@SatlokSitapurUP आज हम सभी अपने इष्ट के दर्शन के लिए दूर दराज पहाड़ों में जाते हैं तो क्या सुदामा जी, कृष्ण भक्त होते तो अपने इष्ट के दर्शन के लिए नहीं जाते। इसका मतलब साफ है सुदामा कृष्ण का भक्त था ही नहीं इसलिए तो वह नहीं जाना चाहता था। अधिक जानकारी के लिए देखिए कलयुग में सतयुग की शुरुआत
@1rajkumar123@BimlaDe09302140 दुनिया जिसे 'मित्रता और भक्ति' का उदाहरण कहती है, वह केवल एक दंतकथा है। सुदामा जी तो कृष्ण जी के चरित्र से ही असंतुष्ट थे, इसीलिए वे जीवन भर द्वारका जाने से बचते रहे। जानिए, सुदामा जी के मन में कृष्ण के प्रति क्या भावना थी? अधिक जानकारी के लिए देखिए कलयुग में सतयुग की शुरुआत —