूप से तर्कहीन है।
अरावली थार रेगिस्तान को आगे बढ़ने से रोकने वाली दीवार है। विशेषज्ञों की चेतावनी है कि 10 से 30 मीटर ऊंची छोटी पहाड़ियां (रिज) भी धूल भरी आंधियों को रोकने में उतनी ही कारगर होती हैं। इन छोटी पहाड़ियों को खनन के लिए खोल देने का मतलब दिल्ली और पूर्वी राजस्थान तक रेगिस्तान को खुद निमंत्रण देना है।
अरावली की चट्टानी संरचना बारिश के पानी को रोकती है और उसे जमीन के भीतर भेजती है। ये पहाड़ियाँ पूरे क्षेत्र में भूजल रिचार्ज का काम करती हैं। इन्हें हटाने का मतलब पहले से ही पानी की कमी से जूझ रहे उत्तर-पश्चिम भारत में सूखे को निमंत्रण देना है।
अरावली वह दीवार है जो पश्चिम से आने वाली जानलेवा 'लू' (Heat Wave) और थार रेगिस्तान को पूर्वी राजस्थान, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के उपजाऊ मैदानों में घुसने से रोकती है।
यह फैसला पर्यावरण संरक्षण नहीं, बल्कि खनन माफियाओं के लिए 'रेड कार्पेट' है। थार के रेगिस्तान को दिल्ली तक जाने का निमंत्रण देकर सरकार आने वाली पीढ़ियों के साथ जो अन्याय कर रही है, उसे इतिहास कभी माफ नहीं करेगा।
विडंबना ये है कि सुप्रीम कोर्ट में यह सुनवाई इसलिए शुरू हुई थी ताकि अरावली को स्पष्ट रूप से पहचाना और बचाया जा सके। लेकिन केंद्र सरकार की जिस सिफारिश को कोर्ट ने माना, उसने अरावली के 90% हिस्से को ही तकनीकी रूप से 'गायब' कर दिया।
मैं सुप्रीम कोर्ट से आग्रह करता हूं कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को देखते हुए अपने इस फैसले पर पुनर्विचार करे। यह फैसला सीधा विनाश को निमंत्रण देने वाला है।
#SaveAravalli