@MauryaRoshni_ यही 5000 वाला कोर्स पहले 12000 में क्यों था ये नहीं पूछा अपने शायद ज्ञान बिंदु वाले से अब ऐसा क्या हुआ जो इतना सस्ता हो गया वो भी इतनी महंगाई के बाद
59 साल के @Wangchuk66 देश के करोड़ों युवाओं के बेहतर भविष्य के लिए 14 दिन से आमरण अनशन पर बैठे हैं, उनकी हालत बिगड़ रही है, 9 किलो वजन कम हो चुका है, लेकिन मेलोडी मोदी पर घंटों ख़बर चलाने वाला निर्दयी गोदी मीडिया की आत्मा मर चुकी है उसको करोड़ों युवाओं के मुद्दे से कोई मतलब नही।
तुम कब जागोगे युवा शक्ति?
पहुँचो जंतर मंतर।
जितना नुकसान और अपमान आप लोगों ने हिंदू धर्म का किया है, शायद भारत के 5000 वर्ष के इतिहास में बाहर से आने वाले आतताइयों ने भी नहीं किया। जितना आप लोगों ने हिंदुओं को लूटा है, आज तक किसी ने नहीं लूटा। हिंदू धर्म पर आप लोग कलंक हैं।
ये वीडियो देखिए। ये क्या कर रहे हैं आप। शर्म आती है आपको? माफ़ी माँगिए पूरे हिंदू समाज से।
@MauryaRoshni_ मतलब सोशल मीडिया में बने रहने के लिए कुछ भी पोस्ट करते रहना है यह दिल्ली में तो 40000 50000 fee है SSC का उसपे तो कभी नहीं पोस्ट आता है तुम्हारा
@kaankit Apne bahut kmaya h wo thik h but dusro k liye kya kiya h aapne jo kar raha h unhe to nicha mat dikhao special khan sir ka course 200 300 tha aaj bhi h aur crore log uska fayda utha chuke h tum nhi utha paye ho to shanti se apna dhandha chalao
@ECRlyHJP ये कहा लिखा है कि पाटलिपुत्र स्टेशन का है ये एकदम शाशन के क्रूरता में अंधे हो चुके हो जहां भी हुआ है तुम्हारे गलती से हुआ है रेलवे तुमसे संभल नहीं रहा है resign railway minister immediately 😡😡😡😡
छुट्टी का अर्थ क्या है?
विदेश यात्राएँ भी, मंदिर दर्शन भी, लक्षद्वीप के समुद्र तट भी देखे गए, समुद्र के भीतर की तस्वीरें भी आईं।
अगर विदेश यात्रा, धार्मिक यात्रा, समुद्र तट पर जाना, प्रकृति के बीच समय बिताना, अच्छा भोजन करना और आराम करना भी छुट्टी नहीं है,
तो फिर मुझे लगता है इस देश में कोई भी छुट्टी नहीं ले रहा।
हर आदमी काम ही कर रहा है - कोई मनाली में काम कर रहा है, कोई गोवा में, कोई परिवार के साथ, कोई दोस्तों के साथ।
2014 से 2026 के बीच प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं पर सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च हुए। असली बहस यह है कि इन दौरों से भारत को कितना निवेश मिला, कितने रोजगार बने और व्यापार हितों को कितना लाभ हुआ?
देश का आम आदमी नहीं देखता कि नेता ने कितने घंटे काम किया, वह देखता है कि उसके जीवन में क्या बदला।
जिस युवा का पेपर लीक हो गया, जिस किसान को फसल का दाम नहीं मिला, जिस मरीज को अस्पताल में बेड नहीं मिला, जिस परिवार की नौकरी चली गई - उसे 18 घंटे और 20 घंटे के से क्या फर्क पड़ता है?
18 घंटे काम करने का काम का परिणाम क्या निकला? शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, न्याय और नागरिक सुरक्षा के मोर्चे पर देश कहाँ पहुँचा।
युवा पूछ रहा है कि डिग्री के बाद नौकरी कब मिलेगी?
आम आदमी भी अपनी नौकरी में भी 12-14 घंटे खटता है, मजदूर धूप में पूरा दिन काम करता है, किसान बिना रविवार के खेत में उतरता है।
सवाल यह नहीं कि किसने कितने घंटे काम किया। सवाल यह है कि उस काम का परिणाम क्या निकला।
अगर काम का पैमाना सिर्फ घंटे हैं, तो इस देश का सबसे बड़ा कर्मयोगी शायद वह मजदूर है जो रोज़ दो वक्त की रोटी के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक देता है।
“जांच करने वाले खुद बेइमान। ये क्या करेंगे जांच?
“भगवान ही करेंगे जांच।”
श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के उत्तराधिकारी महंत कमल नयन दास का,
राम मंदिर दान चोरी पर बड़ा बयान।
“जो कभी साइकिल पर चलते थे, वे आज बड़ी-बड़ी गाड़ियों में घूम रहे हैं और आलीशान भवनों में रह रहे हैं।”